Home Mahanubhav जिन्हे वॉशिंगटन पोस्ट ने SuperMOM का नाम दिया ! | Sushma Swaraj |

जिन्हे वॉशिंगटन पोस्ट ने SuperMOM का नाम दिया ! | Sushma Swaraj |

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‘कुछ तो मजबूरियां रही होगीं, यूं ही कोई बेवफा नहीं होता…और हमारी ये मजबूरी है कि आप देश के साथ बेवफाई कर रहे हैं, इसलिए हम आपके साथ वफादार नहीं रह सकते’। कुछ इस तरह की शायरी से देशभक्ति की मिसाल कायम करने वाली भारत की पहली महिला विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ओजस्वी वक्ता, मिलनसार, अत्यंत प्रभावशाली व्यक्तित्व की धनी थीं. एक सक्षम राजनेता के रूप में सुषमा ने विदेशों में फंसे भारतीयों की सकुशल वतन वापसी कराई और देश को नई दिशा दी। साल 2011 में उन्होंने लोकसभा में बड़े ही शायराना अंदाज में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर देश के साथ बेवफाई का आरोप लगाया था. उनका शायराना अंदाज देखकर सारा सदन उनका कायल हो गया….। भाईसाब.. सुषमा स्वराज की गिनती उन राजनेताओं में की जाती है जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान अपने भाषण से देश-दुनिया में अलग अपनी पहचान बनाई. ये बताना बहुत जरूरी है कि हमारे देश में ऐसे बहुत से राजनेता रहे हैं जिन्हें उनके काम और ईमानदारी के लिए हमेशा याद किया जाता है और पूर्व विदेश मंत्री, सुषमा स्वराज उनमें से एक हैं. उन्होंने एक बार कहा था ‘मैं इसी तरह जीना पसंद करती हूं, देखना एक दिन चुपचाप चली जाऊंगी…’।
आज हम अपने इस लेख के जरिये सुषमा स्वराज के जीवन और उनकी राजनितिक यात्रा पर प्रकाश डालेंगे…।

– सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाया
– वॉशिंगटन पोस्ट ने उन्हें सुपरमॉम का नाम दिया
– 3 बार विधायक और 7 बार सांसद रहीं।
– 15वीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष संसद में पार्टी का नेतृत्व किया
– 2014 में विदर्भ से जीतकर संसद पहुंचीं और मोदी सरकार-1 में बतौर विदेश मंत्री जिम्मेदारी संभाली।

