Home Gali Nukkad भारत को बदलेंगे आज के कानून | Transforming India with Today’s Laws

भारत को बदलेंगे आज के कानून | Transforming India with Today’s Laws

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Transforming India with Today's Laws

भाईसाब, क्या आपको पता है हाल ही में देश के सुप्रीम कोर्ट का हीरक जयंती समारोह मनाया गया, सुप्रीम कोर्ट के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल सहित सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीश मौजूद रहे। बता दें कि पिछले सप्ताह ही केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट परिसर के विस्तार के लिए 800 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, और हां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोर्ट के हीरक जयंती समारोह का उद्घाटन किया, और कहा कि आज के बने कानून के कल के भारत को मजबूत करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के हीरक जयंती समारोह में प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत की प्राथमिकता न्याय में आसानी और हर नागरिक पर इसका हक है, सुप्रीम कोर्ट इस लक्ष्य की प्राप्ति का मुख्य माध्यम है, आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने भारत के जीवंत लोकतंत्र को लगातार मजबूत किया है, दूसरी ओर आज बन रहे कानून कल के भारत को मजबूत करेंगे, भाईसाब, प्रधानमंत्री ने मजबूत न्याय व्यवस्था को विकसित भारत का मुख्य आधार बताते हुए कहा कि पुराने काल के कानूनों को निरस्त कर 3 नए आपराधिक कानून लाए गए हैं। भाईसाब, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 3 नए आपराधिक कानून से हमारी कानूनी नीति एक नए चरण में प्रवेश कर गई है। भाईसाब, दुनिया भर में हो रहे बदलावों के साथ दुनिया की निगाहें भारत पर टिकी हैं, क्योंकि दुनिया का विश्वास भारत पर मजबूत हो रहा है, ऐसे समय में, भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम मिले हर अवसर का लाभ उठाएं। भाईसाब, प्रधानमंत्री ने समारोह में कहा कि Technology से न्याय पाने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, AI समाधान से बहुत से प्रक्रियाएं सरल हो रही हैं, भाईसाब आपको पता होना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसलों को सरल तथा स्थानीय भाषा में उपलब्ध कराने डिजिटल पहल की है. भाईसाब, इस अवसर पर मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस विश्वास की पुष्टि करता है कि कोर्ट को अन्याय, अत्याचार और मनमानी के खिलाफ एक सुरक्षा कवच के रूप में काम करना चाहिए, Supreme court समाधान और न्याय की संस्था है, अब virtual सुनवाई अदालतों से सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच गई है, इसने उन लोगों के लिए रास्ता खोल दिया है जो शारीरिक दूरी के कारण सुप्रीम कोर्ट तक जाने में असमर्थ थे, इससे देश या दुनिया के किसी भी हिस्से में बैठा कोई भी भारतीय वकील वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस कोर्ट के सामने बहस कर सकता है।

चलते-चलते भाईसाब, बताना जरूरी है कि भारत के संविधान निर्माताओं ने स्वतंत्रता, समानता और न्याय के सिद्धांतों वाले स्वतंत्र भारत का सपना देखा था. भारत के सुप्रीम कोर्ट ने इन सिद्धांतों के संरक्षण का निरंतर प्रयास किया है। अभिव्यक्ति की आजादी हो, व्यक्तिगत स्वतंत्रता हो, सामाजिक न्याय-सोशल जस्टिस हो, सर्वोच्च न्यायालय ने भारत की वाइब्रेंट democracy को निरंतर सशक्त किया। सात दशकों से भी लंबी इस यात्रा में सुप्रीम कोर्ट ने Individual Rights और Freedom of Speech पर कई महत्वपूर्ण निर्णय किए हैं। इन फैसलों ने देश के Socio-Political परिवेश को एक नई दिशा दी है।

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