Home Dharohar हिन्दू धर्म की पावन धरती,श्रीराम जी की जन्मभूमि : अयोद्धा नगरी । Ayodhya |

हिन्दू धर्म की पावन धरती,श्रीराम जी की जन्मभूमि : अयोद्धा नगरी । Ayodhya |

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आज जानते है प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोद्धा नगरी के बारे में ,
तुलसी दास जी का एक बहोत अच्छा दोहा है ,
तुलसी ममता राम सों, समता सब संसार।
राग न रोष न दोष दुख, दास भए भव पार॥
इसका मतलब,’जिनका श्री राम में ममता और सब संसार में समता है, जिनका किसी के प्रति राग, द्वेष, दोष और दुःख का भाव नहीं है, श्री राम के ऐसे भक्त भव सागर से पार हो चुके हैं’।अयोध्या हिन्दू धर्म के लिए एक ऐसी पवन धरती जहाँ आने पर रोम रोम राममय हो जाता है, जहां के हर कण कण में राम बसते है और जहाँ दुनिया भर के हिन्दू आ कर राम लला के दर्शन पाकर अपने आप को सौभाग्यशाली मानते है। यह धरती मर्यादा, त्याग, प्रतिष्ठा और बलिदान का हमेशा से प्रतीक रही है। अयोद्धा के धरती को तृप्त करने वाली सरयू नदी सीधा मान सरोवर से प्रभु राम के चरणों को धुलती है और हज़ारों भक्त इस नदी में रोज़ाना स्नान कर के अपने सभी पापों को मिटाते है।अगर अयोध्या नगरी के इतिहास पर ध्यान दें तो वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, और इसकी सम्पन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा। वहीँ जैन मत के अनुसार यहां चौबीस तीर्थंकरों में से पांच तीर्थंकरों का जन्म हुआ था। क्रमानुसार देखा जाये तो सबसे पहले तीर्थंकर ऋषभनाथ जी ,दूसरे तीर्थंकर अजितनाथ जी, चौथे तीर्थंकर अभिनंदननाथ जी, पांचवे तीर्थंकर सुमतिनाथ जी और चौदहवें तीर्थंकर अनंतनाथ जी। इसके अलावा जैन और वैदिक दोनों मतो के अनुसार भगवान रामचन्द्र जी का जन्म भी इसी भूमि पर हुआ। उक्त सभी तीर्थंकर और भगवान रामचंद्र जी सभी इक्ष्वाकु वंश से थे।

