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देश के युवाओं की मांसपेशियां कमजोर | Understanding Causes and Prevention of Sarcopenia

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Understanding Causes and Prevention of Sarcopenia

भाईसाब, देश के युवाओं की मांसपेशियां कमजोर होने लगी हैं, आपको यह नहीं भूलना चाहिए कि मांसपेशियों को ठीक करने में दवा की कोई विशेष भूमिका नहीं है, यह Lifestyle से जुड़ी समस्या है, आप संतुलित व प्रोटीन युक्त diet और exercise को दिनचर्या में शामिल कर इसे ठीक कर सकते हैं, आपको पता होना चाहिए कि 20 से 30 की उम्र में ही शरीर में मांसपेशियां तेजी से बनती हैं और इस समय सबसे अधिक मजबूत होती हैं, ये 60 की उम्र में कमजोर होना शुरू होती हैं, लेकिन अब यह स्थिति कम उम्र में भी बन रही है..

भाईसाब, मांसपेशियों की कमजोरी को Sarcopenia कहते हैं, उचित जानकारी व सजगता के अभाव में यह बीमारी मधुमेह की तरफ धकेल सकती है, कुछ वर्ष पहले तक इस तरह की कमजोरी 60 वर्ष की उम्र में देखी जाती थी, पर अब युवाओं में भी यह समस्या होने लगी है, अगर समय पर जांच हो जाती है तो इसका इलाज आसान हो जाता है। भाईसाब, आपको जानकारी के लिए बात दें कि हाल ही में एम्स दिल्ली में डायबिटीज टाइप-2 से पीड़ित 229 मरीजों पर किए गये शोध में पाया गया कि इन मरीजों की मांसपेशियां 35 से 40 की उम्र में ही कमजोर होने लगी हैं, बता दें कि Sarcopenia को Advanced Muscle Loss भी कहा जाता है, अगर आप ढक्कन खोलते समय भी संघर्ष करते हैं और हाथ पर पकड़ नहीं महसूस कर पाते तो ये सब मांसपेशियों की कमजोरी के संकेत हैं, इससे ऊर्जा व सक्रियता कम होने लगती है, गिरने-फिसलने पर हड्डी टूटने का खतरा बढ़ सकता है। भाईसाब, यह एक शांत बीमारी यानी silent समस्या मानी जाती है, इसमें पता नहीं चल पाता कि मांसपेशियों का Loss हो रहा है, इसलिए समय-समय पर मांसपेशियों की क्षमता की जांच करते रहना चाहिए, ये जान लें कि Sarcopenia के कारण आप स्वाभाविक तौर पर exercise नहीं कर पाते जिससे मोटापा, वजन बढ़ने का खतरा होता है, यह मधुमेह के जोखिम को बढ़ा देता है। भाईसाब, Sarcopenia और मधुमेह टाइप-2 का गहरा संबंध है, एक खास बात और, जो आपको जानना चाहिए, वो ये है कि हमारी मांसपेशियां शरीर का सबसे बड़ा भाग होती हैं, यह glucose के बड़े भाग की खपत भी करती हैं, अगर ये कमजोर व क्षतिग्रस्त हैं तो उसका उपयोग पर्याप्त तरीके से नहीं हो पाता, इससे fatty liver या रक्त में मधुमेह का जोखिम बढ़ जाता है। भाईसाब, यदि आपको Sarcopenia की समस्या से छुटकारा पाना है तो, आपको हर रोज 60 मिनट exercise करना चाहिए, साथ ही इस बीच 20 मिनट मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने वाली कसरत भी करनी चाहिए, अगर मांसपेशियां अधिक कमजोर हो रही हैं, तो उसी के अनुसार व्यायाम के तरीके चुनें, जिम जाकर कसरत न कर सकें तो पैदल चलना, साइकल चलाना, तैरना, जॉगिंग को प्रतिदिन दिनचर्या में शामिल करें। भाईसाब, बैडमिंटन या क्रिकेट खेलना या सीढ़ी चढ़ने जैसी गतिविधियां भी बहुत काम आ सकती हैं, और हां यदि आप heart patient हैं तो aerobic से बचना चाहिए, पर किसी न किसी रूप में exercise जरूर करना चाहिए, ओर और बात, doctor की सलाह से मांसपेशियों को active जरूर रखें। भाईसाब, Sarcopenia की समस्या में खानपान का भी ध्यान रखना जरूरी है, आपको बता दें कि वजन के आधार पर diet का ध्यान रखें, आहार में प्रोटीन को शामिल करें, अगर 60 की उम्र है, तो आपको हर रोज 55 से 60 ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए, दिन के तीनों आहार में 20-20-20 के अनुपात में प्रोटीन लेना मांसपेशियों की क्षमता को बढ़ाने में असरकारक है, यह मांसपेशियों की टूट-फूट रोकने में मदद करता है।

चलते-चलते भाईसाब, आपको बताना जरूरी है कि Sarcopenia की समस्या में नाश्ता करना न छोडे़ं, इससे दिनभर के लिए जरूरी पोषण मिल जाता है, नाश्ते में खासतौर से अंडे, साबुत अनाज, फल और डेरी उत्पाद को शामिल करें, nutrition supplements भी ले सकते हैं, उम्र बढ़ने के साथ मजबूत मांसपेशियां बनाने के लिए हेल्दी और बैलेंस diet लेने के बावजूद भी कुछ पोषण-संबंधी कमियां रह जाती हैं, इन कमियों को दूर करने के लिए चिकित्सक की सलाह पर nutrition supplements ले सकते हैं !

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