Home Dhanda Pani भारत और चीन के व्यापारिक संबंध ।

भारत और चीन के व्यापारिक संबंध ।

0 comment

भारत और चीन का व्यापारिक संबंध सदियों पुराना है। केवल व्यापारिक संबंध ही नहीं बल्कि समय-समय पर चीन से फाह्यान , ह्वेनसांग जैसे विदेशी यात्री भी आते रहे हैं , जिनमें से कुछ लोगो ने तो नालंदा विश्वविद्यालय में रुक कर शिक्षा भी प्राप्त की है । ब्रिटिश काल के दौरान भारत और चीन के मध्य चाय का व्यापार प्रमुखता से होता था जिस पर पहले तो एकाधिकार ईस्ट इंडिया कंपनी का था लेकिन बाद में यह भी उससे छीन लिया गया था। वर्तमान में भारत और चीन के संबंधों पर नजर डाली जाए तो हम पाते हैं कि व्यापारिक लाभ में चीन हमसे आगे है इसका मुख्य कारण है कि हम चीन से अधिक मात्रा में चीजों का आयात करते हैं निर्यात की अपेक्षा। हमारे देश में कुशल कैशल की कमी होने के कारण कुशल श्रमिक नहीं मिल पाते हैं जिस कारण से अधिक से अधिक चीजों का चाहे वह कोई यंत्र हो कपड़ा हो या ऑटोमोबाइल का क्षेत्र ही हो निर्माण भारत में नहीं हो पाता है और जिन भी चीजों का निर्माण होता है तो वह परिणाम स्वरुप महंगी हो जाती हैं। हालांकि हम जेनेरिक दवाओं के उत्पादन में चीन से आगे हैं लेकिन इन जेनेरिक दावों को बनाने के लिए भी जो कच्चा माल है वह भी चीन से ही आयात करना पड़ता है । चीन की अंतरराष्ट्रीय नीति में आक्रामकता केवल भारत के साथ ही नहीं बल्कि उसके अन्य पड़ोसियों के साथ भी देखने को मिलती है । चीन की नजर मां के समय से ही फाइव फिंगर प्लान पर रही है फाइव फिंगर प्लान के अंतर्गत उसने तिब्बत को हड़प् लिया , जिसमें सिक्किम अरुणाचल प्रदेश लद्दाख के क्षेत्र भी आते हैं ।