अयोध्या धरती का महत्त्व इसके प्राचीन इतिहास में निहित है क्योंकि भारत के प्रसिद्ध एवं प्रतापी क्षत्रियों की राजधानी यही नगर रहा है। उक्त क्षत्रियों में दशरथी रामचन्द्र अवतार के रूप में पूजे जाते हैं। पहले यह कोसल जनपद का राजधानी था। प्राचीन उल्लेखों के अनुसार तब इसका क्षेत्रफल 96 वर्ग मील था। यहाँ पर सातवीं शाताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग आया था। उसके अनुसार यहाँ 20 बौद्ध मंदिर थे तथा 3000 भिक्षु रहते थे।
अयोध्या का इतिहास अत्यन्त गौरवपूर्ण एवं समृद्ध है। राम भरत मिलाप के पश्चात भरत खड़ाऊँ लेकर अयोध्या में भरतकुण्ड नामक स्थान पर चौदह वर्ष तक रहे।अयोध्या शहर में फैजाबाद शहर की स्थापना अवध के पहले नबाव सआदत अली खान ने 1730 में की थी। उन्होंने इसे अपनी राजधानी बनाई, और अयोध्या का नाम बदलकर फैजाबाद कर दिया लेकिन वह यहाँ बहुत कम समय व्यतीत कर पाए। तीसरे नवाब शुजाउद्दौला यहाँ रहते थे और उन्होंने नदी के तट पर 1764 में एक दुर्ग का निर्माण करवाया था। उनका और उनकी बेगम का मक़बरा इसी शहर में स्थित है। 1775 में अवध की राजधानी को लखनऊ ले जाया गया। आज़ादी के बाद के अयोध्या नगरी के स्थिति की तो यह नगर काफी विवादों में रहा और इस विवाद का प्रमुख वजह था एक मस्जिद, जिसका नाम था बाबरी मस्जिद जिसका निर्माण बाबर के कहने पर 1527 में मीर बाक़ी ने करवाया था सं 1992 में 150,000 लोगों की एक हिंसक रैली ने दंगा का रूप ले लिया जिसमे यह बात उठी की यह मस्जिद मंदिर के ऊपर बनाया गया है इस दौरान मस्जिद को तोड़ दिया गया था। और अब यह मुद्दा हिन्दू मुस्लिम का रूप ले चूका था और कोर्ट केस हुआ वर्षो तक कोर्ट केस चलने के बाद, सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों के बेंच ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा दिए गए सबूतों और अन्य दलीलों को सुनने के बाद 2019 में राम मंदिर के निर्माण के लिए न्यायिक अनुमति दी और राम मंदिर का निर्माण शुरू हो गया है ,अयोध्या में अब एक भव्य मंदिर का निर्माण श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की देख रेख में प्रख्यात कंपनी लार्सन एंड टूब्रो द्वारा हो रहा है । ऐसी उम्मीद है कि साल 2024 के अंत तक मंदिर के कपाट दर्शन के लिए खुल जाएंगे ।मंदिर की निर्माण शैली की बात करें तो इसका निर्माण नागर शैली मे होगा, नागर शैली का प्रचलन उत्तर भारत में प्रमुखता से है। यह भारतीय स्थापत्यकला की एक प्रमुख शैली है । मंदिर का मूल डिजाएन अहमदाबाद के सोमपुरा परिवार के द्वारा 1988 में तैयार किया गया था इस परिवार ने 14 से 15 पीडियों से दुनिया भर के तकरीबन 100 से भी ज्यादा मंदिरों के डिजाइन बनाने का गौरव प्राप्त किया है। असल में राम मंदिर का नया डिजाइन मूल डिजाइन से कुछ बदलाव के साथ दोबारा तैयार किया गया है। मंदिर 235 फीट चौड़ा 360 फीट लंबा और 161 फिट ऊंचा होगा मंदिर के मुख्य वास्तुकार, चंद्रकांत सोमपुरा के साथ उनके दो बेटे निखिल सोमपुरा और आशीष सोमपुरा भी है जो कि पेशे से आर्किटेक्ट है। मंदिर परिसर में एक प्रार्थना कक्ष, एक वैदिक पाठशाला, एक संत निवास और एक यति निवास यानी की आगंतुकों के लिए आवास संग्रहालय के साथ-साथ कैफेटेरिया की भी सुविधा भी होगी। मंदिर की नींव के निर्माण के लिए पत्थर मिर्जापुर से भी लाये गए हैं , वही मंदिर निर्माण के लिए बंसी पहाड़पुर के पत्थरों का प्रयोग भी हुआ है। साथ ही साथ बेंगलुरु से ग्रेनाइट पत्थर भी भेजे गए हैं जानकारी के मुताबिक मंदिर के निर्माण के लिए 10 हजार ग्रेनाइट पत्थर के खंभों को भेजा गया है। वहीं पर मंदिर में मूर्तियों को बनाने के लिए चार जगह से पत्थर मंगाए गए थे जिनमें से नेपाल का शालिग्राम, राजस्थान का मकराना पत्थर, कर्नाटक का आरकोट स्टोन और उड़ीसा के पत्थर, इनमें से किसी एक से ही मूर्तियों का निर्माण किया जाएगा। राम मंदिर निर्माण में पूरी दुनिया से कुछ न कुछ दान आया है यहां तक की सोने और चांदियों के ईंटो को भी लोगो ने दान किया है और मोदी सरकार इस मंदिर को बनाने के लिए फण्ड भी रिलीज़ कर रही है।
हर साल दीपावली में लाखों दीयों से सरयू नदी के किनारों को और पूरी अयोध्या को सजाया जाता है इसके अलावा विभिन्न त्यौहार, राम नवमी मेला, श्रावण झूला मेला, राम लीला, परिक्रमाएँ, अनंतग्रही परिक्रमा, पंचकोशी परिक्रमा, चतुर्दशकोशी परिक्रमा, आदि यहां वर्ष भर चलते रहते है
अगर आप अयोध्या घूमने आ रहे है ,तो यहाँ के दर्शनीय स्थलों में रामकोट, हनुमान गढ़ी, तुलसी स्मारक भवन, श्री नागेश्वरनाथ मंदिर, त्रेता के ठाकुर, कनक भवन, जैन मंदिर, मणि पर्वत, छोटी देवकाली मंदिर, राम की पैड़ी, कोरियन पार्क, राम कथा संग्रहालय, सूरज कुंड, शामिल है जिनको देखने के बाद आप कभी भूल नहीं पाएंगे।
अब देखते है की राम लला के दर्शन कब तक अयोध्या के नवनिर्मित भव्य मंदिर में होते है ।
ऐसेही महत्वपूर्ण और रोचक जानकारी के लिए जुड़े रहिये भाईसाब के साथ ।

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