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लाइब्रेरी बिज़नेस ।

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गोरखपुर में तो व्यवसाय का अपार संभव है लेकिन इन दिनों की बात करें तो स्टूडेंट्स के लिए लाइब्रेरी का बिज़नेस अच्छा फल फूल रहा है। वैसे तो भारत में पुस्तकालयों का चलन तो बहुत पुराना है लेकिन वर्ष 1954 के बाद से भारत के कलकत्ता, चेन्नई, मुंबई और दिल्ली इन चार शहरों में में नेशनल लाइब्रेरी ऑफ़ इंडिया खुले। इसके बाद ही भारत में लाइब्रेरी का चलन शुरू हुआ।
शुरुआत में तो इन पुस्तकालयों में भारत सरकार द्वारा प्रकाशित होने वाली पुस्तकें, मैगज़ीन और मैनुअल रखे जाते थे। धीरे धीरे इनमे किताबों को संग्रह किया गया और आम जनता के लिए खोला गया। इस मॉडर्न और मोबाइल के दौर में भी ये लाइब्रेरी जीवंत है और पुस्तक प्रेमी लोग आज भी जा कर इन पुस्तकालयों से ज्ञान का भण्डार इकट्ठा कर रहे है ।गोरखपुर में पंचकुइयां चौराहा स्थित राजकीय जिला पुस्तकालय सरकार द्वारा वर्ष 1956 में स्थापित किया गया था। जो आज भी सुबह 9 बजे खुलता और शाम को 5 बजे बंद होता है। उत्तर प्रदेश में पुस्तकालय की किताबों को ऑनलाइन उपलब्ध करवाने के लिए E-ग्रंथालय नाम से एक अभियान भी चलाया गया है। गोरखपुर के अलग अलग कॉलेज और स्कूलों में भी लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध है लेकिन गोरखपुर विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी भी ख़ास है जहा सैकड़ो विद्यार्थी पढ़ते और किताबें मुहैया करवाते है।लेकिन प्राइवेट लाइब्रेरी के व्यवसाय का चलन इन दिनों खूब बढ़ा है जिस के अंतर्गत स्टूडेंट्स को एक शांत माहौल दिया जाता है पढ़ाई के लिए और बाकी अन्य सुविधाएँ जैसे कम्फर्टेबल बैठने की व्यवस्था, डेस्क, एक, अख़बार और पुस्तकें लिब्ररियन द्वारा दिया जाता है जिसका एक मंथली शुल्क निर्धारित रहता है । यह व्यवस्था दूर दराज से अपने सपनो को पूरा करने के लिए आये हुए विद्यार्थियों के लिए काफी अच्छा है और गोरखपुर जैसे शहर के लिए ये बिल्कुल नया आईडिया जैसा है जो विद्यार्थियों को खूब लुभा रहा। अगर आप भी लाइब्रेरी का बिज़नेस खोलना चाह रहे है तो सबसे पहले सरकारी लाइसेंस, अच्छा लोकेशन, स्टूडेंट्स के लिए अच्छी व्यवस्था और बेहतर मार्केटिंग का ध्यान रखना होगा।

ऐसेही महत्वपूर्ण जानकारी के लिए जुड़े रहिये भाईसाब के साथ।

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