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देश में हो रही रेल दुर्घटनाएं : जिम्मेदार कौन? | Train Accident |

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देश में हो रही रेल दुर्घटनाएं : जिम्मेदार कौन? | Train Accident |

आज जानेंगे देश में हो रही रेल दुर्घटनाओं के बारे में और इन रेल हादसों के पीछे के सच को जानेंगे :
‘बालासोर रेल हादसे ज्यादा दिन भी नहीं हुए थे के , 29 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में भीषण ट्रेन दुर्घटना हो गई और इस दुर्घटना में कई यात्रियों ने अपनी जान गंवाई। देश में लगातार हो रही रेल दुर्घटनाओं की वजह से रेलवे मंत्रालय पर सवाल उठ रहे है । सवाल उठने लगे हैं कि आम लोग रेल से यात्रा बंद कर दें ? सिस्टम की लापरवाही की वजह से सैकड़ों लोक अपनी जान गवा रहे है । सरकार मुआवजे का ऐलान कर देती है वहीं राजनीतिक पार्टियों के नेता कुछ दिन तक एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाकर मामले को विराम दे देते हैं। आखिर हमारा देश इस AI टेक्नोलॉजी के युग में भी ऐसे हादसों को रोक क्यों नहीं पा रहा है। बड़ी संख्या में भारतीय अपने आवागमन के लिए रेलवे पर निर्भर हैं, ऐसे में तेजी से ऐसी घटनाओं का दिखना चिंताजनक है।

