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नए भारत का नया संसद भवन । New Parliament Of India |

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नए भारत का नया संसद भवन । New Parliament Of India |

आज जानते है भारत के नए संसद भवन के बारे में जो भारत के समृद्धि के ओर एक कदम है।
नया संसद भवन ‘नए भारत’ को प्रदर्शित करने का भी एक प्रयास है: एक ऐसा देश जो अपनी प्राचीन विरासत को बनाए रखने और अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महिमा को बहाल करने में सक्षम है, साथ ही साथ अपनी आधुनिक आकांक्षाओं की दिशा में प्रगति कर रहा है।

नया संसद भवन सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के अंतर्गत बनाया गया है। इस योजना का उद्देश्य संसद, मंत्रालयों और विभागों के लिए जगह की वर्तमान और भविष्य की बुनियादी ढांचे की जरूरतों को पूरा करना है।
28 मई 2023 को भारत के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी ने नए संसद भवन का उद्घाटन किया।उस वक्त उन्होंने कहा के , “यह सिर्फ एक इमारत नहीं है। यह 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं और सपनों का प्रतिबिंब है। यह हमारे लोकतंत्र का मंदिर है जो दुनिया को भारत के दृढ़ संकल्प का संदेश देता है और आत्मनिर्भर भारत के सुबह साथ। यह विकसित भारत की दिशा में हमारी यात्रा का गवाह होगा।” इस भवन का निर्माण रिकॉर्ड ढाई साल के समय में किया गया है

नए संसद भवन की आवश्यकता :
नए संसद भवन की आवश्यकता क्यों महसूस हुयी , पुराने भवनों को पूर्ण लोकतंत्र के लिये द्विसदनीय विधायिका को समायोजित करने के लिये डिज़ाइन नहीं किया गया था। ऐसी सम्भावना जताई जा रही है के , वर्ष 2026 के बाद सीटों की कुल संख्या पर रोक हटने पर लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 545 से काफी बढ़ सकती है।पुरानी संसद में Communications infrastructure and technology पुरानी थी तथा सभी हॉलों के साउंड सिस्टम में सुधार की आवश्यकता थी। इसी के साथ पुराना संसद भवन तब बना था जब दिल्ली भूकंपीय ज़ोन-II में था; और बात अगर आज की करे तो दिल्ली भूकंपीय ज़ोन-V में है जो स्ट्रक्चरल सुरक्षा के चिंताओं को बढाता है। पिछले कई वर्षो में इंटरनल Service corridors को कार्यालयों में परिवर्तित कर दिया। श्रमिकों की बढ़ती संख्या के कारण यह जगह श्रमिकों को काम करने के लिए छोटी पड़ने लगी थी। इस वजह से नए संसद की जरुरत भारत को थी।

नए संसद भवन की रचना :
नए संसद भवन का आकार त्रिकोणीय है ,यह ऐसा इसलिये है क्योंकि जिस भूखंड पर यह बना है वह त्रिकोणीय है।
इसका डिज़ाइन और सामग्री पुरानी संसद की पूरक है, साथ ही दोनों भवनों का परिसर भी एक है।
नया संसद भवन पर्यावरण के अनुकूल है :
नया संसद हरित कंस्ट्रक्शन टेक्निक्स इस्तेमाल करके बनाया गया है , इस वजह से पुराने भवन की तुलना में यह 30% कम विद्युत की खपत करेगा । इसमें वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण प्रणालियों को शामिल किया गया है। इस इमारत को भूकंप-रोधी बनाया गया है।अगर बात की जाए लोकसभा और राज्यसभा के बारे मैं तो मैं बताना चाहूंगा /चाहूंगी , नए लोकसभा कक्ष में राष्ट्रिय पक्षी मोर विषयवस्तु ( Theme ) को अपनाया गया है, जिसमें दीवारों और छत पर मोर के पंखों के समान नक्काशीदार डिज़ाइन तैयार किये गए हैं, जो टील कार्पेट से सुसज्जित हैं।
लोकसभा कक्ष में वर्तमान के 543 के बजाय 888 सीटें होंगी, जिसकी क्षमता बढ़कर 1,272 हो जाएगी। सेंट्रल हॉल के अभाव में लोकसभा का उपयोग दोनों सदनों की संयुक्त बैठक हेतु किया जाएगा।

