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जम्मू-कश्मीर: धारा 370 के निरस्तीकरण के बाद की नयी शुरुवात ।

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आज जानेंगे जम्मू कश्मीर से धारा ३७० हटने बाद के हालात के बारे में ,
केंद्र सरकार द्वारा 5 अगस्त, 2019 को धारा 370 को रद्द करने के आज चार साल बाद, अगर इतिहास से तुलना की जाये तो जम्मू कश्मीर में शांति बहाली, विकासात्मक गतिविधियां और सुरक्षा व्यवस्था इसके सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों के रूप में सामने आने लगे हैं। आज तीन दशकों से अधिक समय के बाद है, जम्मू कश्मीर में सार्वजनिक और सामाजिक जीवन, सामान्य रूप से , बिना किसी व्यवधान के सामान्य दिनचर्या में वापस आ गया है। जबकि अगस्त 2016 से अगस्त 2019 तक विरोध प्रदर्शन और पथराव की घटनाओं के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों के हाथों 124 नागरिक मारे गए, वहीँ आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले चार वर्षों में ऐसी एक भी घटना दर्ज नहीं की गई।
5 अगस्त, 2019 के महत्वपूर्ण निर्णय से घाटी में आतंकवादी गतिविधियों और भाई-भतीजावाद में भारी गिरावट आई। पिछले वर्षों की तुलना में 2023 में आतंकवाद में स्थानीय लोगों की भर्ती और आतंकवादियों की हत्या दोनों में उल्लेखनीय गिरावट धारा 370 के निरस्तीकरण का एक और परिणाम है। इस साल 1 जनवरी से 5 अगस्त तक सुरक्षा बलों के विभिन्न अभियानों में जहां 35 आतंकवादी मारे गए, वहीं पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 120 से अधिक थी। 2021 में सुरक्षा बलों ने 56 विदेशियों सहित 186 आतंकवादियों को मार गिराया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस साल घुसपैठ की कई कोशिशें नाकाम की गई हैं वहीँ सक्रिय उग्रवादियों की संख्या घटकर दहाई अंक में आ गई है।

सुरक्षा स्थिति में सुधार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 3 अगस्त को शोपियां के गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें रिपोर्टों के मुताबिक, सैकड़ों छात्र, शिक्षाविद, पत्रकार और अन्य क्षेत्रों के लोग शामिल हुए थे जिसमे धारा 370 हटने के बाद हो रहे सकारात्मक विकास के अलावा शांति, राष्ट्र निर्माण और संस्था निर्माण के बारे में बात की गयी थी और लोगो ने बढ़ चढ़ कर इस कार्यक्रम में भाग लिया था।यह कार्यक्रम ‘साउथ एशिया सेंटर फॉर पीस एंड पीपुल्स एम्पावरमेंट’ द्वारा जीडीसी शोपियां के सहयोग से आयोजित किया गया था, आपको बता दें की शोपियां जिला कुछ समय पहले भारत विरोधी गतिविधियों का केंद्र था और ऐसी सकारात्मक गतिविधियों के लिए वर्जित क्षेत्र था।
धारा 370 को निरस्त करने के बाद कश्मीर में हुई सबसे अच्छी चीजों में से एक प्रशासनिक नियंत्रण की बहाली है। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षित वातावरण से प्रोत्साहित और आश्वस्त होकर, इस केंद्र शासित प्रदेश में लगभग 25 हजार करोड़ रुपये की निवेश परियोजनाएं क्रियान्वित हो रही हैं, जबकि 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव प्रक्रिया में हैं।आजादी के बाद से जम्मू-कश्मीर को केवल 14,000 करोड़ रुपये का निजी निवेश मिला था। हालाँकि, धारा 370 के निरस्त होने और नई औद्योगिक विकास योजना की शुरुआत के बाद, इस यूटी को पिछले दो वर्षों में 81,122 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। और कई देश इस केंद्रशासित प्रदेश में इन्वेस्ट करने के लिए होण में है जिसमे सबसे प्रमुख नाम है UAE का । प्रमुख इकाइयों की स्थापना के लिए मांगी गई कुल 4877 एकड़ भूमि के मुकाबले लगभग 2250 एकड़ भूमि पहले ही जम्मू और कश्मीर दोनों डिवीजनों में आवंटित की जा चुकी है और आगे की आवंटन प्रक्रिया भी चल रही है ।
अगर बात करे पर्यटन की तो घरेलू और विदेशी पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ, जम्मू-कश्मीर में पर्यटन नई ऊंचाइयों को छू रहा है, जिससे यह केंद्र शासित प्रदेश देश के शीर्ष स्थलों में से एक बन गया है। कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकवादियों द्वारा की गई हड़ताल के आह्वान को अब कोई स्वीकार नहीं कर रहा है क्योंकि आम आदमी को शांति रोजगार घर और २ वक़्त की रोटी मिलना शुरू हो गया है। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से पहले, कश्मीर में लगातार हड़ताल के आह्वान, पथराव की घटनाओं और हिंसा के कारण न केवल व्यवसायों, बल्कि कश्मीर में शिक्षा क्षेत्र को भी भारी नुकसान हुआ था। स्कूल कॉलेज अब नित्य अपने समय से खुल रहे है और स्टूडेंट्स अब करियर के साथ साथ खेलो में भी आगे बढ़ रहें है।
मुख्यधारा की पार्टियाँ, विशेष रूप से नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, अब जनता के बिच में नया स्पेस धुंध रहे है क्योंकि राज्य की विशेष संवैधानिक स्थिति को निरस्त करने के परिणामस्वरूप उनकी पुरानी जो जनता को बरगलाने की नीतिया थी वो ध्वस्त हो चुकी हैं यह राज्य अब केंद्र के अधीन है और आने वाले वक़्त में सायद पूर्ण राज्य के दर्जे की भी सिफारिश की जाये फिलहाल स्थिति पूरी तरह से कंट्रोल में है।

ऐसेही रोचक जानकारी के लिए जुड़े रहिये भाईसाब के साथ ।

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