आंध्र प्रदेश में रविवार देर शाम हुए रेल हादसे में 14 लोगों की मौत हो गई और 40 से अधिक लोग घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया। दरअसल, आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले में हावड़ा-चेन्नई लाइन पर एक ट्रेन के सिग्नल पार कर दूसरी ट्रेन से टकरा जाने के बाद कई डिब्बे डीरेल हो गए थे । हादसा शाम करीब 7 बजे हुआ। रेलवे ने हादसे के पीछे का कारण मानवीय भूल होने की संभावना व्यक्त की है। इसकी जांच कराई जा रही है। वहीं प्रधानमंत्री ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। इस बीच प्रधानमंत्री राहत कोष से मृतकों के परिजन को 2-2 लाख और घायलों को 50-50 हजार की रुपये की आर्थिक मदद का एलान किया गया।इस साल 3 बड़े रेल हादसों हो चुके हैं जिसने कई लोगों की जिंदगी छीन ली। ओडिशा में 2 जून को हुए ट्रेन हादसे में 280 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। जिस रूट पर हादसा हुआ, वहां गाड़ियों के बीच टक्कर रोकने वाला एंटी कोलिजन सिस्टम ‘कवच’ मौजूद नहीं था। ऐसे में ये बड़ा रेल हादसा हुआ। वहीं, 10 अक्टूबर को बिहार में दिल्ली से गुवाहाटी जा रही नॉर्थ-ईस्ट एक्सप्रेस हादसे का शिकार हो गई। ट्रेन की सभी 21 बोगियां पटरी से उतर गईं, जिनमें एसी-3 टियर की भी दो बोगियां पलट गईं। इस रेल हादसे में 4 यात्रियों की मौत हुई थी। इसके अलावा हाल ही में 25 अक्टूबर को आगरा में पातालकोट एक्सप्रेस के 3 जनरल कोच पूरी तरह जल गए। जिसके वजह से इसमें कुल 13 लोग घायल हुए हैं। वहीं, आग लगने के बाद कई यात्रियों ने ट्रेन से कूदकर अपनी जान बचाई। भारत में अब तक का सबसे बड़ा रेल हादसा 6 जून, 1981 को हुआ था …जो देश का ही नहीं, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल हादसा था। आज से 42 साल पहले यह ट्रेन दुर्घटना सहरसा-मानसी रेलखंड के धमारा घाट के पुल संख्या 51 पर हुआ था जिसमे 9 में से 7 डिब्बे नदी में गिर गए थे। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, इस हादसे में करीब 300 लोगों की मौत हुई थी, लेकिन स्‍थानीय लोगों की मानें तो 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। कई हफ्तों तक शवों की तलाश चलती रही, जबकि आज भी कुछ लोगों का पता नहीं चल सका। उस घटना को याद करके आज भी बहुत से लोग ट्रेन में सवार होने से डरते हैं।20 अगस्‍त, 1995 को फिरोजाबाद के पास पुरुषोत्तम एक्सप्रेस खड़ी कालिंदी एक्‍सप्रेस से टकरा गई। इस हादसे में 400 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। वहीं 26 नवंबर, 1998 को जम्‍मू तवी सियालदह पंजाब में गोल्डन टेंपल मेल के पटरी से उतरे तीन डिब्बों से टकरा गई थी। इसमें 215 लोगों की जान गई थी। इसके अलावा 2 अगस्त, 1999 को ब्रह्मपुत्र मेल उत्‍तर रेलवे के कटिहार डिवीजन के गैसल स्टेशन पर खड़ी अवध असम एक्सप्रेस टकराई थी। इसमें 285 से ज्यादा लोग मारे गए थे। हाल के दिनों में रेल मंत्रालय ने कामयाबी की ढोल बजाई थी कि उसने उस ‘कवच’ को खोज लिया है, जिससे ट्रेन एक्सीडेंट को रोका जा सकता है। अब सवाल ये है कि देश के सभी रेल रूटों पर ‘कवच टेक्नोलॉजी’ का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है। कवच एक ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जिसे भारतीय रेलवे ने आरडीएसओ के जरिए विकसित किया है। इस सिस्टम पर रेलवे ने साल 2012 में काम करना शुरू किया था। इस तकनीक का सफल प्रयोग पिछले साल ही किया जा चुका है। हालांकि, यह तकनीक देश के सभी रेल रूट पर उपलब्ध नहीं है। इस टेक्नोलॉजी को सभी रेलवे ट्रैक पर लागू करने की दिशा में काम जारी है। कवच टेक्नोलॉजी फिलहाल देश के कुछ रेलवे रूट पर ही उपलब्ध है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 31 दिसंबर 2022 तक, कवच के तहत भारतीय रेलवे नेटवर्क के 1,455 किलोमीटर रूट को कवर किया गया। फिलहाल दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर पर ‘कवच’ को लेकर काम चल रहा है। हर साल 4,000 से 5,000 किलोमीटर में इस तकनीक को लागू किया जाएगा। ऐसे में आने वाले कुछ वर्षों में देशभर के कई बड़े रेलवे रूट के ‘कवच’ सिस्टम से लैस होने की संभावना है।‘कवच’ स्वदेशी रूप से विकसित ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है। रेलवे के अनुसार, कवच टेक्नोलॉजी ट्रेनों की आपस में भिड़ंत को रोकने का काम करती है। इस तकनीक में सिग्‍नल जंप करने पर ट्रेन खुद ही रुक जाती है। ‘कवच’ प्रणाली में हाई फ्रीक्वेंसी के रेडियो कम्युनिकेशन का इस्तेमाल किया जाता है। ये सिस्टम तीन स्थितियों में काम करता है – जैसे कि हेड-ऑन टकराव, रियर-एंड टकराव, और सिग्नल खतरा। ब्रेक विफल होने की स्थिति में ‘कवच’ ब्रेक के स्वचालित अनुप्रयोग द्वारा ट्रेन की गति को नियंत्रित करता है। ‘ऑन बोर्ड डिस्प्ले ऑफ सिग्नल एस्पेक्ट’ लोको पायलटों को कम दिखने पर भी यह संकेत देता है। एक बार सिस्टम सक्रिय हो जाने के बाद, 5 किलोमीटर की सीमा के अंदर ट्रेनें रुक जाती हैं।

ऐसेही महत्वपूर्ण जानकारी के मलिए जुड़े रहिये भाईसाब के साथ।

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