Home Gali Nukkad सोनम वांगचुक का अनशन | Sonam Wangchuk’s Environmental Activism

सोनम वांगचुक का अनशन | Sonam Wangchuk’s Environmental Activism

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Sonam Wangchuk's Environmental Activism

भाईसाब, एक सवाल आपसे है, क्या कोई पर्यावरण और संस्कृति को बचाने के लिए अनशन कर सकता, वो भी माइनस 15 डिग्री तापमान के बीच, आप सोच भी नहीं सकते है, लेकिन ऐसा हो रहा है, जी हां लद्दाख का एक इंजीनियर अपनी मांगों को लेकर पिछले 13 दिनों से 110 लोगों के साथ अनशन पर बैठा है, उसे लद्दाख के अलग-अलग हिस्सों समेत देशभर के लोगों का बड़ा समर्थन मिल रहा है, भाईसाब देखने वाली बात है कि देश का मीडिया लोकसभा चुनाव के बीच उसे कितना coverage देता है..

भाईसाब, खुले आसमान तले माइनस 15 डिग्री में 110 लोगों के साथ अनशन पर बैठनेवाले पर्यावरणविद् इनोवेटर और इंजीनियर सोनम वांगचुक ने सरकार की नाक में दम कर दिया है, लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने, संविधान की छठी सूची में शामिल करने की मांग को लेकर वांगचुक ने 6 मार्च से आमरण अनशन शुरू किया है, ये अनशन लद्दाख के पर्यावरण और संस्कृति को बचाने के लिए भी किया जा रहा है, भाईसाब, वांगचुक ने सीधे-सीधे भाजपा पर हमला बोला और कहा कि भाजपा ने अपने मेनिफेस्टो में लद्दाख को संविधान की छठी सूची में शामिल करने का वादा किया था, लेकिन इसे अब तक पूरा नहीं किया गया है। भाईसाब, आपको जानकारी देना जरूरी है कि छठी अनुसूची राज्यों को विशेष प्रशासनिक शक्तियां देती है, इससे पर्यावरण और स्थानीय लोगों को फायदा मिलता है। भाईसाब, आपको राजनेताओं की चतुराई को समझना जरूरी है, राजनेता केवल अगले 5 वर्षों के बारे में सोचते हैं और कुछ उद्योगपतियों के लाभ के लिए पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों को बेच देते हैं, स्थानीय लोगों को पीढ़ियों तक इसका परिणाम भुगतना पड़ता है, जब मानव जनित आपदाएं आती हैं तो इसकी लागत उन मुनाफों से अधिक होती है, लेकिन इसका भुगतान करदाताओं के पैसे से किया जाता है, यह कहानी पूरे हिमाचल से लेकर उत्तरांचल और सिक्किम तक दोहराई गई है, वांगचुक ने साफ कहा कि हमें चतुराई की नहीं, बुद्धिमत्ता की जरूरत है। भाईसाब, ये अनशन क्यों शुरू किया गया, ये भी आपको जानना जरूरी है, गृह मंत्रालय की तरफ से लद्दाख के मुद्दों को लेकर बनाई गई सब कमेटी की बैठक बेनतीजा रहने के बाद से वांगचुक ने अनशन शुरू किया है, उधर, गृह मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया कि उनकी मांगों पर क्रियान्वयन में दो से तीन महीने का वक्त लग सकता है, लेकिन Leh Apex Body और Kargil Democratic Alliance के प्रतिनिधि इसे फौरन अमल में लाने पर जोर दे रहे हैं। भाईसाब, इस अनशन की वजह से लद्दाख में इन दिनों बड़ी सियासी गर्मी भी देखी जा रही है, और इसकी आंच लोकसभा चुनावों के लिहाज से एक बड़ी सियासी पिच भी तैयार कर रही है, दरअसल अब वांगचुक के 21 दिन के अनशन पर अब राजनीतिक दल बड़ा मुद्दा बनाने की ओर बढ़ गए हैं, इस पूरे मामले में प्रियंका गांधी ने भी सोनम का समर्थन कर उनकी मांग को जायज ठहराया है, उन्होंने इस अनशन को लद्दाख की जनता से जोड़कर सियासी दांव भी खेल दिया है। भाईसाब, हैरानी की बात है कि लेह पोलो ग्राउंड के पास में एक बड़े मैदान पर बैठे वांगचुक को रोजाना तकरीबन एक हजार लोग आकर अपना समर्थन दे रहे हैं, स्थानीय निवासी, सिविल सोसाइटी से जुड़े लोग, हर होटल और गेस्ट हाउस के कर्मचारियों से लेकर मालिक तक, सोनम की मांगों के समर्थन में उतर गये हैं, वहां के लागों का कहना है कि लद्दाख में जब तक छठी अनुसूची को लागू नहीं किया जाता, तब तक यहां की 95 फ़ीसदी से ज्यादा आबादी को न्याय नहीं मिलेगा, यही वजह है कि लेह-लद्दाख के अलग-अलग हिस्सों के रहने वाले लोग प्रदर्शन भी कर रहे हैं।

चलते-चलते भाईसाब, आपको बता दें कि इस अनशन में लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के अलावा लद्दाख में लद्दाख पब्लिक सर्विस कमीशन के गठन और पूरे क्षेत्र में 2 लोकसभा सीट देने की भी मांग की गई है, उधर, उत्तराखंड के रुद्रपुर में वांगचुक के समर्थन में BA का छात्र चंदन सिंह नेगी भी उतर गया और उसने 24 घंटे तक धरना देकर अपना समर्थन दिया, छात्र का कहना था कि पर्यावरण संरक्षण की ओर किसी भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया है, ग्लोबल वार्मिंग की वजह से हिमालय पिघल रहा है, जो कि आने वाले समय के लिए खतरनाक संकेत है, समय रहते पर्यावरण को दूषित होने से बचाना जरूरी हो गया.

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