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मणिपुर विवाद ।

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नमस्कार भाई साब! आज हम बात करेंगे मणिपुर में हुए हिंसा के गंभीर बिषय पे ।यहां हम मणिपुर के इतिहास, भौगोलिक स्थिति और जातीय संरचना के बारे में जानेंगे।
मणिपुर का इतिहास :
मणिपुर का अपना एक प्राचीन एवं समृद्ध इतिहास रहा है और प्राचीन काल में पड़ोसी राज्यों द्वारा मणिपुर को विभिन्न नामों से पुकारा जाता था, जैसे बर्मियों द्वारा ‘कथे’, असमियों द्वारा ‘मोगली’ आदि
यहां के राजवंशों का लिखित इतिहास सन 33 ई. में पाखंगबा के राज्याभिषेक के साथ शुरू होता है। उसके बाद अनेक राजाओं ने मणिपुर पर शासन किया जिनमे से प्रमुख नाम महाराज कियाम्बा, खागेम्बा, गरीबनिवाज, जयसिंह, जैसे शासको का है । 24 अप्रैल, 1891 को यहाँ खोंगजोम युद्ध हुआ जिसे अंग्रेज-मणिपुरी युद्ध बोला जाता है इस युद्ध में मणिपुर के वीर सेनानी पाउना ब्रजबासी ने अंग्रेजों के हाथों से अपने मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की। इस प्रकार 1891 में मणिपुर ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया और 1947 में शेष देश के साथ स्वतंत्र हुआ।
1947 में जब अंग्रेजों ने मणिपुर छोड़ा तब से मणिपुर का शासन महाराज बोधचन्द्र के कन्धों पर पड़ा। 21 सितम्बर 1949 को हुई विलय संधि के बाद 15 अक्टूबर 1949 से मणिपुर भारत का अंग बना।

मणिपुर का राजनितिक इतिहास:
21 जनवरी, 1972 को मणिपुर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला और 60 निर्वाचित सदस्यों वाली विधानसभा गठित की गई जो 19 अनुसूचित जनजाति और 1 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और मणिपुर राज्य लोकसभा में दो और राज्यसभा में एक संसद का प्रतिनिधित्व भी करता है।

मणिपुर की भौगोलिक स्थिति:
मणिपुर की भौगोलिक स्थिति दर्शनीय है यहां के उत्तरी तथा पूर्वी इलाकों में ऊँची पहाडियाँ है जो पुरे राज्य के इलाके का 90% है और मध्य भाग में मैदानी समतल है जो मात्र 10% है । यहाँ हर पहाड़ के बीच में कोई न कोई नदी बहती हैं और इम्फाल नदी यहाँ की प्रमुख नदी है। मणिपुर को देश की ‘ऑर्किड बास्केट’ भी कहा जाता है। यहाँ ऑर्किड पुष्प की 500 प्रजातियां पाई जाती हैं। समुद्र तल से लगभग 5000 फीट की ऊँचाई पर स्थित शिरोइ पहाड़ियों में एक विशेष प्रकार का पुष्प शिरोइ लिली पाया जाता है। शिरोइ लिली का यह फूल पूरे विश्व में केवल मणिपुर में ही पैदा होता है।

मणिपुर की जातीय संरचना :
मणिपुर के समतल इलाको में मैतई समुदाय का प्रभुत्व है जो हिन्दू धर्म को मानते है और इनको आरक्षण में OBC EWS और SC का दर्जा प्राप्त है , जनसँख्या के दृष्टिकोण से वे राज्य में 64% है वही पहाड़ी इलाकों में 35% दर्जा प्राप्त जनजातियां रहती है जिनको नागा या कुकी जनजाति में वर्गीकृत किया गया है इनको आरक्षण व्यवस्था में ST केटेगरी में रखा गया है और ये ईसाई धर्म को मानते है और अन्य इस्लाम बुद्धिज़्म और सिखिस्म को मानाने वाले लोग है । मणिपुर के विधान सभा में टोटल 60 सीटें है जिसमे से 40 सदस्य केवल मैतई लोग प्रदान करते बाकि के 20 सदस्य नागा एवं कुकी जनजातियों द्वारा विधान सभा में आते हैं ।
हिंसा का कारण :
नागा एवं कुकी जनजातियों द्वारा मैतेई समुदाय को समृद्ध माना जाता है और मैतेई समुदाय को भी अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की 10 वर्ष पुरानी अनुशंसा पर आगे की कार्रवाई करने के लिए मणिपुर उच्च न्यायालय द्वारा राज्य सरकार को दिए गए निर्देश के बाद मणिपुर में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई।
हाई कोर्ट के इस कदम के विरोध में अखिल जनजातीय छात्र संगठन मणिपुर द्वारा ‘जनजाति एकजुटता रैली’ आयोजित किये जाने के बाद इस हिंसा को और बढ़ावा मिला ।नागा एवं कुकी जनजातियों का ये मानना है की मैतई समुदाय को ST आरक्षण दर्जा मिलने के बाद उनको मिलने वाले अधिकार छिन जाएंगे और पहाड़ी इलाकों में भी मैतई समुदाय का वर्चस्व होगा जिस से उनका अस्तित्व खतरे में आ जायेगा ,ये जातिवादी हिंसात्मक घटनाये तो मणिपुर में दसकों से है लेकिन हाल के दिनों में उच्चन्यायालय के दिए गए आदेश के बाद से मणिपुर के ८ जिले हिंसा की आग में जलने लगे इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गयीं और आसाम राइफल्स के जवान तैनात किये गए हैं जिनको राज्य सरकार द्वारा आदेश दिया गया था प्रदर्शन करियों को देखते ही गोली मार दी जाये ।
ऐसेही और जानकारी के लिए जुड़े रहिये भाईसाब के साथ ।

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