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‘Digital Poison’ से बच के रहना | What is Digital Poison and Digital Detox?

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What is Digital Poison and Digital Detox?

भाईसाब, क्या आपको पता है, आज अमेरिका में हर चौथा व्यक्ति चिड़चिड़ा है, हर छठवां व्यक्ति निराशा और हताशा में डूबा है और हर सातवां व्यक्ति डिजिटल लाइफस्टाइल के चलते मनोरोगों का शिकार है, भले यह सब कुछ अभी जानलेवा हद तक न पहुंचा हो, लेकिन आज डिजिटल मारामारी एक गंभीर बीमारी का भी रूप ले चुकी है, मनोचिकित्सक इसे digital poison कहते हैं, जो एक स्वस्थ इन्सान को भी अस्वस्थ कर देता है, इसलिए यूरोप और अमेरिका में बड़े पैमाने पर ‘डिजिटल डिटॉक्स’ सेंटरों की शुरुआत हो चुकी है।

भाईसाब, पहले लोग अपने अशुद्ध खानपान के चलते एक धीमे जहर की गिरफ्त में आ जाते थे और इससे छुटकारा पाने के लिए detox की प्रक्रिया अपनाते थे, आज वही डिजिटल दुष्प्रभावों से निपटने के मामले में हो रहा है, बता दें कि फोन, स्मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप, डेस्कटॉप, कंप्यूटर, आदि ने हमारी व्यक्तिगत जिन्दगी को तेज रफ्तार कर दिया है, उनसे यह digital poison बहुत तेजी से फैलने लगा है और अब इस जहर से निपटने का तरीका भी बड़े पैमाने पर लोग अपनाने लगे हैं। भाईसाब, सवाल है क्या आप भी डिजिटल व्यस्तता और इससे पैदा हुई सेहत संबंधी समस्याओं का शिकार हो चुके हैं? इसे जानने का सबसे सरल तरीका यह है कि क्या आप हर 5 मिनट में अपने notification चैक करते हैं? अगर हां तो आप डिजिटल लत का शिकार हो चुके हैं। भाईसाब, इस चक्रव्यूह से निकलने के तमाम उपायों पर तो हम आगे चर्चा करेंगे ही, सबसे पहले तुरंत जरूरी यही है कि आप अपने फोन से notification alert को फिलहाल तो turn off कर दें, अगर यह परमानेंट turn off करना संभव नहीं है तो हर दिन पूरी रात turn off रखें और सुबह जगने से लेकर सोने तक कम से कम 3 घंटों तक इस मारामारी से दूर रहें।, भाईसाब डिजिटल जहर से बचने का एक तरीका यह भी है कि अपने स्मार्टफोन को हर समय अपनी आँखों के सामने न रखें, इसकी मौजूदगी आपके हर संयम को तोड़ेगी, इसलिए अगर घर में हों तो हमेशा अपने फोन को दूसरे कमरे में रखें, डिजिटल जहर से बचने का एक तरीका यह भी है कि हर काम सोशल मीडिया में ही न करें, व्यवहारिक रूप से जीवन जीने की कोशिश करें, घर के बाहर लोगों से मिलें, व्यक्तिगत रूप से कहीं जाने की कोशिश करें, हर जगह आभासी रूप में ही न जाएं, हर समय फोन या लैपटॉप में ही न व्यस्त रहें बल्कि अखबार पढ़ने की कोशिश करें। भाईसाब, इस खतरनाक जहर से बचने के लिए, अपने गहरे पुराने दोस्तों को ढूंढ़ें, उनके साथ हर महीने-दो महीने में कहीं मिलकर इंज्वॉय करने की योजनाएं बनाएं और इसके अलावा बिना किसी योजना और बिना किसी जानकारी के कुछ रोमांचक पल भी तलाशें, यह सब इसलिए जरूरी है क्योंकि तभी आप पूरी तरह से हेल्दी हो सकेंगे। आज की तारीख में शारीरिक रूप से अच्छा से अच्छा स्वस्थ व्यक्ति भी डिजिटली बीमार है। यह बीमारी पारंपरिक बीमारियों से कोई कम नहीं है।

चलते-चलते, भाईसाब, एक और उपाय आपको बताते हैं, अगर आप डिजिटल लत से निकलकर डिजिटल लाइफ को अपने अनुशासन में ढाल लेते हैं तो यह न केवल आपके मानसिक बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा रहेगा, जान लें कि डिजिटल डिटॉक्स करने से हमारी कार्यक्षमता में जबरदस्त इजाफा होता है, इस तरह आज की तारीख में स्वस्थ रहने के लिए सिर्फ पारंपरिक बीमारियों से ही नहीं बल्कि अपने टेक्नो लाइफस्टाइल से भी जूझना है।

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