Home Dharohar कुशीनगर: बुद्धा महापरिनिर्वाण स्थल | Kushinagar |

कुशीनगर: बुद्धा महापरिनिर्वाण स्थल | Kushinagar |

by bs_adm_019
0 comment

हम कौन है? हमारे अस्तित्व का अर्थ क्या है? हम इस विशाल संसार के तुच्छ प्राणी है, जो इस हड़बड़ी की दुनिया में अपने मन की शान्ति खोज रहे है। ऐसी अवस्था जहाँ आप संसार के मोह से मुक्त हो जाए, उसे निर्वाण कहते है और इसी निर्वाण की खोज में दुनिया भर के लोग कुशीनगर, उत्तर प्रदेश, पहुँच जाते है।

तो आइये जानते है की आखिर ऐसी क्या ख़ास बात है उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में, नमस्कार भाई साब!

कुशीनगर:
कुशीनगर का नाम श्री राम के पुत्र कुशा के नाम पर पड़ा है, जिन्होंने शहर की स्थापना की और उस पर शासन किया। कुशीनगर का एक समृद्ध इतिहास है और इस पर विभिन्न साम्राज्यों ने शासन किया है, जिनमें मौर्य, शुंग, कुषाण, गुप्त और मुगल साम्राज्य शामिल हैं।
यह शहर अपने हस्तशिल्प के लिए भी जाना जाता है, जिसमें पीतल के बर्तन, टेराकोटा और लकड़ी का काम शामिल है।

banner

कुशीनगर की ख्याति बौद्ध तीर्थस्थल के रूप में है जहां गौतम बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ था सीधे शब्दों में कहें तो जीवन से मुक्ति।
बुद्ध एक आध्यात्मिक गुरु थे, जिन्होंने जीवन का असली मतलब खोज निकाला था। उनके उपदेश जीवन के साथ-साथ आध्यात्मिकता और शांति से जीने की एक विशेष तकनीक हैं। उन्होंने धर्म की नई शिक्षाओं का विकास किया जो लोगों के दुःख से निजात दिलाते हैं। उनके उपदेशों के आधार पर बौद्ध धर्म विकसित हुआ जो आज भी दुनिया भर में लोगों द्वारा अनुसरण किया जाता है।
बुद्धा महापरिनिर्वाण एक विशेष दिन है जब दुनिया भर के बौद्ध गौतम बुद्ध के जन्म, मोक्ष और निधन की घटनाओं का जश्न मनाते हैं वैसे गौतम बुद्ध को मोक्ष प्राप्त करने वाला पहला ज्ञात व्यक्ति बताया गया है। और एहि कारण है की उनको विष्णु देव का नौवा अवतार माना जाता है।

बुद्धा के जन्म यानि बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर कुशीनगर में एक महीने तक मेला लगता है। इस मेले में आसपास के लोग पूरी श्रद्धा के साथ भाग लेते हैं और विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं।

कुशीनगर का महापरिनिर्वाण मंदिर अपनी 6.10m लम्बी बुद्धा की मूर्ति के लिए विख्यात है जो बलुआ पत्थर के एक ही खंड से बनाई गई है।
मान्यता है कि जब उनके शरीर का अंतिम संस्कार किया गया, तब उनकी राख को आठ भागों में विभाजित किया गया था। उसमे से एक भाग यहां के मंदिर में जमा किये गए थे।

यहाँ का जापानी मंदिर एक देखने लायक पर्यटन स्थल है। मंदिर में भगवान बुद्ध की एक भव्य ‘अष्ट धातु’ की मूर्ति है, जिसे जापान देश से टुकड़ों में आयात किया गया था मंदिर में गोलाकार आकार में एक एकांत कक्ष मौजूद है, जिसमें मंत्रमुग्ध कर देने वाली कांच की खिड़कियों के माध्यम से भगवान बुद्ध की एक सुनहरी तस्वीर देखी जा सकती है।

