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इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग बड़ी चुनौती | Seat sharing : A big challenge

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Seat sharing : A big challenge

भाईसाब, क्या आपको पता है, करीब 6 महीने पहले देश के कुछ प्रमुख विपक्षी दलों ने इंडिया गठबंधन की स्थापना की थी, इसका सबसे बड़ा उद्देश्य आगामी लोकसभा में भाजपा के नेतृत्व वाले NDA के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना था, हालांकि, यह गठबंधन चुनाव की तारीखों के एलान से पहले बिखरता हुआ नजर आ रहा है। इस गुट को तब बड़ा झटका लगा, जब ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में TMC अकेले लड़ेगी, कुछ ही घंटे बाद आम आदमी पार्टी का बयान आया कि वह पंजाब में सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी, भले ही दो दलों ने चुनाव से पहले अपने पत्ते खोल दिए हैं, लेकिन इंडिया गठबंधन में मतभेद और भी दलों के बीच है, तमाम दल राष्ट्रीय स्तर पर एक होने की बातें कर रहे हैं, लेकिन उनकी प्रदेश इकाइयों के सुर अलग रहे हैं।

लोकसभा में सबसे ज्यादा सांसद भेजने वाले राज्यों में पश्चिम बंगाल तीसरे स्थान पर है, यूपी में 80 और महाराष्ट्र में 48 के बाद बंगाल में 42 सीटें हैं, सियासी रूप से काफी अहम माने जाने वाले राज्य में इंडिया गठबंधन को झटका लगा है, भाईसाब, दरअसल, बीते दिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि आम चुनाव में सीट साझा करने पर उनका किसी से संपर्क नहीं हुआ है, इसलिए लोकसभा चुनाव के लिए उनकी पार्टी अकेले चुनावी मैदान में उतरेगी, TMC नेताओं की मानें तो कांग्रेस बंगाल में 12 सीटें मांग रही है, बता दें कि पिछले लोकसभा चुनाव में 42 सीटों वाले बंगाल में टीएमसी ने सबसे ज्यादा 22 सीटें, भाजपा ने 18 और कांग्रेस ने दो सीटें जीती थीं। भाईसाब, पंजाब लोकसभा की 13 सीटें हैं, यहां भी मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट कर दिया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) सभी 13 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी, मान ने कहा कि आप लोकसभा चुनाव के लिए पंजाब में कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करेगी, AAP ने सभी 13 सीटों के लिए करीब 40 संभावित उम्मीदवारों की एक सूची तैयार कर ली है। इसके साथ ही भाईसाह, AAP और कांग्रेस के बीच लंबे समय से गठबंधन को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया। भाईसाब, कांग्रेस हाईकमान पंजाब में दिल्ली जैसा कोई फॉर्मूला अपनाने को तैयार नहीं है, जिसका मुख्य कारण यह है कि आप मालवा बेल्ट की अधिकांश सीटें चाहती है, जबकि कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं है, ऐसा करने से कांग्रेस की जीती हुई अनेक सीटों पर भी आप के प्रत्याशी उतारने पड़ेंगे, जो कांग्रेस के पंजाब में भविष्य के लिए भी लाभ का सौदा नहीं है, दूसरी तरफ विधानसभा चुनाव में भी मुख्य मुकाबला आप और कांग्रेस के बीच ही था, ऐसे में कांग्रेस को अपना बड़ा वोट शेयर हाथ से निकलने की आशंका है। भाईसाब, हैरानी की बात ये है कि इंडिया गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं है, अब बिहार को ही ले लीजिये, नीतीश कुमार NDA में चले गये, वहीं सीटों पर बंटवारे को लेकर भी इंडिया गठबंधन में रार छिड़ी हुई है, 40 लोकसभा सीटों वाले बिहार में इंडिया से नीतीश के हटने के बाद राजद 17 सीटों पर दावा ठोक रही है, इस तरह से इंडिया गुट के अन्य दलों के लिए महज 23 सीटों ही बचती हैं, बिहार में गठबंधन के बाकी सहयोगी दल कांग्रेस, सीपीआई सीपीआई भी है जो 10 से 12 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। पिछले चुनाव की बात करें तो गठबंधन के तहत जदयू ने 16 सीटें, भाजपा ने 16 और लोजपा ने चार सीटें जीती थीं। इसके अलावा एक सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी। भाईसाब, उत्तर भारत की तरह दक्षिण के राज्यों में भी इंडिया समूह अलग-थलग दिखाई देने लगा है, 20 लोकसभा सीटों वाले केरल में राज्य की सत्ताधारी CPI-M और विपक्षी कांग्रेस लोकसभा के लिए सीट-बंटवारे पर सहमत नहीं नजर आ रहे, पिछली बार 20 में से 19 सीटें यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट गठबंधन ने जीती थीं, जिसका नेतृत्व कांग्रेस कर रही थी, वहीं CPI-M के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक को एक सीट ही मिल सकी थी, ऐसे में कांग्रेस को CPI-M को इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनाने के लिए अपनी आधी लोकसभा सीटें छोड़नी होंगी, ऐसे में यहां सीटों का बंटवारा लगभग असंभव हो गया है। भाईसाब, अब बात तमिलनाडु की, यहां की राजनीति में DMK, AIDMK और कांग्रेस के बाद भाजपा का स्थान आता है, यहां भी भाजपा के साथ कांग्रेस की सीधी लड़ाई नहीं है. यहां कांग्रेस हो या भाजपा गठबंधन में ही चुनाव लड़ती रही है।

चलते-चलते, बता दें कि सियासी जानकार पश्चिम बंगाल और पंजाब को लेकर हुए फैसले को अप्रत्याशित नहीं मानते हैं, गठबंधन में शुरुआत से ही यह चर्चा हो रही थी कि गठबंधन में कुछ ऐसे दल और राज्य हैं, जहां पर फ्रेंडली फाइट की संभावनाएं बन रही है, पश्चिम बंगाल समेत पंजाब और दक्षिण में केरल माना जा रहा था, यह बात पहले से तय थी कि गठबंधन में शामिल कुछ सियासी दलों की आपस में फ्रेंडली फाइट होगी, इसमें आम आदमी पार्टी समेत तृणमूल कांग्रेस और लेफ्ट के बीच फ्रेंडली फाइट की बात कही जा रही थी।

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