Home Teej Tyohhar रक्षाबंधन के पीछे छुपी हुई कहानिया | Stories Behind Rakshabandhan |

रक्षाबंधन के पीछे छुपी हुई कहानिया | Stories Behind Rakshabandhan |

by bs_adm_019
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हिंदुस्तान अपनी संस्कृति, परम्पराओ और त्योहारों के लिए प्रसिद्ध माना जाता है| और बात जब त्योहारों की हो, तो हमे “फूलो का तारो का सबका कहना है, एक हज़ारो में, मेरी बहना है!” ज़रूर याद आता है|

और क्यों नहीं आएगा भाईसाब! जब यह दिन पूरा भारत भाई-बहन के पावन रिश्ते को धूम-धाम से मनाता है|

नमस्कार! भाईसाब, तीज त्यौहार में

आइये जानते है रक्षा बंधन कि ख़ास बातें:

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रक्षाबंधन एक लोकप्रिय हिंदू त्योहार है जो भाइयों और बहनों के बीच प्यार और सुरक्षा के बंधन का जश्न मनाता है।

यह मुख्य रूप से भारत, नेपाल और दुनिया भर में भारतीय प्रवासियों के बीच मनाया जाता है।

रक्षा बंधन आमतौर पर हिंदू महीने श्रावण की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, जो अगस्त में पड़ता है। जैसी ही जुलाई का महीना समाप्त होने आता है, हिन्दुस्तानियो को रक्षाबंधन का बेसब्री से इंतज़ार रहता है|

यह त्यौहार अनोखा है और इसके मानाने का तरीका भी :
यह दिन बहन अपने भैया को ‘राखी’ बांधती है, जो एक बहन के प्यार और अपने भाई की भलाई के लिए प्रार्थना का प्रतीक है। बदले में, भाई अपनी बहन को उपहार देता है और जीवन भर उसकी रक्षा करने का वादा करता है।यह दिन हिंदुस्तान के हर घर से आरती, परिवार के हसी ठहाके और भाई-बहनो की नोक-झोक की गूंज ज़ोर-शोर से आती है|भाई-बहन के इस तीखे-मीठे रिश्ते की तरह, यह पर्व मिठाइयों और स्वादिष्ट पकवान के बिना अधूरा है|महाराष्ट्र और अन्य तटीय क्षेत्रों में, रक्षा बंधन त्योहार को नारली पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है, एक ऐसा समय जब लोग समुद्र की पूजा करते हैं।मध्य प्रदेश और बिहार में, इस दिन किसान अपनी भूमि की पूजा करते हैं, जबकि माताएं और उनके बेटे विशेष पूजा करते हैं।
आप सुन के दंग रह जाएंगे, लेकिन उत्तर प्रदेश के गोंडा ज़िले में राखी मनाना तो दूर की बात है, गोंडा वासी रक्षाबंधन का नाम तक नहीं लेते|
मान्यता है कि जगत पुरवा गाँव में जब भी किसी बहन ने अपने भैया को राखी बाँधी है, कुछ न कुछ दुर्घटना घटी है|
लोगो का विश्वास है कि जिस दिन राखी पे किसी बच्चे का जन्म होगा, उसी दिन ये श्राप उठेगा और वहाँ के सभी परिवार हसी-ख़ुशी से इस पवित्र पर्व को मन पाएंगे|लेकिन दिल दहला देने वाली बात यह है कि इस गाँव ने पिछले तीन पीढ़ियों से राखी का उत्सव देखा ही नहीं है|

रक्षाबंधन के पीछे छुपी हुई कहानियों को, आइये जानते है:

ऐसा माना जाता है कि जब कृष्णा भगवान, शिशुपाला के 101 वे अपराध पे, अपने सुदर्शन चक्र से उनकी हत्या कर देते है हत्या करते वक्त, कृष्णा कि ऊँगली कट जाती है और तब द्रौपदी उनके ज़ख्म को अपने कपडे के टुकड़े से लपेटती है| प्रसन्न हो कर  कृष्णा भगवन उन्हें वचन देते है कि भविष्य मे वे भी द्रौपदी कि संकट मे सहायता करेंगे| अंततः, एक भाई के तौर पर भगवान कृष्ण ने द्रौपदी की गरिमा की रक्षा करके अपना वचन निभाया जब कौरवों ने पूरे दरबार के सामने द्रौपदी का अपमान करने की कोशिश की थी|जब गुजरात के बहादुर शाह जफर ने हमला किया तो रानी कर्णावती ने हुमायूँ को राखी भेजकर सुरक्षा मांगी। हालाँकि हुमायूँ देर से पहुंचे, लेकिन उन्होंने बहादुर शाह ज़फ़र को हराकर अपना वादा निभाया और राज्य को वापिस जीत लीया।बंगाल विभाजन के दौरान, रवीन्द्रनाथ टैगोर ने बंगाल के हिंदू और मुसलमानों के बीच बंधन को मजबूत करने के लिए राखी महोत्सव की शुरुआत की। उन्होंने उन्हें एक-दूसरे का समर्थन करने और मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ विरोध करने के लिए प्रोत्साहित किया।राखी का त्यौहार अब सिर्फ भाई-बहनो तक ही सिमित नहीं रहा| बहनें अपने चचेरे भाई-बहनों, करीबी दोस्तों या यहां तक कि जिन लोगों को वे भाई मानती हैं, उनकी कलाई पर राखी बांध सकती हैं और बदले में आशीर्वाद प्राप्त कर सकती हैं।

धन्यवाद!

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