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ट्रक ड्राइवरों की हड़ताल की पड़ताल! | Strike ends, government bows down

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भाईसाब, आपको पता होना चाहिए कि अब आपको सब्जियां, दूध, दवाइयां और रसोई गैस आदि की किल्लत नहीं होने वाली है, क्योंकि देशभर में चल रही ट्रक और बस ड्राइवरों की हड़ताल अब खत्म हो गई है। अब सवाल ये उठता है कि सरकार को अगर ड्राइवरों को आगे झुकना ही था, तो ऐसा कानून लाया ही क्यों ? जिसके कारण देशभर के ट्रक और बस ड्राइवरों ने स्ट्राइक कर दी और कुछ दिनों के देश की जिंदगी ठहर गई,आम जनता परेशान हो गई। इस मामले में एक सवाल ये उठता है कि, क्या इस हड़ताल के पीछे कोई गहरी साजिश तो नहीं थी, कि अचानक सबकुछ रूक गया, ये जांच विषय है।

भाईसाब, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि संसद में एक कानून संशोधित हुआ है। इस हिट एंड रन’ कानून के मुताबिक, यदि ड्राइवर की तेज गति या लापरवाही से किसी की मौत हो जाती और वह घटनास्थल से भाग जाता है तो उसे 10 साल की कैद हो सकती है। साथ ही 7 लाख रुपये जुर्माना भी लग सकता है। ये कानून दोपहिया और चौपहिया वाहन चालकों पर लागू होता है। जबकि मौजूदा कानून में ये सजा 2 साल की है। वहीं ड्राइवरों का तर्क है कि मौकास्थल से उन्हें इसलिए भागना पड़ता है, क्योंकि गुस्साई भीड़ उन पर हमला कर सकती है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस का कहना है कि कानून में संशोधन से पहले ट्रक ड्राइवरों से राय नहीं ली गई। पुलिस बिना जांच के ही दोष बड़े वाहन के ड्राइवर पर मढ़ती है। हालांकि, सरकार ने संसद में कहा था कि जो चालक पुलिस को एक्सीडेंट की सूचना देंगे, उनके प्रति नरमी से व्यवहार किया जाएगा। भाईसाब ट्रक ड्राइवर अपने प्रदर्शन के पीछे का कारण हाल ही में लागू हुई भारतीय न्याय संहिता में ‘हिट एंड रन’ के कानून को बता रहे थे। ड्राइवरों का कहना था कि यह कानून उनके अधिकारों को प्रभावित करता है और इसके लागू रहते हुए वह गाड़ी नहीं चला सकते। आपको बता दें कि इस अपराध को नई न्याय संहिता में गैर-जमानती बताया गया है। जमानत ना देने वाली बात को लेकर ट्रक ड्राइवर प्रदर्शन कर रहे थे। उनका कहना थे कि हादसे के बाद जब तक ड्राइवर की गलती को लेकर फैसला नहीं आता तब तक वह जेल में रहेगा भले ही वह निर्दोष हो। उनका कहना था कि वह हादसे के बाद भीड़ के गुस्से से बचने के लिए हादसे वाली जगह से भागते हैं ना कि पीड़ित को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से। भाईसाब, यह कानून हादसा करके भागने वालों पर ही विशेष रूप से प्रभाव डालेगा। ऐसे में सुनवाई के दौरान ड्राइवर के जेल में रहने और ट्रक के खड़े रहने से मालिक को भी नुकसान होगा। इसके अलावा इस अपराध में जुर्माने की राशि को लेकर भी ड्राइवर और ट्रक मालिक नाराज थे। उनका कहना था कि इसमें जुर्माना 7 लाख रुपए रखा गया है जो कि अधिक है और कम कमाई वाले ड्राइवर इतनी धनराशि नहीं दे सकता। ट्रक ड्राइवर और मालिक पुराने कानून का समर्थन कर रहे हैं। भाईसाब, आपको जानकारी दे दें कि लापरवाही से गाड़ी चलाने के और किसी को मार के भागने को लेकर पुराना कानून भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत धारा 304 (A) में प्रावधान है। इसके अंतर्गत कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति गाड़ी लापरवाही से चलाते हुए किसी को मार देता है और वहां से भागता है तथा दोषी सिद्ध होता है तो उसे 2 साल की सजा दी जाएगी। साथ ही उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। ऐसे मामलों में पहले जमानत का प्रावधान भी था।

