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जाने Preterm Birth के बारे में | Preterm Birth: Risks & Care

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Preterm Birth: Risks & Care

क्या आपको पता है, विश्व में समय पूर्व जन्म लेने वाला हर 5वां बच्चा भारतीय होता है, और समय पूर्व जन्मे बच्चों को कई तरह के रोगों का खतरा भी रहता है। लेकिन चिकित्सकों के मुताबिक समय पूर्व जन्म शिशुओं की अगर स्मार्ट देखभाल की जाए तो उनका जीवन भी बचाया जा सकता है। बता दें जब कोई बच्चा 37 सप्ताह के गर्भ से पहले पैदा होता है, तो उसे समयपूर्व जन्मे शिशु की श्रेणी में रखा जाता है। समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं में गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं, जैसे सेरेब्रल पाल्सी, खराब फेफड़ों की कार्यप्रणाली और उनकी आंतों की दीर्घकालिक समस्याओं का खतरा अधिक होता है। लेकिन, समय से पहले जन्म लेने वाले लगभग 95 प्रतिशत बच्चे 28 सप्ताह के बाद ही पैदा होते हैं। वे अक्सर अपेक्षाकृत कम जटिल चिकित्सा हस्तक्षेप के साथ जीवित रहते हैं। ‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ गायनेकोलॉजी एंड ऑब्स्टेट्रिक्स’ (एफआईजीओ) की एक समिति ने शिशुओं का जीवन बचाने के लिए ज्ञात कुछ प्रमुख उपायों का चयन किया है। ऐसे कई अन्य उपाय हैं जो प्रसव के समय और समय से पहले जन्म के बाद परिणामों में सुधार कर सकते हैं। लेकिन, चुने गए कुछ चिकित्सकीय रूप से प्रभावी और अपेक्षाकृत सस्ते विकल्प हैं, जिन्हें अधिकांश मामलों में अपनाया जा सकता है।

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स्टेरॉयड की खुराकों का एक कोर्स

बच्चे के जन्म से पहले मां को स्टेरॉयड की खुराकों का एक कोर्स देना। इससे गर्भ में बच्चे के फेफड़ों में बदलाव आता है, जिससे उनका विस्तार होता है और इससे उसके लिए सांस लेना आसान हो जाता है। इसके अतिरिक्त, यह मस्तिष्क रक्तस्राव, आंत्र जटिलताओं और मृत्यु के जोखिम को भी कम करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा निम्न और मध्यम आय वाले देशों में किए गए एक अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि अगर मां को स्टेरॉयड दिया जाए तो हर साल 3,70,000 शिशुओं को बचाया जा सकता है। यह दवा डब्ल्यूएचओ की आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल है। इसका इस्तेमाल करना अपेक्षाकृत आसान है और इससे मां को कोई समस्या होने का जोखिम कम होता है। यह ताप स्थिर भी है और इसमें प्रशीतन की आवश्यकता नहीं होती है, जो उन क्षेत्रों के वातावरण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जहां बिजली की आपूर्ति कम है।

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मां को दें मैग्नीशियम सल्फेट

प्रसव से तुरंत पहले मां को मैग्नीशियम सल्फेट भी दिया जा सकता है। यह शिशु में कोशिका झिल्ली को स्थिर करने के लिए जाना जाता है। यह न्यूरॉन्स की रक्षा करता है और मस्तिष्क क्षति को कम करता है। समय से पहले प्रसव के दौरान मां को दिया जाने वाला मैग्नीशियम सल्फेट जीवनरक्षक साबित हो सकता है। यह दवा डब्ल्यूएचओ की आवश्यक दवाओं की सूची में भी शामिल है और निम्न आय वाले देशों के वातावरण के लिए उपयुक्त है।

कॉर्ड क्लैम्पिंग में देरी

प्रसव के बाद कम से कम एक मिनट के लिए कॉर्ड क्लैम्पिंग में देरी। जब कोई बच्चा पैदा होता है तो उसकी गर्भनाल को दबाया जाता है और फिर काट दिया जाता है। हालांकि, क्लैम्पिंग से पहले लगभग एक मिनट की देरी नवजात की मृत्यु में कमी से जुड़ी है। यह नवजात शिशु में रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए दवाओं की आवश्यकता को भी कम कर देता है – ऐसी दवा जो अत्यधिक विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं के बाहर नहीं दी जा सकती है।

