Home Mahanubhav कंप्यूटर क्रांति के जनक और डिजिटल इंडिया के वास्तुकार | Rajiv Gandhi |

कंप्यूटर क्रांति के जनक और डिजिटल इंडिया के वास्तुकार | Rajiv Gandhi |

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भाईसाब..आपको पता है..एक समय विरोधी दल के नेता देश पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को ‘आसमान से टपकाया गया प्रधानमंत्री’ कहा करते थे। लेकिन, उन्होंने अपने आलोचकों को नजरअंदाज करते हुए भारत के विकास के कई दूरदर्शी कदम उठाए। दूरदृष्टि का परिचय देते हुए उन्होंने भारत में न केवल कंप्यूटर क्रांति की शुरुआत की, बल्कि आज के इंडिया को डिजिटल बनाने के लिए दूरसंचार क्रांति लाने में भी अहम भूमिका निभाई।
आज हम अपने इस लेख के जरिये भारत के विकास के उन महत्वपूर्ण कार्यों के बारे में जानेंगे जिसकी शुरुआत राजीव गांधी ने की थी।

राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को बंबई (अब मुंबई) में हुआ था। जब देश को आजादी मिली, उस समय वे महज तीन साल के थे। हर साल 20 अगस्त को राजीव गांधी के जन्मदिन को सद्भावना दिवस के रूप में मनाया जाता है। राजीव गांधी का बचपन अपने दादा के साथ नई दिल्ली के तीन मूर्ति हाउस मे बीता। शुरुआत में उन्हें पढ़ने के लिए देहरादून के वेल्हम स्कूल भेजा गया, लेकिन जल्द ही यहां से उन्हें आवासीय दून स्कूल में भेज दिया गया। उनके छोटे भाई संजय गांधी को भी इसी स्कूल में पढ़ने के लिए भेजा गया। स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद राजीव गांधी लंदन के कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज गए, लेकिन यहां उनका मन नहीं लगा। इसके बाद वे इंपीरियल कालेज गए, जहां से उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
भाईसाब..राजीव गांधी की लव स्टोरी बहुत ही दिलचस्प रही है। लंदन में पढ़ाई के दौरान राजीव गांधी अक्सर अपने दोस्तों के साथ बाहर जाया करते थे। राजीव गांधी 1956 की ऐसी ही एक शाम को दोस्तों के साथ लंदन के वरसिटी रेस्त्रां में बैठे थे और वहीं उनके सामने आईं खूबसूरत एन्टोनिया माईनो, राजीव गांधी को एन्टोनिया से उसी वक्त प्यार हो गया। उस समय एन्टोनिया कैम्ब्रिज में पढ़ रही थीं और साथ ही साथ पार्ट-टाइम वेट्रेस की तरह उसी होटल में काम कर रही थीं। राजीव गांधी ने अपने दोस्त और रेस्त्रां के मालिक चार्ल्स एंटोनी से कहा की कुछ ऐसा इंतज़ाम किया जाए कि एन्टोनिया राजीव के थोड़ा करीब रह सकें। इसके लिए राजीव ने उन्हें रिश्वत भी दी। इसके बाद एन्टोनिया के लिए राजीव ने पेपर नैपकिन में एक कविता लिखी और बेस्ट वाइन भेजी जो चार्ल्स के जरिए एन्टोनिया तक पहुंची। इसके बाद शुरू हुआ दोनों की मुलाकातों का दौर। दोनों की शादी 25 फरवरी 1968 को हो गई। विवाह के बाद एन्टोनिया ने अपना नाम बदलकर सोनिया गांधी कर लिया। 1970 जून में राहुल गांधी का जन्म हुआ और 1972 जनवरी में प्रियंका गांधी का।
भाईसाब..आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राजीव गांधी की राजनीति में कोई रुचि नहीं थी। उनकी रुचि संगीत में थी। उन्हें शास्त्रीय संगीत और आधुनिक संगीत दोनों पसंद था। इसके अलावा, फोटोग्राफी, रेडियो सुनने और विमान उड़ाने का भी उन्हें शौक था। उन्होंने दिल्ली फ्लाइंग क्लब की प्रवेश परीक्षा पास कर वाणिज्यिक पायलट का लाइसेंस प्राप्त किया, जिसके बाद वे जल्द ही इंडियन एयरलाइंस के पायलट बन गए। लेकिन 1980 में एक विमान दुर्घटना में अपने भाई संजय गांधी की मौत के बाद राजीव गांधी ने न चाहते हुए भी राजनीति में प्रवेश किया। उन्होंने भाई की सीट अमेठी पर हुए संसदीय उपचुनाव में जीत हासिल की और सांसद बने। 31 अक्टूबर 1984 को अपनी मां इंदिरा गांधी की हत्या के बाद वे कांग्रेस अध्यक्ष और फिर देश के प्रधानमंत्री बने। महज 40 साल की उम्र में राजीव गांधी भारत के प्रधानमंत्री बने।