राज्यसभा :
राज्यसभा कक्ष को लाल कालीनों के साथ इसकी थीम के रूप में कमल से सज़ाया गया है। लोकसभा और राज्यसभा दोनों में एक बेंच पर दो सांसद बैठ सकेंगे और प्रत्येक सांसद की डेस्क पर टच स्क्रीन होगी। राज्यसभा कक्ष अब 250 की मौजूदा क्षमता के विपरीत 384 संसद सदस्यों (सांसदों) को समायोजित कर सकता है। परिसीमन के बाद सांसदों की संख्या में भविष्य में होने वाली किसी भी वृद्धि को ध्यान में रखकर दोनों कक्षों की क्षमता को पहले से अधिक किया गया है। नए संसद के लिए पुरे भारत से सामग्री लाकर इस्तेमाल की gayi है। भवन के आंतरिक और बाहरी निर्माण के लिये देश भर से विभिन्न प्रकार की निर्माण सामग्री लाई गई है, जिसमें धौलपुर के सरमथुरा से बलुआ पत्थर और राजस्थान राज्य के जैसलमेर ज़िले के लाखा गाँव से ग्रेनाइट शामिल है। इसी प्रकार साज-सज्जा में प्रयुक्त लकड़ी नागपुर से लाई गई और मुंबई के शिल्पकारों ने इस पर वास्तुशिल्प डिज़ाइन का कार्य किया है। उत्तर प्रदेश के भदोही के बुनकरों ने भवन के लिये हाथ से बुने पारंपरिक कालीन बनाए हैं।वर्ष 1993 में संसद के मुख्य द्वार पर स्थापित की गई महात्मा गांधी की 16 फुट ऊँची काँस्य प्रतिमा को पुराने और नए भवनों के बीच स्थानांतरित कर दिया गया है। इसे पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध मूर्तिकार राम वी सुतार ने बनाया था।नया संसद भवन राष्ट्रीय प्रतीकों से भरा हुआ है, जिसमें राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ के सिंह को भवन के शीर्ष पर स्थापित किया है जिसका वज़न 9,500 किलोग्राम है और ऊँचाई 6.5 मीटर है। इस विशाल काँस्य प्रतिमा को सहारा देने के लिये सेंट्रल फोयर के शीर्ष पर 6,500 किलोग्राम की संरचना का निर्माण किया गया है। भवन के प्रवेश द्वार पर अशोक चक्र और ‘सत्यमेव जयते’ शब्द पत्थरों पर अंकित किये गए हैं। इसी के साथ अंग्रेज़ो से सत्ता के हस्तांतरण को चिह्नित करने के लिये आज़ादी की पूर्व संध्या पर जवाहरलाल नेहरू को दिया गया गोल्डन राजदंड स्पीकर के पोडियम के पास नए लोकसभा कक्ष में रखा जाएगा। यह राजदंड उन्हें तमिलनाडु के पुजारियों द्वारा दिया गया था।नए संसद भवन में डिजिटलीकरण का बहोत अच्छे से इस्तेमाल किया गया है ।नई संसद के पर्यावरण के अनुकूल दृष्टिकोण के अनुसार सभी रिकॉर्ड , सदन की कार्यवाही, प्रश्न और अन्य व्यवसाय को डिजिटाइज़ किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त टैबलेट और आईपैड का अभूतपूर्व इस्तेमाल किया गया है।भवन में शिल्प नामक गैलरी का भी निर्माण किया गया है ।’शिल्प’ नामक एक गैलरी सभी भारतीय राज्यों की मिट्टी से बने मिट्टी के बर्तनों के साथ-साथ पूरे भारत के वस्त्र प्रतिष्ठानों को प्रदर्शित करेगी। गैलरी ‘स्थापत्य’ भारत के प्रतिष्ठित स्मारकों को प्रदर्शित करेगी जिनमें विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के स्मारक शामिल हैं। स्मारकों के अतिरिक्त यह योग आसनों को भी समाहित करती है।भवन को बनाते वक्त वास्तु शास्त्र का भी बहोत बारीकी से इस्तेमाल किया गया है। भारतीय संस्कृति और वास्तु शास्त्र में उनके महत्त्व के आधार पर भवन के सभी प्रवेश द्वारों पर संरक्षक मूर्तियों के रूप में शुभ पशुओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इनमें हाथी, घोड़ा, चील, हंस और पौराणिक जीव शार्दुला और मकर शामिल हैं।नए संसद भवन के अंदर एक फौकॉल्ट पेंडुलम स्थापित है जिसे संसद के अक्षांश पर एक चक्कर पूरा करने में 49 घंटे 59 मिनट और 18 सेकंड का समय लगता है।
फौकॉल्ट पेंडुलम, जिसका नाम फ्राँसीसी भौतिक विज्ञानी लियोन फौकॉल्ट के नाम पर रखा गया है, इसका उपयोग पृथ्वी के रोटेशन को प्रदर्शित करने के लिये किया जाता है।
नया संसद, नये सपनों की दिशा है । इस नए आरंभ के साथ, हम सब मिलकर भारत के भविष्य को नया रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाते हैं।
ऐसेही जानकारी के लिए जुड़े रहिये भाईसाब के साथ ।

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