चीन और भारत के बीच तनाव के कारण :
सबसे मुख्य कारण है चीन द्वारा LAC को मान्यता न देना , LAC को मानने से चीन हमेशा से ही आनाकानी करता रहा है ।
एक और मुख्य कारण इसका यह भी है कि चीन इतना आक्रमक इसलिए भी है क्योंकि चीन के पास नदियों की कमी है उन नदियों की कमी है जिन पर वह आसानी से बांध बना सके और उसे पानी का पूर्ण दोहन कर सके क्योंकि जो भी नदी चीन में हैं उनमें से ज्यादातर नदियों के पानी को चीन कंट्रोल करना चाहता है लेकिन अंतरराष्ट्रीय जल नीति की वजह से पूरी तरह से आधिपत्य में नहीं ले पाता है। चीन ने हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के क्षेत्र को अपने नशे में दिखाया है क्या इसलिए चीन भारत में आयोजित G20 सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति अनुपस्थित रहे । हाल ही में भारत में आयोजित G20 सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति की अनुपस्थिति का कारण यह हो सकता है कि अरुणाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्र को चीन ने अपने नशे में प्रदर्शित किया था चीन के राष्ट्रपति को यह डर रहा होगा कि T20 सम्मेलन में अगर वह पहुंचते हैं तो उनसे भी इस विषय पर चर्चा हो सकती है , चीनी राष्ट्रपति को भय रहा होगा कि उनको चौतरफा आलोचना का सामना भी करना पड़ सकता है इसीलिए अपने प्रतिनिधि मंडल को भेज दिया । इसकी और वजह यह भी हो सकती है कि चीन नहीं चाहता था की कहीं जी-20 में न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन को सर्वसम्मति से मान्यता मिल जाए , यह भारत को अलग-अलग करने का एक प्रयास भी हो सकता है जो की असफल साबित हुआ है । वर्तमान में भारत दुनिया का सबसे ऊंचा एयरफील्ड इंडो चाइना बॉर्डर पर बनाने जा रहा है, भारत ने तनाव के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के 50 किलोमीटर नजदीक लड़ाकू विमान के उतरने के लिए हवाई पट्टी का निर्माण शुरू कर दिया है , इस एयर फील्ड को बनाने की कुल लागत 200 करोड़ के आसपास आंकी गई है, इसकी आधार शिला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वर्चुअल तरीके से रखी इसका नाम न्योमा एयरफील्ड होगा । यह है और फील्ड वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी कि LAC के 50 किलोमीटर नजदीक होगी जहां लड़ाकू विमान आसानी से उतर सकेंगे , न्योमा एयरफील्ड 13 हजार फीट की ऊंचाई पर बनेगी न्योमा हवाई पट्टी पर अभी तक हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट ही आवा जाही में सक्षम थे, इसके पूरी तरह से विकसित होने के बाद यह लद्दाख का तीसरा फाइटर एयरवेज होगा । पूर्वी लद्दाख में बना रहे इस एयर फील्ड को बनाने का कम बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन BRO को दिया गया है , इसे लद्दाख में अग्रिम चौकिया पर तैनात सैनिकों के लिए स्टेजिंग ग्राउंड के रूप में विकसित किया जाएगा यह दुनिया के सबसे उंचे हवाई क्षेत्र में से एक होगा जो हमारे सशस्त्र बलों के लिए एक गेम चेंजर जैसा साबित होगा साथ ही साथ न्योमा एयर फील्ड विश्व का सबसे ऊंचा लड़ाकू हवाई क्षेत्र होगा अनुमान है कि यह करीब 3 साल में बनकर तैयार हो सकता है । न्योमा एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड का इस्तेमाल फिलहाल सेना के सामान को पहुंचाने के लिए किया जाता रहा है , यहां पर चिनूक हेलीकॉप्टर और सी 130 के विमान उड़ान भरने में सक्षम है इस एयर फील्ड के तैयार हो जाने के बाद फाइटर जेट्स भी आसानी के साथ उतर सकेंगे। चीन की बेचैनी का एक प्रमुख कारण यह भी है कि कोरोना काल के समय में बहुराष्ट्रीय कंपनियां जो कि चीन में स्थित थी अब वहां से निकलकर भारत में निवेश करना प्रारंभ कर रही हैं क्योंकि चीन के पास इन्हीं कंपनियों के माध्यम से मोटा राजस्व आता था चीन के राजस्व में इन कंपनियों का बड़ा योगदान रहा है ।हालांकि चीन का भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को सुधारने के लिए कुछ नर्मी तो आई है लेकिन चीन विदेश नीति में आक्रामकता को नहीं छोड़ रहा है ।यह देखना दिलचस्प रहेगा की चीन से भारत में आ रही बहुराष्ट्रीय कंपनियों को रोकने के लिए चीन क्या रणनीति बनाता है क्योंकि वहां के सबसे बड़े रियल एस्टेट सेक्टर के भी दिवालिया होने की आशंका जताई जा रही है ।हालांकि निष्कर्ष के तौर पर हम यह कह सकते हैं कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां के भारत में आ जाने मात्र से ही हम चीन को पछाड़ नहीं देंगे उसके लिए हमें अभी प्रत्येक क्षेत्र में बहुत कम करने की जरूरत है ।
ऐसेही महत्वपूर्ण जानकारी के लिए जुड़े रहिये भाईसाब के साथ ।

You may also like

bhaisaab logo original

About Us

भाई साब ! दिल जरा थाम के बैठिये हम आपको सराबोर करेंगे देशी संस्कृति, विदेशी कल्चर, जलेबी जैसी ख़बरें, खान पान के ठेके, घुमक्कड़ी के अड्डे, महानुभावों और माननीयों के पोल खोल, देशी–विदेशी और राजनीतिक खेल , स्पोर्ट्स और अन्य देशी खुरापातों से। तो जुड़े रहिए इस देशी उत्पात में, हमसे उम्दा जानकारी लेने और जिंदगी को तरोताजा बनाए रखने के लिए।

Contact Us

Bhaisaab – All Right Reserved. Designed and Developed by Global Infocloud Pvt. Ltd.