भाईसाब..वर्ष 1984 में राजीव गांधी ने जब भारत के प्रधानमंत्री के तौर कार्यभार संभाला, तो उन्होंने देश को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए कंप्यूटर क्रांति की शुरुआत की। उनकी इस क्रांति का सुपरिणाम यह निकला कि भारत के लोग न केवल इस नई तकनीक से परिचत हुए, बल्कि कंप्यूटर लोगों के घरों और दफ्तरों तक पहुंच गया। राजीव गांधी की ओर कंप्यूटर क्रांति की शुरुआत करने के बाद वर्ष 1991 में भूमंडलीकरण के दौर में सरकार की मदद से निजी क्षेत्र की कंपनियों ने सॉफ्टवेयर बनाना शुरू किया और इसमें काफी प्रगति हुई। 1998 में भारत सरकार ने सूचना तकनीक को ‘भारत का भविष्य’ घोषित कर दिया। साल 1991 में दूसरे देशों में कंप्यूटर निर्यात करने पर लगाए जाने वाले शुल्क को हटा दिया गया। सॉफ्टवेयर कंपनियों को निर्यात से हुए फायदे पर 10 साल तक के लिए टैक्स से राहत दी गई। अब देश में सौ फीसदी इक्विटी के साथ बहुराष्ट्रीय कंपनियों को आने की इजाजत मिल गई। राजीव गांधी को न केवल ‘भारत की सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार क्रांति का जनक’ कहा जाता है, बल्कि उन्हें डिजिटल इंडिया के वास्तुकार के रूप में जाना जाता है। यह उनके शासन के तहत था कि अत्याधुनिक दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकसित करने और भारतीय दूरसंचार नेटवर्क की जरूरतों को पूरा करने के लिए अगस्त 1984 में सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) की स्थापना की गई। सी-डॉट ने भारत के कस्बों और यहां तक कि गांवों में संचार नेटवर्क में क्रांति ला दी। राजीव गांधी के प्रयासों के कारण पीसीओ (पब्लिक कॉल ऑफिस) क्रांति हुई। पीसीओ बूथ ने ग्रामीण क्षेत्रों को भी बाहर की दुनिया से जोड़ा। राजीव गांधी ने ना सिर्फ कंप्यूटर को भारतीय घर तक लाने का काम किया बल्कि भारत में इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी को आगे ले जाने में अहम रोल निभाया। उनके वक्त ही नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर की स्थापना भी हुई थी।
भाईसाब..ये भी जान लें कि राजीव गांधी स्वयं एक युवा थे, इसलिए उन्होंने युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में कई अहम कदम उठाए गए। राजीव गांधी के कार्यकाल संविधान का 61वां संशोधन अधिनियम 1989 में पारित किया गया था, जिसमें मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई थी। इस कदम ने युवाओं को राज्यों में लोकसभा सांसदों और विधायकों को चुनने की अनुमति दी। इतना ही नहीं, लोकतंत्र को जमीनी स्तर पर ले जाने के लिए पंचायती राज संस्थाओं की नींव रखने का श्रेय भी राजीव गांधी को ही जाता है। हालांकि, पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत राजीव गांधी की हत्या के एक साल बाद वर्ष 1992 में संविधान के 73वें और 74वें संशोधन द्वारा किया गया था। इसकी रूपरेखा उनके नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तैयार की गई थी। प्रधानमंत्री के तौर पर राजीव गांधी ने देश भर में उच्च शिक्षा कार्यक्रमों के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए 1986 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनपीई) की घोषणा की। एनपीई के स्थान पर केंद्र सरकार के तहत जवाहर नवोदय विद्यालय नामक आवासीय विद्यालय ग्रामीण प्रतिभाओं को निखारने के लिए स्थापित किए गए। ये स्कूल ग्रामीण आबादी को कक्षा छह से 12 तक मुफ्त आवासीय शिक्षा प्रदान करते हैं।
– भाईसाब…यह कहना गलत नहीं होगा कि आज जिस भारत में हम सांस ले रहे हैं। जिस आधुनिक भारत का लोहा आज पूरी दुनिया मान रही है। जिस भारत पर आज पूरी दुनिया की नजरें इनायत हैं। जिसे कल का विश्वशक्ति माना जा रहा है और कहा जा रहा है कि एक बार फिर भारत पूरे विश्व को एक नई राह दिखाएगा, यह राजीव गांधी की ही देन है। इन्हें आधुनिक भारत का शिल्पकार भी कहा जाता है। 21 मई, 1991 को राजीव गांधी की तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी रैली के दौरान धनु नाम की लिट्टे की एक आत्मघाती हमलावर ने हत्या कर दी थी. एलटीटीई की महिला चरमपंथी धनु ने राजीव को फूलों का हार पहनाने के बाद उनके पैर छूए और झुकते हुए कमर पर बंधे विस्फोटकों में ब्लास्ट कर दिया। उनकी हत्या का देश के राजनैतिक परिदृश्य पर गहरा असर हुआ। बचे हुए लगभग आधे चुनाव में कांग्रेस को सहानुभूति की लहर मिली जिसके बाद 1991 में कांग्रेस किसी तरह से सत्ता वापसी करने में सफल रही।
भाईसाब..ये थी जानकारी हमारे एक महान नेता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बारे में, आशा करते है यह जानकारी आपको जरूर पसंद आई होगी,ऐसी ही महानुभावों की जानकारी के लिए जुड़े रहें भाईसाब के साथ…. धन्यवाद!

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