भाईसाब…पाकिस्तान को कई मंचों पर लताड़ लगाने वाली सुषमा स्वराज का जन्म 14 फरवरी 1952 हरियाणा के अंबाला कैंट में हुआ था। उनके पिता हरदेव शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख सदस्यों में से एक थे। उनके माता-पिता का संबंध लाहौर स्थित धर्मपुरा इलाके से रहा था। सुषमा ने अपनी अंबाला छावनी के सनातन धर्म कॉलेज कॉलेज से बीए पास किया। इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री हासिल की। 1970 में उन्हें अपने कॉलेज में सर्वश्रेष्ठ छात्रा का सम्मान मिला। वे तीन साल तक NCC की कैडेट भी रहीं। वह युवावस्था से ही एक अच्छी वक्ता रहीं। उन्हें राज्य की सर्वश्रेष्ठ वक्ता के तौर पर चुना गया था। पंजाब यूनिवर्सिटी में कानून की पढ़ाई के दौरान 1973 में उन्हें उन्हें सर्वोच्च वक्ता का पुरस्कार भी दिया गया।
भाईसाब…उनके वाककौशल और तर्कशक्ति की उनके विरोधी तारीफ भले ही ना कर पाते हों लेकिन दुनिया समझ जाती थी कि उनका कोई तोड़ नहीं है. वे केवल हिंदी को बहुत ही शुद्ध और उत्कृष्ठ अंदाज में बोला करती थीं. सितंबर 2016 में संयुक्त राष्ट्र मे दिया गया उनका हिंदी में भाषण सबसे चर्चित रहा था। हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा बनाने के लिए उन्होंने विशेष प्रयास किए थे। हमेशा संस्कृत में शपथ लेनेवाली सुषमा स्वराज कई अवसरों पर धारा प्रवाह संस्कृत में भाषण दिया करती थीं। संस्कृत के अलावा अंग्रेजी में भी बहुत धाराप्रवाह बोला करती थीं। संसद में अगर कोई सांसद उनसे अंग्रेजी में सवाल कर देता था तो वे अंग्रेजी में ही अपने तार्किक उत्तर दिया करती थीं. जब उन्होंने कर्नाटक से चुनाव लड़ा तो उन्हें कन्नड़ भी सीख कर कन्नड़ में भाषण दिए थे।
भाईसाब..वह केवल वक्ता ही नहीं थीं, वे एक प्रभावी सांसद और कुशल प्रशासक भी थीं और अटल बिहारी वाजपेयी के बाद देश की सबसे लोकप्रिय वक्ता मानी जाती थीं। 1970 के दशक में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषत से जुड़ने के बाद आपातकाल में कांग्रेस विरोधी आंदोलन में शामिल रहीं और उसके बाद जनता पार्टी की सदस्य बन गईं। 1977 में अंबाला से हरियाणा की विधायक बनीं और 25 साल की उम्र में ही चौधरी देवी लाल की सरकार में मंत्री बन सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाया. 1980 में भारतीय जनता पार्टी के गठन पर सुषमा स्वराज उसमें शामिल हो गईं। 1990 में वे राज्यसभा में निर्वाचित हुईं और 1996 में दक्षिण दिल्ली से लोकसभा का चुनाव जीत 13 दिन की वाजपेयी सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री रहीं। बाद में 13 महीने की वाजपेयी सरकार में फिर से वे मंत्री बनीं, लेकिन तब तक लोकसभा में उनके ओजस्वी भाषण उन्हें देशभर में लोकप्रिय बना चुके थे. 1998 में वे दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं लेकिन ज्लद ही वे राष्ट्रीय राजनीति में वापस लौंटी गईं।
भाईसाब..ये बाताना जरूरी है कि मोदी सरकार में सुषमा स्वराज ने बतौर विदेश मंत्री सबसे बड़ी उपलब्धियां हासिल की। एनआरआई और भारत में रहने वाले सभी उनके फैन थे। जब भी कोई सुषमा को ट्वीट करके मदद मांगता तो वह हमेशा मदद का हाथ आगे बढ़ाती थीं। यमन में फंसे साढ़े पांच हजार से ज्यादा लोगों को उन्होंने बचाया था और इस ऑपरेशन में भारतीयों के साथ ही 41 देशों के नागरिकों को सुरक्षित उनके देश पहुंचाने में मदद की। 8 साल की बच्ची गीता तो 15 साल पहले भटककर सरहद के पार पाकिस्तान पहुंच गई थी, उसे 23 साल की उम्र में वापस सुषमा भारत लेकर आईं। इसी तरह कोलकाता की जूडिथ को काबुल से अगवा कर लिया गया था। सुषमा से मदद की गुहार लगाई गई तो उन्होंने अफगान अधिकारियों से बात करके जूडिथ को रिहा कराया। साल 2015 में नेहा पारीक नामक एक नागरिक ने उनसे अपने माता-पिता के लिए मदद मांगी जो यूरोप ट्रिप से लौटते समय इस्तांबुल में फंस गए थे. क्योंकि नेहा की मां से उनका पासपोर्ट गुम गया था. नेहा की परेशानी जानकर सुषमा स्वराज ने तुरंत उनकी मदद की.
