Home Mahanubhav भारतीय आर्थिक सुधारों के जनक: | PV Narasimha Rao |

भारतीय आर्थिक सुधारों के जनक: | PV Narasimha Rao |

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पीवी नरसिम्‍हा राव भारत के पहले दक्षिण भारतीय प्रधानमंत्री बने थे। वे बेहद शांत स्वभाव के थे। बातचीत से ज्यादा काम में विश्वास रखते थे।1962 से 1971 तक वह आंध्र-प्रदेश के एक मजबूत राजनेता रहे। 1971 से 1973 तक इन्होनें आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर प्रदेश की सत्ता संभाली। पीवी नरसिम्‍हा राव पूर्ण रूप से कांग्रेस के लिए समर्पित रहे। उन्‍होंने कांग्रेस का और खासकर इंदिरा गांधी का आपातकाल के दौरान पूर्ण सहयोग दिया। कांग्रेस के विघटन के बाद भी वे इंदिरा गांधी के साथ ही रहे। वह इंदिरा गांधी की राजनीतिक समझ और लोकप्रियता से अच्‍छी तरह वाकिफ थे।
आज अपने इस लेख के जरिये भारत के पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्‍हा राव के जीवन और उनकी राजनितिक यात्रा की जानकारी देंगे।

– पूर्ण रूप से कांग्रेस के लिए समर्पित रहे।
– कला, साहित्‍य, संगीत, आदि विभिन्न क्षेत्र में माहिर थे।
– फ्रांसीसी और स्‍पेनिश भाषाओं का भी काफी शौक रहा।
– राजनीति को ‘दी इनसाइडर नॉवेल’ में कैद किया ।
– नवोदय विद्यालयों के रूप में आवासीय विद्यालयों की स्थापना में उनका महत्वपूर्ण योगदान ।
– उनके कार्यकाल में देश ने ऐतिहासिक बजट पेश किया था।

