Home Dharohar भारत की सबसे रॉयल जगह , राष्ट्रपति भवन | Rashtrapati Bhavan |

भारत की सबसे रॉयल जगह , राष्ट्रपति भवन | Rashtrapati Bhavan |

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आज जानते है एक प्रतिष्ठित और सुंदर इमारत यानि भारत के राष्ट्रपति भवन, के बारे में । यह इमारत न केवल भारत के सर्वोच्च नायक का निवास है, बल्कि इसका इतिहास और विशेषता कुछ अलग है। सर्वप्रथम जानते है वर्त्तमान की राष्ट्रपति माननीय द्रौपदी मुर्मू जी के बारे में , इन्होने 25 जुलाई, 2022 को भारत के 15वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी । द्रौपदी मुर्मू, जो 65 वर्ष की हैं, वह ओडिशा के रायरंगपुर के एक आदिवासी नेता हैं, और भारत के राष्ट्रपति के रूप में चुने जाने वाली अनुसूचित जनजाति समुदाय के पहली व्यक्ति हैं।

राष्ट्रपति भवन का इतिहास,
सन १९५० तक राष्ट्रपति भवन को वाइसरॉय हाउस बोला जाता था। तब यह तत्कालीन भारत के गवर्नर जनरल का आवास हुआ करता था। 1911 में जब, कोलकाता के बाद दिल्ली को ब्रिटिश भारत की नई राजधानी घोषित कर दिया गया , उस वक्त अंग्रेजों ने ब्रिटिश वायसराय के लिए एक आवास बनाने का फैसला किया। वॉयसरॉय आवास बनाने का यह काम सौपा गया सर एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर इन दो प्रमुख वास्तुकारों को । काम सौपने के बाद राष्ट्रपति भवन का निर्माण 1912 में शुरू होकर , लगभग 17 साल के बाद 1929 में ख़तम हुआ और राष्ट्रपति भवन बनकर तैयार हो गया। इस विशाल और विस्मयकारी इमारत को बनाने के कार्य में 29,000 कारीगरों ने काम किया था।
आपको यह बात जानकर हैरान होगी के , राष्ट्रपति भवन के इस भव्य ढाँचे के निर्माण के लिए मालचा और रायसीना गाँवों से लगभग 4,000 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया था। अंग्रेजो ने उन गाओ के मूल निवासी लोगो को वहा से बाहर निकालने के लिए सब तरीको का इस्तेमाल किया। अंग्रेजो ने वहां के कुछ लोगो को मौद्रिक मुआवजा देने का वादा किया था, जो अंग्रेजो द्वारा कभी उन्हें नहीं दिया गया ।

भारत का यह राष्ट्रपति भवन विशेषताओं से भरा हुआ है ,यह विशाल ईमारत किसी भूलभुलैया से कम नहीं है। राष्ट्रपति भवन के इस ईमारत में ३४० कक्ष ,74 बरामदे और 18 सीढ़ियां हैं और यह विश्व में किसी भी राष्ट्राध्यक्ष के आवास से बड़ा है। यहाँ सभागार, एक विशाल बैंक्वेट हॉल, एक प्रमुख दरबार हॉल, घंटाघर और अशोक हॉल मौजूद है । राष्ट्रपति भवन के परिसर को 37 फव्वारों के साथ और बढ़ाया गया है। तो आप इस जगह के विशाल अंदरूनी हिस्सों की कल्पना कर सकते हैं। यहाँ घूमने के लिए आपको निश्चित रूप से एक गाइड की आवश्यकता होगी!

