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आखिरकार 41 जिंदगियाँ जीत गयी जंग! | Silkyara Tunnel Rescue Operation |

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भाईसाब, देश में इन दिनों हैरान कर देने वाली घटना घटी है, हम बात कर रहे हैं उत्तरकाशी सुरंग हादसे में फंसे 41 मजदूरों कि जो पिछले कई दिनों से जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। पर सलाम उन फंसे श्रमिकों के हौसले की जिन्होंने हिम्मत नहीं हारी और डटे हुए हैं। आपको बता दें कि उत्तरकाशी सुरंग हादसे में मज़दूरों को बचाने के अभियान को नौ दिन से ज्यादा हो गया है। लेकिन सुकून भरी खबर आई है कि टनल के भीतर फंसे मज़दूरों की हालत अभी ठीक है और वे आपस में एक-दूसरे को हिम्मत दे रहे हैं। और इसी के साथ पर्यावरण बनाम विकास को लेकर देशभर में एक बहस भी छिड़ गई है।
भाईसाब, आज के इस लेख में हम उत्तरकाशी सुरंग हादसे में फंसे 41 श्रमिकों को लेकर पर्यावरण बनाम विकास पर बातें करेंगे।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक एजेंसी ने सुंरग के भीतर का एक वीडियो क्लिप जारी किया है। इस वीडियो क्लिप में दिख रहा है कि टनल के भीतर मज़दूर खड़े होकर आपस में बातचीत कर रहे हैं। इस वीडियो के आने के बाद उम्मीद बढ़ी है कि लोगों हालत अभी ठीक है। यह विजुअल इंडोस्कोपिक कैमरा के ज़रिए क़ैद किया गया है। इस कैमरे को 6 इंच की फूड पाइपलाइन से भेजा गया था। वीडियो में दिख रहा है कि मजदूर पीले और सफेद हेलमेट पहने हुए हैं। इसमें ये भी दिख रहा है कि वे पाइपलाइन के ज़रिए खाना ले रहे हैं और एक-दूसरे से बात कर रहे हैं। यह वीडियो फुटेज मज़दूरों के परिजनों को आश्वस्त करने में मददगार साबित हो सकता है।
भाईसाब, अब उत्तराखंड में सिल्कयारा टनल के एक हिस्से के ढह जाने के बाद निर्माण कार्य को लेकर एक बार फिर पर्यावरण बनाम विकास की बहस तेज हो गई है। पर्यावरणविदों का कहना है कि राज्य के आधे से अधिक क्षेत्र में भू-स्खलन का खतरा हमेशा बना रहता है, इसलिए अत्यधिक निर्माण कार्य के चिंताजनक परिणाम निकलेंगे ही। दूसरी ओर राज्य सरकार व विकास समर्थकों ने ताजा हादसे के लिए निर्माण कंपनी पर ‘लापरवाही’ का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर विकास नहीं किया जायेगा तो राज्य की आर्थिक स्थिति कैसे बेहतर होगी? टनल के ढह जाने के कारणों को जानने के लिए राज्य सरकार ने डिजास्टर मिटीगेशन एंड मैनेजमेंट सेंटर (डीएमएमसी) के निदेशक पीयूष रौतेला के नेतृत्व में सात सदस्यों की विशेषज्ञ टीम का गठन किया है। इस निर्माणाधीन टनल का एक हिस्सा 2019 में भी गिरा था। उस समय कोई मजदूर भी उसमें नहीं फंसा था। भाईसाब, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केंद्र के महत्वाकांक्षी चारधाम हर मौसम हाईवे प्रोजेक्ट के तहत जिला उत्तरकाशी में सिल्कयारा से पोलगांव तक एक टनल बनायी जा रही है, जिसकी लम्बाई 4.5 किमी है। यह डबल-लेन टनल इस प्रोजेक्ट के तहत सबसे लम्बी टनल है और निर्माण पूरा होने के बाद यह उत्तरकाशी से यमुनोत्री धाम के यात्रा समय को 26 किमी कम कर देगी। सिल्कयारा की तरफ से टनल का 2.3 किमी। काम पूरा हो गया है जबकि पोलगांव की तरफ से 1.5 किमी। का काम पूरा हो गया है। टनल में लगभग 400 मी का काम होना शेष रह गया है। 12 नवम्बर को सिल्कयारा प्रवेश से लगभग 270 मी. के फासले पर टनल का एक हिस्सा ढह गया, जिसमें 40 मजदूर फंस गए, जिनमें से अधिकांश झारखंड के मूल निवासी हैं। फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए NDRF, SDRF, ITBP व BRO के 150 से अधिक कर्मी दिन रात लगे हुए हैं। यहाँ नई ड्रिल मशीनें व अन्य आधुनिक उपकरण भी राहत कार्य के लिए मंगवाये गए हैं। पाइप के जरिये फंसे मजदूरों तक ऑक्सीजन व फूड पहुंचाया जा रहा है।