भाईसाब, सवाल उठता है कि आखिर सरकार को नया कानून लाने की आवश्यकता क्यों पड़ गई ? तो जवाब ये है कि लापरवाही से गाड़ी चलाने वाले और एक्सीडेंट कर भागने के मामले भारत में लगातार बढ़ रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में भारत की सड़कों पर 4.46 लाख हादसे हुए जिसमें 1.7 लाख लोगों ने जान गंवाई। इन हादसों में से लगभग 11% हादसे ट्रक और बस जैसे बड़े वाहनों से हुए। वहीं 1.7 लाख मौतों में से 87% मौतें गाड़ी तेज चलाने, लापरवाही से चलाने या फिर नशे में चलाने के कारण हुईं। यानी सड़क हादसों के कारण होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण लापरवाही से गाड़ी चलाना ही रहा। ऐसे में सरकार ने सड़क पर लोग ध्यान से गाड़ी चलाएं और साथ ही जो ड्राइवर सड़क पर हादसे करके भाग जाते हैं उनके लिए सजा कड़ी करने को नई भारतीय न्याय संहिता में सजा को बढ़ाया गया और साथ ही इसे गैर जमानती अपराध बनाया गया।

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भाईसाब, सवाल ये भी उठता है कि क्या प्रदर्शन करने वालों तक गलत सूचना पहुंची है? हालांकि भारतीय न्याय संहिता में लापरवाही से गाड़ी चलाने और हिट एंड रन के चलते कानून सख्त करने को लेकर देशभर में ट्रक ड्राइवर ही अधिकांश प्रदर्शन कर रहे थे जबकि यह कानून हर तरह के वाहन चालकों पर लागू होता है। यदि कोई दुपहिया वाहन से भी किसी को मार के भाग जाता है तो उस पर भी यही कार्रवाई होगी। ऐसे में माना जा रहा है कि प्रदर्शन करने वाले तक इस मामले में गलत सूचना पहुंची है। ये भी माना जा रहा है कि कुछ लोग इस कानून के विरोध के आड़ में अपना एजेंडा भी सेट कर सकते है। ट्रक यूनियन आल इंडिया ट्रकर्स वेलफेयर असोसिएशन का कहना है कि वह कानून के खिलाफ नहीं हैं, बस इसमें ट्रक ड्राइवरों के लिए कुछ छूट चाहते हैं।

भाईसाब, आखिर सरकार को झुकना पड़ा और सरकार ने कहा कि फिलहाल कानून को लागू नहीं किया जाएगा. और इस तरह ट्रक और बस ड्राइवरों की हड़ताल फिलहाल खत्म हो गई है। अगर ये हड़ताल नहीं रोकी जाती तो आम जनता की जेब पर इसका भारी असर भी पड़ सकता था। ट्रक ड्राइवर की हड़ताल की वजह से सब्जियां महंगी होने लगी थी। दूध, दवाइयां और रसोई गैस की कमी हो सकती थी। उधर पेट्रोल पंपों पर पहले ही लंबी-लंबी कतारें लगने लगी थी। कुछ शहरों के पेट्रोल पंप पर तो तेल खत्म भी हो गया था।

भारत में 80 लाख से ज्यादा ट्रक ड्राइवर हैं। ये लोग हर दिन लोगों की जरूरत का सामान एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचाते हैं। हर साल 100 अरब किमी से ज्यादा की दूरी तय करते हैं। अगर ट्रक चालकों की हड़ताल कुछ दिनों तक जारी रहती तो देश की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता था। आम जनता तक रोजाना जरूरतमंद की चीजें पहुंचाने में ट्रक ड्राइवरों का अहम योगदान होता है।

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