Home Dharohar भारत का दूसरा राम राज्य : ओरछा | Orchha – Madhya Pradesh |

भारत का दूसरा राम राज्य : ओरछा | Orchha – Madhya Pradesh |

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भाईसाब, आज हम जानेंगे भारत के दिल बोले जाने वाले राज्य यानी मध्य प्रदेश के ओरछा शहर की जहां ऐसे कई महल और फोर्ट हैं जिसे देखने के लिए लाखों देशी और विदेशी सैलानी पहुंचते हैं। इन सबके अलावा ओरछा के राजाराम भी हमेशा चर्चा में रहते हैं। बताते चलें कि जिस तरह अयोध्या के रग-रग में राम हैं, ठीक उसी प्रकार ओरछा की धड़कन में भी राम विराजमान हैं। राम यहां धर्म से परे हैं। हिंदू हों या मुस्लिम, दोनों के ही वे आराध्य हैं। भाईसाब, आज के इस लेख में जानेंगे कि यहां स्थित भगवान श्रीराम का मंदिर पूरे देश में एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां वे भगवान के रूप में नहीं, बल्कि एक राजा के रूप में पूजे जाते हैं।
आज इस लेख में हम ओरछा शहर के रहस्यों का उजागर करेंगे, आखिर क्यों यहां के राजाराम को दिया जाता है गार्ड ऑफ ऑनर?

