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देश में कितने प्रतिशत शाकाहारी | Vegetarianism Trends in India & Globally

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Vegetarianism Trends in India & Globally

भाईसाब, क्या भारत उतना शाकाहारी है जितना लोग समझते हैं? वास्तव में देश के अंदर ही नहीं पूरी दुनिया में भारत को लेकर यह धारणा प्रचलित है कि भारत में अधिकांश लोग शाकाहारी हैं और यहां मांसाहारी से ज्यादा शाकाहारी भोजन को महत्व दिया जाता है, लेकिन यह बात पूरी तरह सही नहीं है. क्योंकि हर 2 में से 1 भारतीय ना केवल मांसाहारी भोजन का आनंद लेता है बल्कि हर हफ्ते इसे खाता भी है. हाल ही में हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, 57.3 प्रतिशत पुरुष और 45.1 प्रतिशत महिलाएं सप्ताह में कम से कम एक बार चिकन, मछली या अन्य प्रकार की non vegeterian डिशेज का आनंद लेते हैं, यह आंकड़ा शहरी क्षेत्रों में गांव में रहने वाले लोगों की तुलना में अधिक है, शहरी क्षेत्रों में लगभग 60 प्रतिशत पुरुष और 50.8 प्रतिशत महिलाएं सप्ताह में कम से कम एक बार किसी न किसी तरह का मांस खाते हैं।

भाईसाब, अगर अलग-अलग धर्मों में शाकाहारियों की बात की जाए तो किसी भी अन्य धर्म के लोगों की तुलना में ईसाई अधिक मांसाहारी भोजन का सेवन करते हैं, लगभग 80 प्रतिशत ईसाई पुरुष और 78 प्रतिशत ईसाई महिलाएं सप्ताह में कम से कम एक बार मांसाहारी भोजन का सेवन करते ही हैं, इसकी तुलना में केवल 79.5 और 70.2 प्रतिशत मुस्लिम पुरुष और महिलाएं तथा 52.5 व 40.7 प्रतिशत हिंदू पुरुष और महिलाएं मांसाहारी भोजन खाती हैं। भाईसाब, आपको बता दें कि मांसाहार खाने वालों की सबसे ज्यादा आबादी पूर्वी, दक्षिणी और पश्चिमी भारत में है, गोवा, केरल, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश में 80 प्रतिशत से अधिक पुरुष आबादी सप्ताह में कम से कम एक बार मछली, चिकन या अन्य तरह के मांस का सेवन करती है, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा और तमिलनाडु में 50 प्रतिशत से अधिक पुरुष आबादी साप्ताहिक रूप से मांसाहारी भोजन का आनंद लेती है. भाईसाब, आपको जानकारी देना जरूरी है कि भारत मांस के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है. वहीं भाईसाब, आपको मालूम हेना चाहिए कि वेज और नॉनवेज खाने वालों के बीच अक्‍सर बहस होती रही है, कोई अच्‍छी हेल्‍थ के लिए नॉनवेज को जरूरी मानता है, उसका तर्क है कि प्रोटीन और विटामिन के लिए यह जरूरी है, वहीं शाकाहार को फॉलो करने वाले मांसाहार को न सिर्फ हेल्‍थ और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए खराब मानते हैं, बल्‍कि इसे जीव हत्‍या और हिंसा से जुड़ा विषय भी बताते हैं। भाईसाब, इस पूरी बहस से परे कुछ रिसर्च और सर्वे में सामने आया है कि पिछले दो सालों में भारत में भोजन को लेकर ट्रेंड में बदलाव आया है, खासतौर से यह बदलाव मांसाहार में देखने को मिला है। भाईसाब, इतना ही नहीं, दुनिया में खाने-पीने को लेकर इस परिवर्तन के पीछे कोरोना संक्रमण है, यानी कोरोना के दौरान दुनिया ने माना कि अच्‍छे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए मांसाहार नहीं, शाकाहार जीवनशैली अपनाना होगी। भाईसाब, एक ताजी रिसर्च में पता चला कि 65 फीसदी भारतीयों ने 2022 में शाकाहारी भोजन का रास्‍ता अपनाया, यानी उन्‍होंने शाकाहार को मांसाहार से ज्‍यादा अच्‍छा भोजन माना, इस रिसर्च की list में अमेरिका और ब्रिटेन के बाद भारत तीसरे नंबर पर है, दरअसल, विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे वजह है कि शाकाहारी भोजन में फाइबर, एंटीऑक्सिडेंट, पोटेशियम, मैग्नीशियम, फोलेट, विटामिन ए, सी, और ई अच्छी मात्रा में होता है, जिससे करीब 120 बीमारियां दूर रहती हैं, यही नहीं, 81 फीसदी भारतीय दिन के कम से कम एक भोजन को नाश्ते या फ्रूट स्नैक्स में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। भाईसाब, आपको बता दें कि राजस्थान देश का प्रमुख शाकाहारी राज्य है, जहां पहले से ही करीब 74.9 फीसदी लोग शाकाहारी हैं, इसके बाद हरियाणा, पंजाब, गुजरात, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश हैं।

चलते-चलते भाईसाब, एक और जानकारी आपको दे दें कि दुनिया के दूसरे देशों में पिछले दो साल में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, आस्टेलिया, जर्मनी, सिंगापुर, पोलैंड, इटली और इजराइल जैसे देशों में मांसाहारी लोग औसतन 500 से 1000 फीसदी शाकाहारी भोजन की तरफ आए, हालांकि वे कभी कभार किसी न किसी तरह के नॉनवेज भोजन का सेवन करते हैं। दुनिया के 10 देश ऐसे हैं जो मांसाहार छोड़कर शाकाहार अपना रहे हैं, अमेरिका में बीते 2 साल में 600 फीसदी शाकाहारी बढ़े हैं, ब्रिटेन में शाकाहारी खाद्य पदार्थों की मांग 1000 फीसदी बढ़ी है, वहीं जर्मनी, सिंगापुर, ताइवान व अन्य देशों में भी शाकाहारी लोग तेजी से बढ़ रहे हैं।

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