Home Latest चीन के गले की फांस बना चीन-पाकिस्तान गलियारा | Poverty in Pakistan |

चीन के गले की फांस बना चीन-पाकिस्तान गलियारा | Poverty in Pakistan |

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भाईसाब, क्या आपको पता, अपने महत्वाकांक्षी ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ यानी BRI प्रोजेक्ट में चीन ने अरबों डॉलर का निवेश किया है, लेकिन सफेद हाथी बन चुकी इस योजना में उसके सामने निरंतर कठिनाईयां आती जा रही हैं। ताज़ा घटनाक्रम में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा यानी CPEC पर काम बंद हो गया है। इस प्रोजेक्ट में बलोचिस्तान के ग्वादर पोर्ट को लम्बे समय से नगीने के तौरपर प्रस्तुत किया जा रहा था, लेकिन भाईसाब, विरोधाभास देखिये कि उसी की वजह से CPEC पर गतिरोध बना हुआ है। हालांकि पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवारुल हक़ काकर ने अपने बीजिंग यात्रा के दौरान ग्वादर पोर्ट पर असहमतियों को दूर करने का प्रयास किया ताकि सीपीईसी पर फिर से काम शुरू हो सके, लेकिन गतिरोध जल्द समाप्त होने के आसार नज़र नहीं आते। भाईसाब, आज के इस लेख में हम ‘चीन-पाकिस्तान गलियारा’ यानी CPEC पर चर्चा करेंगे।

भाईसाब, आपकी जानकारी के लिए ये जानना जरूरी है कि चीन की चालाकी और पाकिस्तान की कंगाली से चीन-पाकिस्तान गलियारा का काम ठप पड़ गया है। इसके पीछे एक कारण तो यह है कि बीजिंग, इस्लामाबाद में सेना द्वारा नियुक्त उसकी प्रॉक्सी सरकार से डील नहीं करना चाहता और पाकिस्तान में आम चुनाव जो इस साल नवम्बर तक हो जाने चाहिए थे, उनके बारे में कुछ पता नहीं है कि वह कब होंगे। दूसरा यह कि पाकिस्तान इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश के लिए चीन से 65 बिलियन डॉलर फंड्स की मांग कर रहा है, जोकि वह देना नहीं चाहता या देने की स्थिति में नहीं है। भाईसाब, इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्वादर शहर में चीन के विरुद्ध ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं; क्योंकि गलियारा प्रोजेक्ट के कारण ग्वादर शहर पुलिस राज्य बनकर रह गया है, जिसकी वजह से न केवल स्थानीय लोगों की गतिशीलता पर कुप्रभाव पड़ रहा है कि बल्कि उनकी जीविका भी प्रभावित हो रही है।
भाईसाब, आपको पता होना चाहिए कि,CPEC बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव यानी BRI प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा निवेश है, जिसे 2015 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पाकिस्तान यात्रा के दौरान लांच किया था। लगभग 45 बिलियन डॉलर मूल्य के 50 से अधिक प्रोजेक्ट्स पर हस्ताक्षर करते हुए चीन ने ‘सिल्क रोड फंड’ स्थापित किया ताकि 2030 तक प्लान किये गए सीपीईसी प्रोजेक्ट्स में निवेश किया जा सके। मुख्य प्रोजेक्ट गलियारा बनाने का था जो पाकिस्तान के बलोचिस्तान में ग्वादर पोर्ट को चीन के काशगर से जोड़ता जोकि दक्षिण-पश्चिम शिनजिंग क्षेत्र में है। भाईसाब, CPEC में भयंकर परेशानियां 2016 से ही आरंभ हो गई थीं। अनेक प्रोजेक्ट्स बीच में ही रुक गए थे, क्योंकि फंडिंग को लेकर अस्पष्टता थी, ठेकेदारों के चयन पर भी विवाद था, नीलामी प्रक्रिया में देरी थी, कर छूट पर मतभेद था और नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट्स मिलने में भी दुश्वारियां थीं। इस प्रोजेक्ट में देरी हुई क्योंकि अधिकारियों को यह स्पष्ट नहीं था कि इस प्रोजेक्ट की फंडिंग अनुदान से होगी, ब्याज-रहित ऋण से या चीन के कमर्शियल लोन से। फंडिंग पर अनिश्चितता को लेकर अन्य प्रोजेक्ट्स में भी बाधाएं आयीं, जैसे 600 मेगावाट ग्वादर कोयला पॉवर प्लांट और ग्वादर स्मार्ट पोर्ट सिटी मास्टर प्लान। भाईसाब, आपको बता दें कि सीपीईसी में सबसे बड़ी अड़चन जन विरोध है। बलोचिस्तान में स्थानीय लोग ग्वादर पोर्ट सिटी प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। उन्हें डर है कि जीविकोपार्जन के स्थानीय ज़रिये जैसे फिशिंग उनके हाथ से निकल जायेंगे। वह इस बात का भी विरोध कर रहे हैं कि निर्माण कार्य में स्थानीय लोगों की जगह अनस्किल्ड चीनी श्रमिकों को रोज़गार दिया जा रहा है। पोर्ट बनाने के लिए बलोच नागरिकों ने अपनी ज़मीनें चीनियों को बेचने से मना कर दिया है। इसके अतिरिक्त ग्वादर पोर्ट चाइना ओवरसीज पोर्ट्स होल्डिंग कंपनी को लीज पर दे दिया गया है, जिसका अर्थ यह है कि बीजिंग को लाभ का 91 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा और शेष 9 प्रतिशत ही इस्लामाबाद के खाते में आयेगा। ज़ाहिर है इससे बलोच लोगों में चीन विरोधी जज्बात भड़कने ही थे। दरअसल, स्थिति को अधिक जटिल पाकिस्तान की सरकार ने भी बना दिया है। वह स्थानीय लोगों की भूमि पर जबरन कब्ज़ा कर रही है और उन्हें दूसरी जगह बसने पर मजबूर कर रही है। इससे बलोचिस्तान में हिंसक विरोध बढ़ा है। वहीं पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवार-उल-हक़ काकर ने हाल की अपनी बीजिंग यात्रा के दौरान यह प्रयास अवश्य किया कि चीन मुख्य प्रोजेक्ट्स को फिर से फंड करने लगे, लेकिन उन्हें कोई खास सफलता मिली नहीं। जिनपिंग ने अन्य प्रोजेक्ट्स की समीक्षा का तो वायदा किया, लेकिन ग्वादर पोर्ट का मुद्दा अनसुलझा ही रहा।
भाईसाब, आपको बता दें कि भयंकर कर्ज़ व महंगाई में डूबे हुए पाकिस्तान को अगर श्रीलंका जैसे संकट से बचना है तो उसके लिए बेहतर है कि CPEC पर हमेशा के लिए विराम लग जाये। CPEC पर गतिरोध पाकिस्तान के लिए जहां अप्रत्यक्ष कृपादान हो सकता है, वहीं यह इस बात का भी संकेत है कि BRI चीन का असफल प्रोजेक्ट है।
तो भाईसाब, ये थी जानकारी ‘चीन-पाकिस्तान गलियारा’ पर लगे ग्रहण की, आशा करते हैं कि यह जानकारी आपको जरूर पसंद आई होगी, ऐसी ही रोचक जानकारी के लिए जुड़े रहें भाईसाब के साथ, धन्यवाद!

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