स्तनपान कराने के लिए प्रोत्साहित करना

प्रसव के एक घंटे के भीतर मां को स्तनपान कराने के लिए प्रोत्साहित करना। समय से पहले जन्मे बच्चों के लिए स्तनपान विशेष रूप से फायदेमंद होता है, जिससे गंभीर संक्रमण जैसी गंभीर जटिलताओं का खतरा कम हो जाता है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि मां बच्चे को सही से नहीं स्तनपान करा पाती हैं या फिर बच्चा सही तरीके से स्तनों को लैच नहीं कर पाता है। ऐसी परिस्थिति में मां या बच्चे में चिड़चिड़ाहट पैदा होने लगती है। ऐसे में मां को संयम से काम लेते हुए थोड़ा रुकना चाहिए। इसके बाद, बच्चे को हल्की थपकी दें और अपनी उंगली को बच्चे के मुंह में डालें ताकि वह उसे सक (Suck) कर सके। इसके बाद, उसे दोबारा स्तनों से लैच कराएं और स्तनपान कराना शुरू करें।

कंगारू की तरह उसकी देखभाल

बच्चे के जन्म के बाद तत्काल प्रभाव से कंगारू की तरह उसकी देखभाल को दृढ़तापूर्वक प्रोत्साहित करना। कंगारू देखभाल में एक बच्चे को उसकी मां या परिवार के किसी अन्य सदस्य की छाती पर लंबे समय तक रखा जाता है – दिन में कम से कम आठ घंटे। समय से पहले जन्मे बच्चों को बहुत अधिक ठंड लगने का खतरा होता है। ‘कंगारू देखभाल’ से उनकी मृत्यु का खतरा कम हो जाता है। ऐसा पाया गया है, भले ही शिशु को स्थिर करने के लिए कोई अन्य विकल्प न हों, लेकिन कंगारू देखभाल से संक्रमण का खतरा भी कम हो जाता है और स्तनपान की दर में भी सुधार होता है।

22.5 फीसदी से ज्यादा मामले भारत में दर्ज

2020 में किये गये सर्वे के अनुसार दुनिया में समय से पहले बच्चों के जन्म के 22.5 फीसदी से ज्यादा मामले भारत में दर्ज किए गए थे। इस लिहाज से देखें तो भारत इस मामले में भी दुनिया में अव्वल है। वहीं दुनिया भर में 2020 में समय से पहले जन्म संबंधी जटिलताओं के कारण हर 40 सेकंड में एक बच्चे की मौत हो गई। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु दर के अधिक होने का प्रमुख कारण समय से पहले जन्म है। दुनिया के निम्न और मध्यम आय वाले देशों में समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं की संख्या काफी अधिक है। दुनिया के लगभग 80 प्रतिशत ऐसे मामले कम और मध्यम आय वाले देशों में ही होते हैं। अफ्रीका महाद्वीप में मलावी, दक्षिण अफ्रीका, इथियोपिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और बोत्सवाना ऐसे देश हैं, जहां समयपूर्व जन्मे शिशुओं की संख्या काफी अधिक होती है। इथियोपिया में 2020 में 12.9 प्रतिशत बच्चे समय से पहले पैदा हुए। वहीं, नाइजीरिया में यह आंकड़ा 9.9 प्रतिशत था। समय से पहले जन्म तब कहा जाता है जब गर्भस्थ शिशु का जन्म गर्भावस्था के 37 सप्ताह के पहले हो जाता है। वहीं यदि किसी बच्चे का जन्म गर्भावस्था के 40 सप्ताह के बाद होता है तो उसके जन्म को सामान्य माना जाता है। देखा जाए तो समय से पहले जन्म लेने के कारण बच्चे का विकास ठीक से नहीं हो पता जो उनकी मौत का कारण भी बन सकता है। वहीं जो बच्चे जीवित रहते हैं उनको भी इसकी वजह से जीवन भर स्वास्थ्य सम्बन्धी जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही इसका असर उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर भी पड़ता है।