राष्ट्रपति भवन में एक समर्पित हॉल है जो भारत के राष्ट्रपति को मिले सभी उपहारों को प्रदर्शित करता है। इसमें किंग जॉर्ज पंचम द्वारा इस्तेमाल की गयी दो चांदी की कुर्सियाँ भी मौजूद है । राष्ट्रपति भवन में ‘मुग़ल गार्डन’ नमक एक उद्यान भी मौजूद है जहा हर साल एक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है जिसे उद्यानोत्सव के नाम से जाना जाता है ।उद्यानोत्सव राष्ट्रपति भवन के मुगल गार्डन में 100 से अधिक फूलों की किस्मों को प्रदर्शित करता है। विज़िटर्स को राष्ट्रपति भवन के इस क्षेत्र में जाने और मुगल गार्डन में टहलने की अनुमति दी गयी है जो 15 एकड़ के क्षेत्र में फैले हुए हैं।
राष्ट्रपति भवन की इस प्रतिष्ठित संरचना को कई भारतीय और साथ ही वैज्ञानिक तत्वों को ध्यान में रखकर बनाया गया था। भारतीय पुरातत्व प्रणाली से प्रेरित, भारत के राष्ट्रपति भवन में चक्र, जाली और बालकनियाँ भी शामिल हैं।
राष्ट्रपति भवन के अंदर 12 विशाल स्तंभ हैं, जिन पर सुंदर नक्काशी की गई घंटियां हैं। यह डिज़ाइन हिंदू और जैन मंदिरों में मिलने वाली घंटियों से प्रेरित है।
राष्ट्रपति भवन में बच्चों के लिए दो गैलरी हैं। एक गैलरी ‘बाई द चिल्ड्रन’ है, जिसमें राष्ट्रपति को भेंट की गई पेंटिंग और रेखाचित्र प्रदर्शित हैं, और दूसरी ‘फॉर द चिल्ड्रन’ है। इस गैलरी में ऐसी चीजें हैं जो बच्चों की रुचि की हैं, जैसे संगीत वाद्ययंत्र, समय क्षेत्र, एक मॉडल अखबार, ऑप्टिकल इल्यूजन डिवाइस आदि प्रदर्शित है ।एक रोचक बात बताये आपको तो सुनिए , राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में भगवान बुद्ध की एक मूर्ति रखी गई है। जी हां, राष्ट्रपति भवन के अंदर गुप्त काल की गौतम बुद्ध की एक सुंदर और विशाल प्रतिमा है। पुरानी मूर्ति चौथी शताब्दी की है, और यह कला के स्वर्ण युग से एक उत्कृष्ट कृति है।

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दरबार हॉल, जहां बुद्ध की मूर्ति मौजूद है, वहा नागरिक और रक्षा अलंकरण समारोह आयोजित किया जाता है; प्रेसिडेंशियल एस्टेट में दरबार हॉल प्रमुख आकर्षणों और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है क्योंकि इसका उपयोग नवगठित सरकार के शपथ ग्रहण समारोह, मंत्रिपरिषद और भारत के मुख्य न्यायाधीश के शपथ ग्रहण समारोह को आयोजित करने के लिए किया जाता है। इस हॉल में सामने के प्रांगण से और दरबार हॉल के दोनों ओर ग्रे संगमरमर की सीढ़ियों ऐसे , तीन तरफ से प्रवेश किया जा सकता है।

अब बात करते है मार्बल हॉल वह स्थान है जो आपको वायसराय और शाही ब्रिटिश परिवार के समय में ले जाएगा। राष्ट्रपति भवन का यह हिस्सा संग्रहालय के रूप में कार्य करता है और वायसराय और ब्रिटिश शाही परिवार की मोम की मूर्तियों और चित्रों को प्रदर्शित करता है। यह भारत के स्वतंत्रता प्राप्त करने से पहले भारत के ब्रिटिश वायसराय की कुछ मूर्तियों और स्मृति चिन्हों को भी प्रदर्शित करता है।

राष्ट्रपति भवन के अंदर एक रसोई संग्रहालय भी है। जी हाँ आपने बिलकुल सही सुना ! राष्ट्रपति भवन संग्रहालय के इस आकर्षक हिस्से में पुराने समय में भारत के राष्ट्रपति की रसोई में उपयोग किए जाने वाले बर्तनों और व्यंजनों का संग्रह है। यहाँ 1911 से उपयोग किए जाने वाले बरतन भी देखने को मिलेंगे। राष्ट्रपति भवन का मॉर्डन किचन अपनी डिशेज और स्वाद के मामले में फाइव स्टार होटलों को भी मात देता है। जब भी यहां कोई बड़ा अतिथि आता है, तो उसकी तैयारियां पहले से ही शुरू हो जाती हैं और यहां सारे काम बहुत व्यवस्थित तरीके से किए जाते हैं। भारत के राष्ट्रपति भवन की खूबसूरती को और बढ़ाने का काम करता है अशोक हॉल जो के खूबसूरती से सजाया गया कमरा है।अशोक हॉल का उपयोग विभिन्न औपचारिक कार्यों के आयोजन के लिए किया जाता है। राष्ट्रपति भवन के इस क्षेत्र का मुख्य आकर्षण है छत जिसमें एक मंत्रमुग्ध करने वाला तेल चित्रकला डिजाइन है। एक और फैक्ट जो आपको विस्मय में छोड़ देगा वह है फ़ारसी शैली का कालीन, जिसे विशेष रूप से राष्ट्रपति भवन में अशोक हॉल की भव्यता से मेल खाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।अशोक हॉल को सोच-समझकर शानदार कलाकृतियों से सजाया गया है, जिनमें से एक लंबी केस वाली घड़ी भी शामिल है।

ऐसेही रोचक जानकारी के लिए जुड़े रहिये भाईसाब के साथ।

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