आपके लिए यह जानना जरूरी है कि अयोध्या और ओरछा का करीब 600 वर्ष पुराना नाता है। कहा जाता है कि 16वीं शताब्दी में ओरछा के बुंदेला शासक मधुकरशाह की महारानी कुंवरि गणेश अयोध्या से रामलला को ओरछा ले आईं थीं। पौराणिक कथाओं के अनुसार ओरछा के शासक मधुकरशाह कृष्ण भक्त थे, जबकि उनकी महारानी कुंवरि गणेश, राम उपासक। इसके चलते दोनों के बीच अक्सर विवाद भी होता था। एक बार मधुकर शाह ने रानी को वृंदावन जाने का प्रस्ताव दिया पर उन्होंने विनम्रतापूर्वक उसे अस्वीकार करते हुए अयोध्या जाने की जिद कर ली। तब राजा ने रानी पर व्यंग्य किया कि अगर तुम्हारे राम सच में हैं तो उन्हें अयोध्या से ओरछा लाकर दिखाओ। तो, भाईसाब इसपर महारानी कुंवरि अयोध्या रवाना हो गईं। वहां 21 दिन उन्होंने तप किया। इसके बाद भी उनके आराध्य प्रभु राम प्रकट नहीं हुए तो उन्होंने सरयू नदी में छलांग लगा दी। कहा जाता है कि महारानी की भक्ति देखकर भगवान राम नदी के जल में ही उनकी गोद में आ गए। तब महारानी ने राम से अयोध्या से ओरछा चलने का आग्रह किया तो उन्होंने तीन शर्तें रख दीं। पहली, मैं यहां से जाकर जिस जगह बैठ जाऊंगा, वहां से नहीं उठूंगा। दूसरी, ओरछा के राजा के रूप विराजित होने के बाद किसी दूसरे की सत्ता नहीं रहेगी। तीसरी और आखिरी शर्त खुद को बाल रूप में पैदल एक विशेष पुष्य नक्षत्र में साधु संतों को साथ ले जाने की थी। महारानी ने ये तीनों शर्तें सहर्ष स्वीकार कर ली। इसके बाद ही रामराजा ओरछा आ गए। तब से भगवान राम यहां राजा के रूप में विराजमान हैं।
भाईसाब, राम के अयोध्या और ओरछा, दोनों ही जगहों पर रहने की बात कहता एक दोहा आज भी रामराजा मन्दिर में लिखा है कि रामराजा सरकार के दो निवास हैं ‘खास दिवस ओरछा रहत हैं रैन अयोध्या वास’। ओरछा में प्रभु राम पर एक और बात प्रचलित है। कहा जाता है कि 16वीं सदी में जिस समय भारत में विदेशी आक्रांता मंदिर और मूर्तियों को तोड़ रहे थे, तब अयोध्या के संतों ने जन्मभूमि में विराजमान श्रीराम के विग्रह को जल समाधि देकर बालू में दबा दिया था। यही प्रतिमा रानी कुंवरि गणेश ओरछा लेकर आई थीं। कहा जाता है कि 16वीं सदी में ओरछा के शासक मधुकर शाह ही एकमात्र ऐसे पराक्रमी हिंदू राजा थे जो अकबर के दरबार में बगावत कर चुके थे।
भाईसाब, इतिहास में यह बात दर्ज है कि जब अकबर के दरबार में तिलक लगाकर आने पर पाबंदी लगा दी गई थी, तब मधुकर शाह ने भरे दरबार में बगावत कर दी थी। उनके तेवर के चलते अकबर को अपना फरमान वापस लेना पड़ा था। अयोध्या के संतों को यह भरोसा था कि मधुकर शाह की हिंदूवादी सोच के बीच राम जन्मभूमि का श्रीराम का यह विग्रह ओरछा में पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। इसीलिए उनकी महारानी कुंवर गणेश अयोध्या पहुंचीं और संतों से मिलकर विग्रह को ओरछा ले आईं।
भाईसाब, आपको बता देते है कि महारानी कुंवरि गणेश ने ही श्रीराम को अयोध्या से ओरछा लाकर विराजित किया था, यह धार्मिक कथा ही नहीं है, बल्कि उन संभावनाओं को भी मान्यता देती है जिनमें कहा गया कि कहीं अयोध्या की राम जन्मभूमि की असली मूर्ति ओरछा के रामराजा मंदिर में विराजमान तो नहीं? अयोध्या के रामलला के साथ ही ओरछा के राजाराम भी सुर्खियों में आ जाते हैं। हर बार मीडिया में ये सवाल सुर्खियों में रहता है कि अयोध्या जन्म भूमि की प्रतिमा ही ओरछा के रामराजा मंदिर में विराजमान है। इतिहासकार बताते हैं कि राजाराम के लिए ओरछा के मंदिर का निर्माण कराया गया था, पर बाद में उन्हें सुरक्षा कारणों से मंदिर की बजाए रसोई में विराजमान किया गया। इसके पीछे तर्क ये है कि माना जाता था कि रजवाड़ों की महिलाएं जिस रसोई में रहती हैं, उससे अधिक सुरक्षा और कहीं नहीं हो सकती।
भाईसाब, ओरछा और अयोध्या का संबंध करीब 600 वर्ष पुराना है। कहते हैं कि संवत 1631 में चैत्र शुक्ल नवमी को जब भगवान राम ओरछा आए तो उन्होंने संत समाज को यह आश्वासन भी दिया था कि उनकी राजधानी दोनों नगरों में रहेगी। तब यह बुन्देलखण्ड की ‘अयोध्या’ बन गया। ओरछा के रामराजा मंदिर की एक और खासियत है। एक राजा के रूप में विराजने की वजह से उन्हें चार बार की आरती में सशस्त्र सलामी गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। ओरछा नगर के परिसर में यह गार्ड ऑफ ऑनर रामराजा के अलावा देश के किसी भी वीवीआईपी को नहीं दिया जाता, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तक को भी नहीं। यहां की एक और खास बात है कि हां राजाराम मुसलमानों के भी आराध्य हैं। ओरछा के मुसलमान भी राम को उतना ही मानते हैं जितना रहीम को।
भाईसाब, राजाराम के अलावा ओरछा में स्थित जहांगीर महल की कहानी लाखों सैलानियों के लिए बेहद ही जिज्ञासा का केंद्र है। कहा जाता है कि इस भव्य महल का निर्माण ओरछा के राजा वीर सिंह के शासनकाल काल में हुआ था। इस मध्यकालीन महल के बारे में कहा जाता है कि जब इसका निर्माण होने वाला था तब भव्य यज्ञ के साथ इसका शिलान्यास किया गया था। जहांगीर महल के बारे में यह भी लोक कथा है कि इसका निर्माण उस स्थान पर किया गया था जहां दुश्मन सैनिक आसानी से नहीं पहुंच सकते थे। जब इस महल का निर्माण किया गया था तो प्रवेश द्वार पूर्व की ओर था, लेकिन कुछ वर्षों बाद इसका द्वार पश्चिम दिशा में कर दिया गया। इसे कई लोग 52 इमारतों वाला जहांगीर महल के नाम से भी जानते हैं। भाईसाब, एक अन्य लोककथा के अनुसार इस महल को बनाने में लगभग 22 साल लग गए थे और इस महल में जहांगीर सिर्फ एक रात के लिए ठहरा था। इसलिए इस महल को कई लोग जहांगीर महल/सलीम महल के नाम से भी जानते हैं। इस महल को वीर सिंह और जहांगीर दोनों की दोस्ती का प्रतीक भी माना जाता है। इसके अलावा इसे कई लोग बुंदेला और मुग़ल का प्रतीक भी मानते हैं। भाईसाब, जहांगीर महल की वास्तुकला भी एक रोचक विषय है। जी हां, इस महल में बारे में बोला जाता है कि यह बुंदेला और मुग़ल शिल्पकला का एक बेजोड़ नमूना है। इस महल का निर्माण आयातारकर चबूतरे पर बना है। जहांगीर महल खूबसूरत सीढ़ियों और विशाल गेट के लिए प्रसिद्ध है। महल में लगभग हर जगह बुंदेलों की वास्तुकला देखने को मिल जाएगी।
हम आपको बता दें कि इस शहर में ऐसे कई अन्य जगहें भी हैं जहां घूमने के लिए हजारों लोग पहुंचते हैं। यहां स्थित चतुर्भुज मंदिर, बेतवा नदी और फूल बाग जैसी बेहतरीन जगहों पर घूमने के लिए जा सकते हैं। ओरछा भोपाल से लगभग 334 किमी की दूरी पर है।
तो ये थी जानकारी ओरछा शहर की, आशा करते हैं यह जानकारी आपको जरूर पसंद आई होगी, ऐसे ही अन्य रोचक जानकारी के लिए जुड़े रहें भाईसाब के साथ, धन्यवाद!

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