– आपकी गोद चहक उठेगा बच्चा

क्या आपको पता है, विश्व में समय पूर्व जन्म लेने वाला हर 5वां बच्चा भारतीय होता है, और समय पूर्व जन्मे बच्चों को कई तरह के रोगों का खतरा भी रहता है। लेकिन चिकित्सकों के मुताबिक समय पूर्व जन्म शिशुओं की अगर स्मार्ट देखभाल की जाए तो उनका जीवन भी बचाया जा सकता है। बता दें जब कोई बच्चा 37 सप्ताह के गर्भ से पहले पैदा होता है, तो उसे समयपूर्व जन्मे शिशु की श्रेणी में रखा जाता है। समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं में गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं, जैसे सेरेब्रल पाल्सी, खराब फेफड़ों की कार्यप्रणाली और उनकी आंतों की दीर्घकालिक समस्याओं का खतरा अधिक होता है। लेकिन, समय से पहले जन्म लेने वाले लगभग 95 प्रतिशत बच्चे 28 सप्ताह के बाद ही पैदा होते हैं। वे अक्सर अपेक्षाकृत कम जटिल चिकित्सा हस्तक्षेप के साथ जीवित रहते हैं। ‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ गायनेकोलॉजी एंड ऑब्स्टेट्रिक्स’ (एफआईजीओ) की एक समिति ने शिशुओं का जीवन बचाने के लिए ज्ञात कुछ प्रमुख उपायों का चयन किया है। ऐसे कई अन्य उपाय हैं जो प्रसव के समय और समय से पहले जन्म के बाद परिणामों में सुधार कर सकते हैं। लेकिन, चुने गए कुछ चिकित्सकीय रूप से प्रभावी और अपेक्षाकृत सस्ते विकल्प हैं, जिन्हें अधिकांश मामलों में अपनाया जा सकता है।

स्टेरॉयड की खुराकों का एक कोर्स

बच्चे के जन्म से पहले मां को स्टेरॉयड की खुराकों का एक कोर्स देना। इससे गर्भ में बच्चे के फेफड़ों में बदलाव आता है, जिससे उनका विस्तार होता है और इससे उसके लिए सांस लेना आसान हो जाता है। इसके अतिरिक्त, यह मस्तिष्क रक्तस्राव, आंत्र जटिलताओं और मृत्यु के जोखिम को भी कम करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा निम्न और मध्यम आय वाले देशों में किए गए एक अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि अगर मां को स्टेरॉयड दिया जाए तो हर साल 3,70,000 शिशुओं को बचाया जा सकता है। यह दवा डब्ल्यूएचओ की आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल है। इसका इस्तेमाल करना अपेक्षाकृत आसान है और इससे मां को कोई समस्या होने का जोखिम कम होता है। यह ताप स्थिर भी है और इसमें प्रशीतन की आवश्यकता नहीं होती है, जो उन क्षेत्रों के वातावरण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जहां बिजली की आपूर्ति कम है।

मां को दें मैग्नीशियम सल्फेट

प्रसव से तुरंत पहले मां को मैग्नीशियम सल्फेट भी दिया जा सकता है। यह शिशु में कोशिका झिल्ली को स्थिर करने के लिए जाना जाता है। यह न्यूरॉन्स की रक्षा करता है और मस्तिष्क क्षति को कम करता है। समय से पहले प्रसव के दौरान मां को दिया जाने वाला मैग्नीशियम सल्फेट जीवनरक्षक साबित हो सकता है। यह दवा डब्ल्यूएचओ की आवश्यक दवाओं की सूची में भी शामिल है और निम्न आय वाले देशों के वातावरण के लिए उपयुक्त है।

कॉर्ड क्लैम्पिंग में देरी

प्रसव के बाद कम से कम एक मिनट के लिए कॉर्ड क्लैम्पिंग में देरी। जब कोई बच्चा पैदा होता है तो उसकी गर्भनाल को दबाया जाता है और फिर काट दिया जाता है। हालांकि, क्लैम्पिंग से पहले लगभग एक मिनट की देरी नवजात की मृत्यु में कमी से जुड़ी है। यह नवजात शिशु में रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए दवाओं की आवश्यकता को भी कम कर देता है – ऐसी दवा जो अत्यधिक विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं के बाहर नहीं दी जा सकती है।

