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देश में बढ़ती रोजगारी – बेराजगारी ! | Reasons & Solutions |

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भाईसाब…क्या आपको पता है हमारे देश में माना जाता है कि जिन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिलती वो धोबी के कुत्ते की तरह न घर के न घाट के होते हैं। भाईसाब…कुत्ते का बच्चा एक महीने बाद से अपना भोजन तलाशने लगता है और स्वावलम्बी हो जाता है, वहीं इन्सान का बच्चा 30 साल की उम्र तक बेरोजगारी का रोना रोता है। कमी रोजगार की नहीं है, कमी इच्छाशक्ति की है। अपनी योग्यता और अपने हुनर को पहचानने की कमी है। भाईसाब…सरकारी नौकरी को ही देश में रोजगार माना जाता है, सबसे बड़ा कारण यही है। निजी क्षेत्र की नौकरी में कड़ी मेहनत और योग्यता की जरूरत होती है। उत्तर भारत में नकल जुगाड़ से सर्टिफिकेट, डिग्री मिल जाती है। इसके आगे जिनके पास बड़ा जुगाड उसे सरकारी नौकरी भी मिल जाती है…तो आज के इस लेख में हम देश में बढ़ती रोजगारी , बेराजगारी के आंकड़े और इस समस्या के कारण व निवारणपर प्रकाश डालेंगे…।
भाईसाब…सबसे पहले आपको एक कहानी सुनाते हैं..और…बेरोजगारी के मूल कारण को समझने की कोशिश करते हैं…। एक बड़े सन्त के एक मंत्रीजी शिष्य थे, उन्हीं सन्त का शिष्य गांव का एक आदमी भी था। जब उसने मंत्रीजी को संतजी से यह कहते सुना कि कोई सेवा चाहिए तो बताएं। तो उसने सोचा क्यों न संतजी से कहकर बेरोजगार बेटे के लिए सरकारी नौकरी मांग ली जाय। उसने संतजी से अपनी इच्छा बताई, तो संतजी ने कहा, ठीक है कल अपने लड़के को साथ लेकर आना। दूसरे दिन जब वह लड़के को लेकर संतजी के पास पहुंचा, तो संतजी ने पूछा कि क्या कर सकते हो, लड़का बोला बीए पास हूं। संतजी ने यही सवाल उससे 5 बार पूछा और पांचों बार उसका उत्तर वही था।।बीए पास हूं। इसके बाद संतजी उससे बोले कि मैं यह तो जान गया कि तुम बीए पास हो,‌‌‌‌‌ मैं तो यह जानना चाहता हूं कि इस बीए पास होने से तुम्हारे अन्दर वह कौनसी योग्यता,गुण और हुनर आया है जिससे तुम कोई काम कर सकते हो। लड़का निरुत्तर हो गया, उसे खुद नहीं पता कि उसके अन्दर कौन सा काम करने की योग्यता है ? यही बेरोजगारी का मूल कारण है। तो भाईसाब…उसी स्नातक उपाधि से एक आईएएस बनता है, दूसरा चपरासी तक नहीं बन पाता है। उपाधि में योग्यता नहीं होती है। योग्यता व्यक्ति में होती है। हर युवा अपनी योग्यता और क्षमता के अनुरूप कोई भी काम कुशलता से करना शुरू कर दे तो बेरोजगारी अपने आप दूर हो जायेगी, लेकिन यह सोच कि बीए पास कर लिया तो आईएस या बाबू, या चपरासी ही बनना है, यह जिद ही बेरोजगारी है।
भाईसाब….आपको यह भी बता दें कि युवाओं के लिए बेरोजगारी से बड़ा अभिशाप कोई नहीं है। सरकारी नौकरियों की संख्या अत्यंत सीमित है और कितनी ही राज्य सरकारें रिक्त पदों पर भर्ती के मामले में जानबूझकर सुस्त रवैया अपनाती हैं। निजी क्षेत्र के तमाम उद्योग अपने यहां केवल कुशल व अनुभवी युवाओं को नौकरी देना पसंद करते हैं। ऐसी हालत में स्वयं रोजगार को बढ़ावा देने से ही समस्या कुछ हद तक हल की जा सकती है। आबादी बढ़ने के साथ ही सुशिक्षित बेरोजगारों की तादाद भी बढ़ती चली जा रही है। यह चिंताजनक है कि अक्टूबर 2023 में भारत में बेरोजगारी 2 वर्ष के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। सेंटर फॉर मानिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईआई) के अनुसार यह बेरोजगारी दर 10।05 प्रतिशत तक जा पहुंची। ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी बढ़कर 10।82 फीसदी हो गई।
