Home Latest दिल्ली में वायु प्रदुषण पर हो रहा है राजनितिक तांडव | Delhi Air Pollution |

दिल्ली में वायु प्रदुषण पर हो रहा है राजनितिक तांडव | Delhi Air Pollution |

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दिल्ली में वायु प्रदुषण पर हो रहा है राजनितिक तांडव | Delhi Air Pollution |

दिल्ली में वायु प्रदुषण पर हो रहे राजनितिक तांडव के बारे में ,
दिल्ली में वायु प्रदूषण पिछले कुछ सालों से गंभीर समस्या बनी हुई है जहां दिल्ली प्रदूषण को लेकर केजरीवाल सरकार हरियाणा और पंजाब में किसानों के पराली जलाने को जिम्मेदार मानती थी। अब दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी मार्लेना का कहना है कि सेक्यूरिटी गार्ड्स द्वारा जलाई जाने वाली अंगीठी भी सर्दियों में प्रदूषण का बड़ा कारण है। हाल ही में दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी मर्लेना ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि प्रदूषण के स्रोतों को मापने के लिए कोई आधिकारिक डाटा मौजूद नहीं है। आतिशी के इस बयान को सोशल मीडिया पर भयंकर लपेटा गया और आग में घी डालने का काम भाजपा के कपिल मिश्रा ने किया। मिश्रा जी ने कहा कि प्रदूषण पर आतिशी का बयान शर्मनाक है और केजरीवाल सरकार की बेशर्म फेलियर का सबूत है अगर आपको प्रदूषण का सोर्स नहीं पता तो पटाखों पर बैन क्यों ? पंजाब चुनाव रैली के दौरान पराली का जो समाधान विज्ञापनों में दिखाया उसका क्या हुआ ? मिश्रा जी ने केजरीवाल को भी नहीं बख्सा उन्होंने कहा की, मुख्यमंत्री के शीश महल में 34 एयर प्यूरीफायर लगे हैं और बाकी दिल्ली की जनता जहरीली हवा में साँस लेने पर मजबूर है।