स्तनपान कराने के लिए प्रोत्साहित करना

प्रसव के एक घंटे के भीतर मां को स्तनपान कराने के लिए प्रोत्साहित करना। समय से पहले जन्मे बच्चों के लिए स्तनपान विशेष रूप से फायदेमंद होता है, जिससे गंभीर संक्रमण जैसी गंभीर जटिलताओं का खतरा कम हो जाता है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि मां बच्चे को सही से नहीं स्तनपान करा पाती हैं या फिर बच्चा सही तरीके से स्तनों को लैच नहीं कर पाता है। ऐसी परिस्थिति में मां या बच्चे में चिड़चिड़ाहट पैदा होने लगती है। ऐसे में मां को संयम से काम लेते हुए थोड़ा रुकना चाहिए। इसके बाद, बच्चे को हल्की थपकी दें और अपनी उंगली को बच्चे के मुंह में डालें ताकि वह उसे सक (Suck) कर सके। इसके बाद, उसे दोबारा स्तनों से लैच कराएं और स्तनपान कराना शुरू करें।

कंगारू की तरह उसकी देखभाल

बच्चे के जन्म के बाद तत्काल प्रभाव से कंगारू की तरह उसकी देखभाल को दृढ़तापूर्वक प्रोत्साहित करना। कंगारू देखभाल में एक बच्चे को उसकी मां या परिवार के किसी अन्य सदस्य की छाती पर लंबे समय तक रखा जाता है – दिन में कम से कम आठ घंटे। समय से पहले जन्मे बच्चों को बहुत अधिक ठंड लगने का खतरा होता है। ‘कंगारू देखभाल’ से उनकी मृत्यु का खतरा कम हो जाता है। ऐसा पाया गया है, भले ही शिशु को स्थिर करने के लिए कोई अन्य विकल्प न हों, लेकिन कंगारू देखभाल से संक्रमण का खतरा भी कम हो जाता है और स्तनपान की दर में भी सुधार होता है।

22.5 फीसदी से ज्यादा मामले भारत में दर्ज

2020 में किये गये सर्वे के अनुसार दुनिया में समय से पहले बच्चों के जन्म के 22.5 फीसदी से ज्यादा मामले भारत में दर्ज किए गए थे। इस लिहाज से देखें तो भारत इस मामले में भी दुनिया में अव्वल है। वहीं दुनिया भर में 2020 में समय से पहले जन्म संबंधी जटिलताओं के कारण हर 40 सेकंड में एक बच्चे की मौत हो गई। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु दर के अधिक होने का प्रमुख कारण समय से पहले जन्म है। दुनिया के निम्न और मध्यम आय वाले देशों में समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं की संख्या काफी अधिक है। दुनिया के लगभग 80 प्रतिशत ऐसे मामले कम और मध्यम आय वाले देशों में ही होते हैं। अफ्रीका महाद्वीप में मलावी, दक्षिण अफ्रीका, इथियोपिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और बोत्सवाना ऐसे देश हैं, जहां समयपूर्व जन्मे शिशुओं की संख्या काफी अधिक होती है। इथियोपिया में 2020 में 12.9 प्रतिशत बच्चे समय से पहले पैदा हुए। वहीं, नाइजीरिया में यह आंकड़ा 9.9 प्रतिशत था। समय से पहले जन्म तब कहा जाता है जब गर्भस्थ शिशु का जन्म गर्भावस्था के 37 सप्ताह के पहले हो जाता है। वहीं यदि किसी बच्चे का जन्म गर्भावस्था के 40 सप्ताह के बाद होता है तो उसके जन्म को सामान्य माना जाता है। देखा जाए तो समय से पहले जन्म लेने के कारण बच्चे का विकास ठीक से नहीं हो पता जो उनकी मौत का कारण भी बन सकता है। वहीं जो बच्चे जीवित रहते हैं उनको भी इसकी वजह से जीवन भर स्वास्थ्य सम्बन्धी जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही इसका असर उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर भी पड़ता है।

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