भाईसाब, ये भी आप जान लें कि फरवरी 2021 में उत्तराखंड के इतिहास का सबसे भयानक हादसा हुआ था। तपोवन-विष्णुगढ़ हाइडल प्रोजेक्ट के टनल में फ्लैश फ्लड के आने से 100 से अधिक मजदूर फंसकर मर गए थे। राहत कार्य महीनों तक चलता रहा और पिछले साल तक टनल के अंदर से शव बरामद होते रहे। पिछले महीने लगभग 40 मजदूर बाल-बाल बचे जब रुद्रप्रयाग जिले में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे प्रोजेक्ट की निर्माणाधीन टनल के अंदर आग लग गई थी। भाईसाब, वहीं हिमालय बचाओ अभियान, उत्तरकाशी के सुरेश भाई का कहना है, “हिमालय क्षेत्र में टनल प्रोजेक्ट्स पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। इनसे पहाड़ अधिक कमजोर हो जाते हैं। सड़क को चौड़ा करने के लिए भगीरथी इको-सेंस्टिव जोन उत्तरकाशी में देवदार के 6,000 पेड़ों को गिराया गया। गौमुख से उत्तरकाशी तक 4,179 वर्ग किमी। का नाजुक गंगा-हिमालय बेसिन में विशेष महत्व है। इसमें हजारों पेड़ों को गिराने से पर्यावरण पर कुप्रभाव पड़ना लाजमी है। इसलिए हिमालय क्षेत्र में कोई भी निर्माण प्रोजेक्ट बहुत सोच समझ व सावधानी चाहता है।
भाईसाब, अब सबसे राहत की बात यह है कि टनल के भीतर से लोगों का हालचाल जाना जा चुका है जिसे सबसे बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। टनल के भीतर मज़दूरों को 53 मीटर लंबी और छह इंच मोटी इस पाइप के ज़रिए गर्म खिचड़ी भेजी गई है। सुरंग के एक हिस्से में बिजली और पानी उपलब्ध है और चार इंच की एक कंप्रेसर पाइप के ज़रिये मज़दूरों को ऑक्सिजन, खाने-पीने की चीजें और दवाएं भेजी जा रही थीं। अब मज़दूरों की हालत को देखते हुए डॉक्टरों की मदद से एक लिस्ट बनाई गई है। अब उनके लिए खुले मुंह वाली प्लास्टिक की गोल बोतलें ला रही हैं ताकि उनके ज़रिये केले, सेब, खिचड़ी और दलिया अंदर भेजा जा सके। भाईसाब, आपको बता दें कि खिचड़ी भी गोल बोतलों में भरकर अंदर भेजी गई थी। पहली बार मज़दूरों के लिए गर्म खाना भेजा गया है।
भाईसाब, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि DRDO के ड्रोन और रोबॉट भी यहां लाए गए हैं, ताकि फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए रास्ते तलाशे जा सकें। रेस्क्यू कार्यों में जुटी एजेंसियों ने बीते नौ दिनों से एक के बाद एक योजना पर काम करने की कोशिश की है। लेकिन, अब तक कोई भी योजना सफल नहीं हो पाई है। अधिकारी और मंत्रियों का आने-जाने का भी सिलसिला बना हुआ है। आदेश और निर्देश देने के दौर के बीच यह ऑपरेशन कब पूरा होगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। सुरंग में फंसी जिंदगियों को कब बचाया जाएगा? ये सवाल सुरंग के बाहर मातमी सन्नाटे के बीच मज़दूरों के परिजनों के चेहरों पर तैर रहा है। सबके चेहरे पर आशंका यही है कि कहीं कुछ अनहोनी ना जाए। तो भाईसाब, ये थी जानकारी उत्तरकाशी सुरंग हादसे में फंसे 41 मजदूरों की, आशा करते हैं कि रेस्क्यू एजेंसियों जल्द ही इन श्रमिकों को सुरंग से बाहर निकालने में कामयाबी मिलेगी। भाईसाब, की सारी टीम उनके लिए दुआएं कर रही है।
उम्मीद है यह जानकारी आपको जरूर पसंद आई होगी, धन्यवाद!

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