वहीं एक दूसरे बीजेपी नेता बांसुरी स्वराज ने आम आदमी पार्टी का प्रदुषण पर किये गए पुराने ट्वीट को लेकर कहा कि आम आदमी पार्टी को यू-टर्न करने में महारत हासिल है। 18 नवंबर, 2020 को मंत्री आतिशी का एक ट्वीट आया था जिसमें कहा गया था कि दिल्ली में प्रदूषण पराली के जलाने के कारण होता है , जो कि हरियाणा और पंजाब के कारण होता है। वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरवाल ने कहा था कि पराली जलाना हरियाणा का एक छोटा सा हिस्सा है जो कि उत्तर की तरफ है, बाकी सारी की सारी पराली पंजाब में जलाने के कारण दिल्ली में प्रदूषण होता है। 18 नवंबर 2020 को ये बयान देने के बाद आतिशी मर्लेना 25 अक्टूबर 2023 को कहती हैं कि उनके पास कोई ऑफिशियल डाटा नहीं है। जिससे ये पता चल सके की दिल्ली में प्रदूषण क्यों होता है। दिल्ली से लेकर पंजाब तक आम आदमी पार्टी की सरकार हो या कोई अन्य सरकार प्रदूषण को रोकने में नाकाम पूरी तरह नाकाम रही है। लगातार कई तरह की योजनाएं बनाने के दावों और तमाम प्रतिबंध लगाने के बाद भी दिल्ली में हवा का स्तर खराब होता जा रहा है जबकि पंजाब में पराली जलने से रोकने में भी नाकामी मिल रही है।आप सरकार में कार्यरत वरिष्ठ नौकरशाह अश्वनी कुमार द्वारा दिल्ली पोलुशन को लेकर जारी रियल टाइम स्टडी पर रोक लगा दिया ताकि वायु प्रदुषण के पीछे के तात्कालिक असल तथ्य पता न चल सके जिस पर मंत्री आतिशी ने नाराजगी जाहिर की है और आरोप लगाया है कि अश्वनी कुमार ने यह निर्णय लेने से पहले सरकार में किसी से बात नहीं की। हमें जानकारी भी नहीं दी गई। कई अधिकारी पिछले दिनों प्रदूषण को लेकर बुलाई गई मीटिंग में भी नहीं आए। अधिकारियों को लगता है कि वे चुनी हुई सरकार की बात मानें न मानें, उनका कुछ नहीं होगा। इसी मुद्दे को हमने कोर्ट के सामने भी उठाया है। पहली बार ऐसा हुआ है कि कैबिनेट के फैसले को भी किसी अधिकारी ने पलट दिया है। इस अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में दिल्ली के सोनिया विहार इलाके में एयर क्वालिटी इंडेक्स 352 जबकि दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तरी कैम्पस में 351 दर्ज किया गया। नेहरू नगर में तो एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 के पार निकल गया। दिल्ली के अन्य कई इलाकों में भी एयर क्वालिटी इंडेक्स 200-300 के बीच है। हवा में प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है, विशेषकर साँस की बीमारियों से परेशान रोगियों के लिए यह घातक हो सकता है। यह हालात तब हैं जब दिल्ली में निर्माण कार्यों समेत गाड़ियों और डीजल जनरेटर जैसी गतिविधियों पर आंशिक या पूर्ण रूप से कई प्रतिबंध लगाए गए हैं। दिल्ली की केजरीवाल सरकार प्रदूषण रोकने में नाकाम रहने पर अब अपने हाथ खड़े कर रही है।वहीं आतिशी का कहना है कि हमारे पास आधिकारिक डाटा उपलब्ध नहीं है कि किस कारण कितना प्रदूषण होता है। इसी समस्या के समाधान के लिए हमने निर्णय लिया था कि दिल्ली में प्रदूषण को लेकर रियल टाइम स्टडी हो। इसी स्टडी से पता चला कि सेक्यूरिटी गार्ड्स द्वारा जलाई जाने वाली अंगीठी भी सर्दियों में प्रदूषण का बड़ा कारण है। आनंद विहार में सबसे बड़ा कारण गाड़ियां हैं जबकि वजीरपुर में इंडस्ट्री हैं। आतिशी ने पूछा है कि क्या अब आईएएस अश्वनी कुमार यह तय कर सकते हैं कि आईआईटी की स्टडी होनी चाहिए या नहीं? इन नेताओं का यह खेल चलता रहेगा और जनता जहरीली हवा सोखती रहेगी, हमे ही कुछ आवश्यक कदम उठाने होंगे जिस हम अपने आने वाली जेनेरशन और बूढ़े बुजुर्गो को बचा सकें।

प्रदुषण रोकने के लिए कुछ उपाय :
निजी वाहनों के कम इस्तेमाल करें, दुकानों पर थैला साथ ले जाएं। जरूरत से ज्यादा प्लास्टिक उत्पादों की खरीदारी करने से बचें, अधिक मात्रा में पेड़-पौधे लगाने की कोशिश करें। बर्थडे या किसी फंक्शन में उपहार में पौधा देना का चलन शुरू करें, एसी का उपयोग कम से कम करें। चलाना भी है तो उसका तापमान 24 डिग्री से ऊपर ही रखें, अपने आस पास कचरा न जलाने का जागरूकता अभियान चलाएं। इससे जुड़ी बीमारियों के बारे में बताएं, पराली को जलाने के बजाय उसे गलाकर खाद बनाएं। इसमें किसान और पर्यावरण दोनों का लाभ है, कागज के बजाय ई-सर्विस का प्रयोग अधिक करें। डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन के इस्तेमाल पर जोर दें और घर से बहार निकलें तो मास्क जरूर लगाएं।

ऐसेही महत्वपूर्ण जानकारी के लिए जुड़े रहिये भाईसाब के साथ।

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