Home Mahanubhav जिसके इशारों पर थिरकते थे बॉलीवुड सितारे! | Subrata Roy |

जिसके इशारों पर थिरकते थे बॉलीवुड सितारे! | Subrata Roy |

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भाईसाब, आज हम एक ऐसे शख्स की बात करेंगे जिसने स्कूटर पर नमकीन बेचकर अपना बिजनेस शुरू किया और बहुत कम समय में दुनियाभर में अपने ब्रांड के नाम को स्थापित किया। जिसके एक इशारे पर बॉलीवुड के सितारे थिरकने लगते थे, जी हां हम बात कर रहे हैं सहारा समूह के संस्थापक सुब्रत रॉय की जिनका 14 नंवबर को 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर समेत कई शारीरिक समस्याओं से पीड़ित थे। 12 नवंबर को उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
तो भाईसाब, आज के इस लेख में हम सुब्रत रॉय के जीवन के सफर पर प्रकाश डालेंगे और उनकी जिंदगी के उतार-चढ़ाव पर चर्चा करेंगे। कैसे उन्होंने दुनियाभर में अपना दबदबा कायम किया…।

भाईसाब, सुब्रत रॉय ने अपने करियर की शुरुआत गोरखपुर में नमकीन-स्नैक्स बेचने से की थी। वह अपने लैंब्रेटा स्कूटर पर जया प्रोडक्ट नाम का नमकीन बेचा करते थे। इसके बाद 1978 में उन्होंने गोरखपुर में एक छोटे से ऑफिस में सहारा समूह की नींव रखी। उनका जन्म 10 जून 1948 को बिहार के अररिया में हुआ था। उन्होंने गोरखपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में बिजनेस की शुरुआत भी गोरखपुर से ही की।
भाईसाब, एक समय था जब सुब्रत रॉय जब क्रिकेट सितारों और बॉलीवुड सितारों के साथ एक भव्य समारोह की मेजबानी करते थे। कॉर्पोरेट टाइकून को नियमित रूप से विदेशी नेताओं, भारतीय राजनेताओं और अन्य प्रभावशाली हस्तियों के साथ भी देखा जाता था। उन्होंने 1978 में मात्र 2000 रुपये से बिजनेस शुरू किया था। कुछ ही समय में वह नई ऊंचाई पर पहुंच गए। सहारा के प्रभारी बने। सुब्रत रॉय ने देश के सबसे शक्तिशाली वित्तीय साम्राज्यों में से एक के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि, जब 24,000 करोड़ रुपये के सहारा फंड के कुप्रबंधन का आरोप सामने आया, तो उनकी सारी प्रसिद्धि धूल में मिल गई। भाईसाब, बात करें उनके साम्राज्य की तो फाइनेंस, रीयल एस्टेट, मीडिया, हेल्थकेयर, एंटरटेनमेंट, कंज्यूमर गुड्स और टूरिज्म समेत कई क्षेत्रों में निवेश करने वाले सहारा का बिजनेस साम्राज्य विदेशों तक फैला हुआ है। सुब्रत रॉय 1976 में सहारा फाइनेंस से जुड़े और बाद में उन्होंने कंपनी की कमान अपने हाथों में ले ली। इसके बाद 1990 के दशक में वह लखनऊ चले आए और यहां कंपनी का हेडक्वार्टर बनाया। इसी साल, सुब्रत रॉय ने 217 आत्मनिर्भर टाउनशिप को कवर करते हुए सहारा सिटी परियोजना शुरू की। इसके बाद तो इनके बिजनेस का साम्राज्य फैलता ही चला गया। भाईसाब, एक समय था जब सुब्रत रॉय लखनऊ में कई भव्य कार्यक्रमों का आयोजन करते थे। उनकी पेज थ्री पार्टियों में कई बड़े सितारों को शामिल होते देखा जाता था। ना सिर्फ भारतीय बल्कि कई विदेशी नेताओं के साथ उनके काफी अच्छे संबंध थे। उनके बढ़ते नाम और पहचान के चलते सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय की सुरक्षा के आगे तत्कालीन सीएम की सिक्योरिटी भी फेल नजर आती थी। प्राइवेट सुरक्षा गार्ड और भारी पुलिस बल रॉय के साथ रहता था। सहारा के बेड़े में कई विदेशी गाड़ियां और पुलिस सरकारी वाहन शामिल थे। इसके साथ उनके साथ वकीलों का एक पैनल हमेशा चलता था।
भाईसाब, सुब्रत रॉय का सहारा समूह करीब एक दशक तक भारतीय क्रिकेट टीम का स्पॉन्सर भी रहा था। उस जमाने में सहारा समूह की संपत्ति 11 अरब डॉलर के पार थी। खबरों की मानें तो न्यूयॉर्क के प्लाजा होटल और लंदन के ग्रॉसवेनर हाउस पर भी सुब्रत रॉय का मालिकाना हक रहा। इसके अलावा वह फॉर्म्युला वन रेसिंग टीम के मालिक भी रहे। अब अगर बात करें सहारा ग्रुप के निवेशकों की तो इस वक्त सहारा ग्रुप के पास 9 करोड़ से अधिक निवेशक हैं। इसके साथ ही उनकी सहारा कंपनी की नेट वर्थ 2,59,900 करोड़ रुपये है। आज के समय में भी लखनऊ से लेकर विदेशों तक में उनके ऑफिस, मॉल और इमारत खड़ी हैं।