भाईसाब…ये साबित हो गया कि बेरोजगारी भारत की बड़ी समस्याओं में से एक है। बड़ी विडंबना की बात है कि जिस देश में शिक्षा उद्योग 117 अरब डॉलर का है। जहां इंजीनियरिंग-मेडिकल से लेकर स्क‍िल कोर्सेज के संस्थानों का जमघट है। विशालकाय कैंपस वाले संस्थानों की मोटी फीस देकर हर साल लाखों छात्र डिग्र‍ियां ले रहे हैं। लेकिन वो सारी डिग्र‍ियां उनके किसी काम नहीं आती हैं। इंडिया स्क‍िल्स रिपोर्ट 2023 में खुलासा हुआ है कि भारत में डिग्री लेने वाले 50 पर्सेंट युवा ऐसे हैं जिनके पास नौकरी के लिए पर्याप्त स्क‍िल नहीं है। कंपनी ने ये रिपोर्ट तैयार करने के लिए 3 लाख 75 हजार छात्रों का टेस्ट लिया था। इसके बाद टेस्ट के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई। रिपोर्ट में आए आंकड़े बताते हैं कि भारत में करीब 50 पर्सेंट युवा ऐसे हें जो रोजगार के योग्य नहीं है, इनमें से ऐसे युवा ज्यादा हैं जिनके पास स्नातक और परास्नातक की डिग्री है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आने वाले अगले कुछ सालों में ऐसे 50 पर्सेंट युवा अयोग्य हो जाएंगे जिनके पास ग्रेजु‍एट डिग्री है। वहीं वर्तमान की बात करें तो आज एमबीए की डिग्री वाले 40 पर्सेंट युवा नौकरी के योग्य नहीं हैं। इनके पास हुनर नहीं है। वहीं इंजीनियरिंग के 43%, बीकॉम के 40%, बैचलर ऑफ साइंस यानी बीएससी के 63%, आईटीआई से डिप्लोमा या अन्य कोर्सेज करने वाले 66%, पॉलीटेक्निक 72 और बैचलर इन फार्मेसी यानी बीफार्म 43 के पर्सेंट छात्र ऐसे निकले जो नौकरी के योग्य नहीं है। इसका सीधा अर्थ है कि इन युवाओं के पास डिग्री तो हैं पर योग्यता नहीं है। भाईसाब…आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देश के लेबर मार्केट में वर्तमान में साढ़े पांच करोड ग्रेजुएट हैं। भविष्य की बात करें तो अनुमान लगाया गया है कि साल 2030 में इस मार्केट में दसवीं पास युवाओं की संख्या 30 करोड़ हो जाएगी। इसे विरोधाभास ही तो कहा जाएगा कि टेक्नोलॉजी और मैनेजमेंट के टॉप इंस्टीट्यूट जैसे अल्फाबेट इंक को सुंदर पिचाई और माइक्रोसॉफ्ट को सत्या नडेला जैसे भारतीय हेड कर रहे हैं। उसी देश में युवाओं के पास दो से तीन डिग्री होते हुए भी बेरोजगारी तेजी से बढ़ी है। नौकरी दिलाने का वादा करने वाले बड़े बड़े संस्थानों जिनके राजमार्गों पर होर्डिंग लगे हुए हैं। वो युवाओं को किसके लिए तैयार कर रहे हैं। वहीं दुनियाभर में, आज छात्र तेजी से डिग्री बनाम लागत पर रिटर्न पर विचार कर रहे हैं। उच्च शिक्षा ने अक्सर विश्व स्तर पर विवादों को जन्म दिया है, जिसमें अमेरिका भी शामिल है, जहां लाभकारी संस्थानों को सरकारी जांच का सामना करना पड़ा है। फिर भी भारत में शिक्षा की जटिलताएं स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं। अब सरकार को इससे निपटना होगा।
भाईसाब…मौसम की मार से खेती-किसानी प्रभावित होती है इसलिए ग्रामीण युवा शहर की ओर पलायन करते हैं। संतानों में खेती विभाजित हो जाने से भी उसके भरोसे गुजारा नहीं हो पाता। लोकसभा चुनाव के ठीक पहले बेरोजगारी में वृद्धि के आंकड़े केंद्र सरकार की चिंता बढ़ा रहे हैं। यह चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाए जाने की आवश्यकता है ताकि उद्योगों को ‘रेडी हैंड्स’ मिल सके। इसके लिए पाठ्यक्रम तैयार करने में उद्योगपतियों की राय ली जानी चाहिए। फिलहाल दिक्कत यह भी है कि रोजगार देनेवाली आईटी कंपनियों इंफोसिस और विप्रो ने इस वर्ष नई भर्ती रोकने का एलान किया है। ऐसे में युवा और हताश हो गए हैं। भाईसाब…यह दे‍श की विडंबना ही है कि देश में हर साल जितने युवा ग्रेजुएट हो रहे हैं, उनमें से करीब आधे लोगों के पास ऐसी डिग्री होगी जो नौकरी पाने लायक नहीं होंगे। बड़ी कंपनियों के मालिक अलग-अलग मौकों पर कह चुके हैं कि देश में एजुकेशन की क्वालिटी मिली-जुली होने की वजह से उन्हें लोगों को हायरिंग करने में दिक्कत होती है। बड़ी कंपनियों भी इंडस्ट्री के लिए खास स्किल वाले रखने वाले लोगों को ढूंढने में मुश्किल का सामना करना पड़ता है। मार्केट में ये आसानी से उपलब्ध नहीं है…।
आपके लिए एक सवाल छोड़े जाते हैं…कि क्या इस देश में टैलेंट की कमी है…? स्किल रखने वाले लोगों की क्या वाकई..कमी हो गई है…? हमें आपके कमेंट का बेसब्री से इंतजार रहेगा…| आशा करते हैं आपको ये जानकारी जरूर पसंद आई होगी… ऐसी ही अन्य खास विषय की जानकारी के लिए जुड़े रहें भाईसाब के साथ, धन्यवाद!

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