वाट थाई मंदिर:
कुशीनगर के सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक, यह वाट थाई मंदिर पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में एक अनूठा मंदिर है। इस मंदिर की ख़ास बात है की यहां बुद्धा के अस्थियों को बुलेटप्रूफ दरवाजे के अंदर रखा गया है, वर्ष 2001 में इस संरचना को जनता की नज़रों के लिए खोल दिया गया।

चीनी मंदिर:
यह स्थान कुशीनगर का एक और लोकप्रिय स्थल है। मंदिर की अनूठी स्थापत्य शैली, जो ‘हान चीनी’ शैली को दर्शाती है। मंदिर का बाहरी पैटर्न वास्तुकला की चीनी और वियतनामी शैलियों के मिश्रण को दर्शाता है। मंदिर में चीनी बुद्ध की एक शानदार मूर्ति है।

निर्वाण स्तूप:
कार्लाइल ने इस संरचना की खोज वर्ष 1876 में की थी। इस मूर्ति की ऊंचाई 2.74 मीटर है। इस स्थान पर तांबे से बना एक बर्तन खुला हुआ था। बर्तन पर पुरातन ब्राह्मी में शब्द लिखे हुए थे, जिससे पता चलता है कि यहां भगवान बुद्ध के अवशेष रखे गए हैं।

मथाकुअर तीर्थ:
निर्वाण स्तूप से मंदिर की दूरी 400 गज है। यहां की गई खुदाई में ‘बोधि वृक्ष’ के नीचे ‘भूमि स्पर्श मुद्रा’ में भगवान बुद्ध की एक आकृति मिली। यह आकृति पत्थर से बनी है। चित्र पर लिखावट 10वीं शताब्दी से 11वीं शताब्दी के बीच की अवधि की संरचना के अस्तित्व का संकेत देती है।

रामाभार स्तूप:
रामाभार स्तूप और महापरिनिर्वाण मंदिर की दूरी मात्र 1.5 किलोमीटर है। इस स्तूप की ऊंचाई 15 मीटर है। यह मंदिर उस स्थान को इंगित और प्रतीक करता है जहां भगवान बुद्ध का दाह संस्कार हुआ था।

बुद्धा के निर्वाण के पल:
बौद्ध ग्रंथ महापरिनिब्बाण सुत्त के अनुसार, 80 वर्ष की आयु में हुई भगवान बुद्ध की मृत्यु को मूल महापरिनिर्वाण माना जाता है।
बुद्ध के महापरिनिर्वाण का प्रतीक पदचिह्न है, जो बुद्ध को इस दुनिया से अंतिम रूप से निर्वाण के दायरे में जाने का प्रतिनिधित्व करता है।

बुद्धा के नाम पर कुशीनगर में बुद्ध स्नातकोत्तर कॉलेज, बुद्ध इंटरमीडिएट कॉलेज कई छोटे स्कूल और हॉस्पिटल भी हैं हैं। भोजपुरी यहाँ की लोकप्रिय बोले जाने वाली भाषा है। और सबसे बड़ी बात यहां का अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा जिसका ऑपरेशन वर्ष 2021 में ही शुरू हो गया था
कुशीनगर शहर के पूर्व की ओर लगभग 20 किमी की दूरी पर बिहार राज्य शुरू होता है। जो बौद्ध भिक्षुओं को गया जाने का एक सुगम मार्ग है
कुशीनगर जिला ऐसे महान प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति का साक्षी रहा है।

आप अपने कुशीनगर घूमने के अनुभव को कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं ।
धन्यवाद!

You may also like

bhaisaab logo original

About Us

भाई साब ! दिल जरा थाम के बैठिये हम आपको सराबोर करेंगे देशी संस्कृति, विदेशी कल्चर, जलेबी जैसी ख़बरें, खान पान के ठेके, घुमक्कड़ी के अड्डे, महानुभावों और माननीयों के पोल खोल, देशी–विदेशी और राजनीतिक खेल , स्पोर्ट्स और अन्य देशी खुरापातों से। तो जुड़े रहिए इस देशी उत्पात में, हमसे उम्दा जानकारी लेने और जिंदगी को तरोताजा बनाए रखने के लिए।

Contact Us

Bhaisaab – All Right Reserved. Designed and Developed by Global Infocloud Pvt. Ltd.