भाईसाब, बहुत कम लोगों को मालूम है कि सहारा श्री सुब्रत रॉय की पत्नी स्वप्ना रॉय और बेटे सुशांतो रॉय ने भारत की नागरिकता को छोड़कर बॉल्कन देश मैसेडोनिया की नागरिकता ले ली थी। उन्होंने यह नागरिकता भारतीय कानून से बचने के लिए ली थी। सहारा श्री के खिलाफ निवेशकों का पैसा न लौटाने को लेकर कई मामले चल रहे थे। ऐसे में उनके परिवार के सदस्यों ने दूसरे देश की नागरिकता लेकर खुद को भारतीय कानून से दूर करने की कोशिश की थी।
भाईसाब, मैसेडोनिया दक्षिण पूर्वी यूरोप में स्थित देश है। यह एक नया देश है, जो निवेश के लिए लोगों को नागरिकता प्रदान करता है। रिपोर्ट्स से अनुसार, सुब्रत रॉय सहारा के मैसेडोनिया के साथ काफी अच्छे रिश्ते थे। वह कई बार मैसेडोनिया के राजकीय अतिथि भी रह चुके थे। उन्होंने मैसेडोनिया में मदर टेरेसा की एक बड़ी प्रतिमा स्थापित करने की भी पेकशक की थी। उन्होंने वहां एक कसीनो बनाने का भी प्रस्ताव दिया था। मैसेडोनिया पहले युगोस्लाविया का हिस्सा था। बाद में वह 1991 में आजाद हो गया और 1993 में संयुक्त राष्ट्र का सदस्य बना।
भाईसाब, सहारा इंडिया के पतन की शुरुआत प्राइम सिटी के IPO से हुई थी। इस धोखाधड़ी का पता चलने के बाद सेबी ने सहारा इंडिया के सेबी अकाउंट को फ्रीज कर दिया और केस दायर किया। इस केस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सुब्रत रॉय को दो साल तक तिहाड़ जेल में रहना पड़ा। वह 2016 में पैरोल पर जेल से बाहर आए थे। आपको बता दें कि सहारा इंडिया में करोड़ों निवेशकों की जमा-पूंजी जमा है। इसके लिए सहारा ग्रुप के 4 कोऑपरेटिव सोसाइटी जिम्मेदार है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में सहारा ग्रुप को आदेश दिया था कि वह निवेशकों को ब्याज के साथ उनका पैसा लौटाए। इस आदेश के बाद केंद्र सरकार ने निवेशकों के पैसे वापस देने के लिए सहारा रिफंड पोर्टल शुरू किया था। इस पोर्टल पर आवेदन देने के बाद निवेशकों को उनकी राशि वापस मिल जाएगी। आपको बता दें कि रिफंड के लिए केवल ऑनलाइन ही क्लेम किया जा सकता है। इसके अलावा यह पूरी तरह से निशुल्क है। पिछले 11 साल में सेबी ने निवेशकों को 138।07 करोड़ रुपये वापस किये हैं। निवेशकों द्वारा निवेश की गई राशि सेबी के पास है और यह ऑनलाइन आवेदन करने वाले निवेशकों को ही मिलेगी। हालांकि सहारा समूह को कुछ राहत तब मिली जब केंद्र सरकार ने सहारा के निवेशकों की रकम को वापस करने के लिए पोर्टल शुरू किया। सहारा समूह के पास वर्तमान में देश के कई शहरों में संपत्तियां हैं जिनकी कीमत दो लाख करोड़ से अधिक होने का दावा किया जाता है। सहारा के पास लखनऊ, गोरखपुर, मुंबई में तमाम बेशकीमती संपत्तियां हैं, जिसमें एंबी वैली प्रमुख है।
भाईसाब, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुब्रत रॉय की मौत कार्डियो रेस्पिरेटरी अरेस्ट के कारण हुई है।
आपको ये जानना जरूरी है कि कार्डियोरेस्पिरेटरी अरेस्ट लंग्स और दिल के फंक्शन ठीक से काम न करने और रूकने के कारण होता है। यह स्थिति आमतौर पर हृदय की काम करने की प्रणाली में समस्याओं के कारण होती है जो अक्सर हृदय के काम करने में बाधा उत्पन्न करती है। जब हृदय धड़कना बंद कर देता है। जिसके कारण शरीर में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता है और बाद में यह खतरनाक रूप ले लेती है। ब्लड सर्कुलेशन के कारण शरीर की प्रत्येक कोशिका में ऑक्सीजन पहुंचता है और जब वह फेल हो जाता है, तो अंगों और कोशिकाओं में ठीक से ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता और वह काम करना बंद कर देता है।
तो भाईसाब, ये थी सहारा समूह के संस्थापक सुब्रत रॉय के जीवन की कहानी, आशा करते हैं यह जानकारी आपको जरूर पसंद आई होगी, ऐसी अन्य जानकारी के लिए जुड़े रहें भाईसाब के साथ…धन्यवाद!

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