भाईसाब..उन्होने न सिर्फ भारतीयों बल्कि विदेशियों की भी मदद की. साल 2017 में हीरा अहमद नामक एक पाकिस्तानी महिला ने उनसे गुहार लगाई कि उनकी बेटी की ओपन हार्ट सर्जरी होनी है लेकिन उनकी मेडिकल वीजा रिक्वेस्ट को अप्रुवल नहीं मिला है. सुषमा स्वराज ने उन्हें तुरंत वीजा दिलाया ताकि बच्ची का इलाज समय से हो सके. सोशल मीडिया पर लोगों की गुहार सुनने और उनकी मदद करने के कारण वॉशिंगटन पोस्ट ने उन्हें सुपरमॉम का नाम दिया। पाकिस्तान हो या यमन के युद्ध में फंसे भारतीय, सभी की सुरक्षित वापसी कराई. 2014 से 2019 तक अपने 5 साल के कार्यकाल में उन्होंने 186 देशों में फंसे 90 हजार से अधिक भारतीयों की मदद की. भाईसाब विदेश मंत्री के तौर पर सुषमा स्वराज ने कई ऐसे काम किए, जिसके लिए न सिर्फ हिंदुस्तान बल्कि दुनिया के कई देशों के लोगों ने सिर झुकाकर उन्हें सलाम किया. मोदी सरकार की तेज तर्रार मंत्रियों में से एक सुषमा स्वराज ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को भी खूब लताड़ा।
भाईसाब..ये बहुत कम लोगों को पता है कि उन्होंने लव मैरिज की थी। उनका राजनीतिक सफर जितना दिलचस्प रहा, उतनी ही रोचक उनकी निजी जिंदगी भी रही है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वकील स्वराज कौशल से लव मैरिज की थी। उनके माता-पिता ने इस शादी का जमकर विरोध किया था। इसके बावजूद उन्होंने शादी की थी। सुषमा स्वराज की लव स्टोरी कॉलेज के दिनों में शुरू हुई थी। पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के लॉ डिपार्टमेंट में दोनों का प्यार परवान चढ़ा और 13 जुलाई 1975 को इनकी शादी हो गई। उनमें नारीत्व के सभी गुण थे। वह शादी, पति, परिवार संभालती थीं तो साथ ही देश और अपने पद के प्रति भी गंभीर थीं। उन्होंने शादी के बाद अपने पति का सरनेम नहीं अपनाया था लेकिन पति के नाम को ही सरनेम बना लिया था। उनके पति का नाम स्वराज कौशल है। इस कदम से उन्होंने अपने स्वावलंबन और पति के प्रति प्रेम दोनों को दिखाया। उनकी एक बेटी हैं, जिनका नाम बांसुरी स्वराज है।
भाईसाब…बहुत कम ही लोग इस बात को जानते होंगे कि सुषमा स्वराज ज्योतिष शास्त्र और रत्न शास्त्र में काफी विश्वास रखती थीं। स्वराज हर दिन ग्रह-नक्षत्र के अनुसार कपड़े पहनती थीं और उन्हीं के अनुसार खाना भी खाती थीं। उनकी जितनी रुचि लेखनी में थी, उतनी ही दिलचस्पी म्यूजिक में भी था। उन्हें पुराने गाने सुनना बहुत पसंद था। साथ ही शास्त्रीय संगीत में भी काफी रुचि था। सुषमा को कला जगत से भी खासा लगाव था। उन्हें फाइन आर्ट्स में विशेष रुचि थी। फुर्सत के समय में वो पेंटिंग्स बनाती थीं। वह भारतीय संसद की प्रथम और एकमात्र ऐसी महिला सदस्या थीं, जिन्हें आउटस्टैंडिंग पार्लिमैंटैरियन सम्मान मिला।
भाईसाब.. भाजपा की पहली महिला राष्ट्रीय मंत्री, भाजपा की पहली महिला प्रवक्ता, भाजपा की पहली महिला कैबिनेट मंत्री, दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री, देश की किसी भी राजनैतिक दल की पहली महिला प्रवक्ता जैसे कई रिकॉर्ड उनके नाम हैं। स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने साल 2019 का चुनाव नहीं लड़ा और वे मंत्री भी नहीं बनीं. 6 अगस्त 2019 को उनका निधन हो गया था।
तो भाईसाब..ये थी जानकारी भारत की पहली महिला विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बारे में, आशा करते हैं यह जानकारी आपको जरूर पसंद आई होगी, ऐसी ही अन्य महानुभाव की जानकारी के लिए जुड़े रहें भाईसाब के साथ, धन्यवाद!

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