Home Gali Nukkad देश में चल रहा राजनीतिक यात्राओं का दौर | Political ‘Yatra’ in India

देश में चल रहा राजनीतिक यात्राओं का दौर | Political ‘Yatra’ in India

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Political 'Yatra' in India

भाईसाब, क्या आपको पता है, यात्रा कभी धर्म प्रचार या नैतिक उत्थान से जुड़ी थी लेकिन अब वह राजनीतिक हो गई है, उस समय यात्राओं का कोई न कोई प्रयोजन अवश्य होता है। लेकिन अब यात्राएं केवल राजनीतिक स्वार्थ साधने के लिए ही की जाने लगी हैं, इन यात्राओं का उद्देश्य महज आम जनता को लुभाना होता है और जनता के साथ दिखावटी संवाद करना होता है.

नमस्कार, भाईसाब, ये जानना आपके लिए बहुत जरूरी है कि यात्रा हमारी संस्कृति का अंग रहा है, जब यातायात के आधुनिक साधन नहीं थे तब भी लोग लंबी यात्राएं किया करते थे, सामान्य व्यक्ति पैसा कमाने या रोजी-रोजगार के लिए दूर का सफर करते थे, तो संत-महात्मा धर्म-संस्कृति के प्रचार हेतु निरंतर परिभ्रमण करते थे। भाईसाब, आपको पता होगा कि भगवान राम अयोध्या से दंडकारण्य होते हुए समुद्र तट तक और फिर वानर सेना द्वारा निर्मित पुल से लंका गए थे। वहीं गुरु नानक पश्चिम में मक्का-मदीना तक तो पूर्व में म्यांमार तक गए थे, सामान्य लोग बैल, घोड़े या ऊंट पर सफर करते थे या दिनभर पैदल चलकर किसी गांव में रात्रि विश्राम कर लिया करते थे। उनके पास खाने के लिए सत्तू रहा करता था। रास्ते में किसी नदी या कुएं से पानी लेकर वे सत्तू घोल लिया करते थे।भाईसाब, आदि शंकराचार्य ने सिर्फ 32 वर्ष की आयु में संपूर्ण भारत का प्रवास कर डाला था, उन्होंने श्रृंगेरी, जगन्नाथपुरी, द्वारका, बद्रीनाथ में 4 पीठ स्थापित किए। सम्राट अशोक के पुत्र महेन्द्र और पुत्री संघमित्रा बौद्ध धर्म का प्रचार करने लंका गए थे, भाईसाब, आपको आश्चर्य होगा कि अब भी जैन साधु और साध्वियां वाहन का उपयोग न करते हुए पैदल लंबी यात्रा करते हैं।

भाईसाब, यात्रा कभी धर्म प्रचार या नैतिक उत्थान से जुड़ी थी लेकिन अब वह राजनीतिक हो गई है। महात्मा गांधी ने नमक पर टैक्स लगाए जाने के ब्रिटिश सरकार के फैसले के खिलाफ दांडी मार्च निकालकर नमक सत्याग्रह किया था, यही से विदेशी शासन की नींव हिलनी शुरू हो गई थी, बापू के नेतृत्व में सत्याग्रही मीलों पैदल चलते थे।भाईसाब, प्रथम सत्याग्रही कहलानेवाले भूदान यज्ञ के प्रणेता आचार्य विनोबा भावे अपनी लंबी पदयात्राओं के लिए जाने जाते थे, बाद के वर्षों में चंद्रशेखर ने भी लंबी पदयात्रा की थी, बाद में वे कांग्रेस के बाहरी समर्थन से कुछ माह के लिए प्रधानमंत्री बने थे,भाईसाब आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभिनेता व कांग्रेस सांसद सुनील दत्त ने भी पदयात्रा निकाली थी, बाद में उन्हें केंद्र सरकार में मंत्री भी बनाया गया था, हालांकि, यात्राओं का कोई न कोई प्रयोजन अवश्य होता है।

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भाईसाब, वर्तमान में बीजेपी की देशव्यापी ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’ भी चल रही है, जिसका उद्देश्य केंद्र सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को समाज के अंतिम पायदान तक पहुंचाने और इसके प्रति जागरूकता व जनभागीदारी बढ़ाना है, इस यात्रा का पहला चरण 15 से 22 नवंबर तक 21 राज्यों के जनजाति बहुल इलाकों में हुआ और दूसरा चरण 3 दिसंबर से शुरू होने के बाद 26 जनवरी तक चलेगा। इसके अंतर्गत सभी केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्री, राज्यों के मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को यात्रा के साथ 3 दिन शामिल होने का निर्देश दिया गया है। इसमें स्वास्थ्य शिविर, सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा सरकारी योजनाओं में पंजीकरण किए जा रहे हैं। भाईसाब, बीजेपी के अलावा कांग्रेस की भी एक यात्रा चल रही है, जिसकी चर्चा पूरे देश में है, हाल ही में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भारत जोड़ो न्याय यात्रा मणिपुर की राजधानी इंफाल से शुरू किया है, इसमें अरुणाचल को भी शामिल किया गया है, यह यात्रा पूर्वोत्तर राज्यों के अलावा बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, यूपी, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में जाएगी। इसमें काफी सफर बस से भी तय किया जा रहा है। राहुल 15 राज्यों के 110 जिलों से होकर 67 दिनों में 6713 किलोमीटर का सफर तय करेंगे। इसमें राहुल गांधी सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक न्याय पर जनता के बीच विचार रखेंगे व लोगों से चर्चा करेंगे। पिछली भारत जोड़ो यात्रा कन्याकुमारी से कश्मीर गई थी जिसकी वजह से कर्नाटक व हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में जीत हासिल हुई थी।

चलते-चलते भाईसाब, आपको जानकारी दे दें कि शिरोमणि अकाली दल भी 1 फरवरी से पंजाब बचाओ यात्रा शुरू करेगा जिसका नेतृत्व सुखबीरसिंह बादल करेंगे, इसका उद्देश्य आम आदमी सरकार को बेनकाब करना और अपना राजनीतिक प्रभाव बढ़ाना है। यात्रा पंजाब के सभी विधानसभा क्षेत्रों में जाएगी, वहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान से इस यात्रा को ‘सियासी हथकंडा’ करार दिया है, उन्होंने कहा कि अकालियों ने 15 वर्ष के शासन में राज्य को बेरहमी से बरबाद कर दिया, उनकी पार्टी 117 सदस्यीय विधानसभा में 3 सीटों पर सिमट कर रह गई।

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