– स्ववतंत्र भारत के 9वें प्रधानमंत्री रहे पीवी नरसिम्‍हा राव का जन्म 28 जून, 1921 को आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव करीम नगर में हुआ था। उनका पूरा नाम पामुलापार्ती वेंकट नरसिम्‍हा राव था। वह राजनीति के अलावा कला, साहित्‍य, संगीत, आदि विभिन्न क्षेत्र में माहिर थे। उन्हें भाषाओं में अधिक रूचि थी। वे अपनी बोलचाल में विभिन्न भाषाओं का प्रयोग करते थे।
– पूर्व प्रधानमंत्री रहे पीवी नरसिम्‍हा राव को भाषाओं में खासी रुचि थी। उन्हें भारतीय भाषाओं के साथ ही फ्रांसीसी और स्‍पेनिश भाषाओं का भी काफी शौक रहा। वे ये भाषाएं आराम से बोल भी सकते थे और लिख भी सकते थे।
– उनका अचानक से प्रधानमंत्री पद पर बैठना आसान नहीं था। हालांकि राजीव गांधी की हत्या के बाद एक योग्य पीएम की तलाश थी। वे शायद इसके लिए तैयार नहीं थे। लेकिन वरिष्ठ नेताओं के दबाव में इन्होनें पीएम का पद संभाला।
– उनका प्रधानमंत्री बनना आश्‍चर्यजनक रहा। लेकिन उससे भी अधिक था अविश्‍वसनीय था उन पर लगे आरोप। उनको हवाला और भ्रष्‍टाचार का आरोप झेलना पड़ा।
– इंदिरा गांधी की हत्या के पश्चात दिल्ली में दंगे भड़के उसके लिए नरसिम्‍हा राव की चुप्‍पी को दोषी माना गया था। उसकी उदासीनता बड़ी वजह रही। उस वक्त वह देश के गृहमंत्री थे। बाबरी मस्जिद गिराए जाने पर उन पर असफल पीएम के आरोप लगे।
– वह स्वतंत्रता संग्राम में एक कार्यकर्ता के रूप में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए। वह आंध्र प्रदेश राज्य विधान सभा के सदस्य थे और लोकसभा में आंध्र प्रदेश का प्रतिनिधित्व भी करते थे। उन्होंने 1980 से 1984 तक देश विदेश मंत्री के रूप में भी कार्य किया। उनको भारतीय आर्थिक सुधारों का जनक कहा जाता है। भारत के 11वें राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें देशभक्त राजनेता के रूप में वर्णित किया, जो मानते थे कि देश राजनीति से ऊपर है। पीवी नरसिम्हा राव ने महाराष्ट्रा के नन्द्याल से चुनाव लड़ा और उसमें 5 लाख वोट से जीत हासिल की, जिसके लिए इनका नाम गिनीज बुक में शामिल किया गया।
– उनको व्यापक आर्थिक सुधारों की शुरुआत करने के लिए जाना जाता है, जिन्होंने 1991 में भारतीय अर्थव्यवस्था को उदार बनाया और भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से पूर्वी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के साथ फिर से एकीकृत किया। पीवी नरसिम्‍हा राव लाइसेंस राज को खत्म करने और भारतीय उद्योगों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लालफीताशाही को कम करने के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार थे।
– शिक्षा नीति और राष्ट्रीय स्तर पर नवोदय विद्यालयों के रूप में आवासीय विद्यालयों की स्थापना में उनका महत्वपूर्ण योगदान था। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान परमाणु सुरक्षा की मजबूत नींव रखी।
– प्रधानमंत्री के रूप में नरसिम्‍हा राव का शासनकाल के दौरान, लुक ईस्ट नीति का निर्माण और स्थानीय निकायों को सशक्त बनाने वाले 73वें और 74वें संवैधानिक संशोधनों का महत्वपूर्ण योगदान था।
– पीवी नरसिम्‍हा राव ने डॉ. मनमोहन सिंह को देश का वित्त मंत्री बनाया था। उनके आदेश पर डॉ. मनमोहन ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष नीति प्रारंभ की, जिसके कारण बैंक में होने वाले भ्रष्टाचार में काफी कमी आई।
– नरसिम्हा राव के कार्यकाल में देश ने ऐतिहासिक बजट पेश किया था। आर्थिक संकट का सामना कर रही नरसिम्हा राव सरकार में रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डॉ। मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और उन्होंने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया और कोटा राज खत्म किया। बता दें कि कॉमरेड हरकिशन सिंह सुरजीत ने नरसिम्हा राव को मनमोहन सिंह का नाम सुझाया था।
– मनमोहन सिंह ने आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए बजट भाषण की शुरुआत विक्टर ह्यूगो को कोट करते हुए की। उन्होंने कहा था, दुनिया में कोई भी ताकत उस विचार को नहीं रोक सकती जिसका समय आ चुका हो। इन्हीं शब्दों के साथ वित्त मंत्री ने 19,000 शब्दों वाला खाका पेश किया था, जिसने भारत की पूरी तस्वीर और तकदीर दोनों को बदल कर रख दिया था।
– उनके कार्यकाल में ही एपीजे अब्दुल कलाम ने परमाणु के परिक्षण की तरफ जोर दिया, पर 1996 के आम चुनाव के कारण यह उस वक्त सम्भव नहीं हुआ। उनका स्वास्थ्य बहुत खराब रहता था, लेकिन वे अपने दायित्वों का निर्वाह पूरी लगन और निष्ठा से किया करते थे।
– 1996 के चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद नरसिम्हा राव ने राजनीति से सन्यास ले लिया। राजनीति से जाने के बाद उन्होंने साहित्य में अपना योगदान दिया। वह राजनेता होने के साथ-साथ एक साहित्यिक व्यक्ति भी थे। उन्होंनें कई रचनाओं को तेलगु में रूपांतरित किया। पीवी राव ने कई उपन्यास को हिंदी में और हिंदी को अन्य भाषा में रूपांतरित किया। नरसिम्हा राव बाबरी मस्जिद एवं राम मंदिर पर भी लेख एवम किताबे लिखी, जिसमें इन्होनें महत्वपूर्ण बिन्दुओं को रखा।
– राजनीति से संन्यास लेने के बाद वह पूर्ण रूप से साहित्‍य में लिप्त हो गए थे। प्रधानमंत्री का सफर उनका काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा। भाषा पर अच्‍छी पकड़ होने से हिंदी साहित्य का अंग्रेजी और अंग्रेजी साहित्य का हिंदी में अनुवाद किया। उन्होंने राजनीति को ‘दी इनसाइडर नॉवेल’ में कैद किया जो इनके अनुभवों और इनके विचारों को उजागर करता है।
– 23 दिसंबर 2004 में नई दिल्ली में दिल का दौरा पड़ने से पीवी नरसिम्हा राव की मृत्यु हो गई थी। उनका अंतिम संस्कार हैदराबाद में किया गया था।

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