Home Dharohar आधुनिकता और पुरातनता का अनूठा संगम : | Kashi-Banaras-Varanasi |

आधुनिकता और पुरातनता का अनूठा संगम : | Kashi-Banaras-Varanasi |

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भाईसाब, क्या आपको पता है, दुनिया की सबसे प्राचीन नगरी ‘काशी’ का सौंदर्य अब देखते ही बनता है। ‘काशी’ को वाराणसी, बनारस के नाम से दुनियाभर में जाना जाता है। इसे भारत की धार्मिक राजधानी भी कहा जाता है क्योंकि यहां कि आध्यात्मिकता इतनी पुरानी है कि देवता भी इसके दर्शन कर अपने को धन्य समझते हैं. इसे देवताओं का महानगर भी कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी. पहले जहां यहां के ‘घाटों’ पर गंदगी का आलम हुआ करता था वहीं अब इन ‘घाटों’ की सफाई देखते ही बनती है। ये घाट अब सुविधाओं की नई गाथा लिख रहे हैं और सैलानियों को अपनी ओर खींच रहे हैं।

– काशी विश्वनाथ कॉरिडोर 5 लाख स्‍कवॉयर फीट में बना है और ये रिकार्ड 21 महीनों में तैयार हुआ है। इसके निर्माण की कुल लागत 900 करोड़ रुपये है।
– मंदिर परिसर को भूकंप और भूस्खलन से बचाने के लिए पत्थरों को पीतल की प्लेटों से जोड़ा गया है।
– कोई भी भक्त गंगा व्‍यू गैलरी से बाबा विश्वनाथ और गंगा की अविरल धारा के दर्शन कर सकता है।
– मंदिर से गंगा घाट तक 10 से 15 मीटर चैड़ा पाथ-वे का निर्माण ।
– स्मार्टसिटी प्रोजेक्ट के तहत 5 पार्कों को थीम के आधार पर विकसित किया जा रहा है।
– प्रधानमंत्री मोदी ने बीते 9 वर्षेां में 51 हजार करोड़ से ज्यादा की 500 से अधिक विकास योजनाओं की सौगात दी है।
– गंगा में एकसाथ 4 क्रूज पर सैलानी गंगा की लहरों में पर्यटन का लुत्फ उठा रहे हैं।
– बनारस की गलियां भी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत स्मार्ट हो गईं हैं. गली की सभी दीवारों पर खूबसूरत पेंटिंग बनाई गई हैं. गलियों को संवारने के लिए चुनार के पत्थर भी लगाए गए हैं।

– मान्यताओं के अनुसार वाराणसी नाम का उद्गम संभवतः यहां की दो स्थानीय नदियों वरुणा नदी एवं असि नदी के नाम से मिलकर बना है। ये नदियाँ गंगा नदी में क्रमशः उत्तर एवं दक्षिण से आकर मिलती हैं। वहीँ सबसे प्राचीन वेद ऋगवेद में काशी नाम से बुलाया गया है वहीं स्कंद पुराण के काशी खण्ड में इस नगर की महिमा कई श्लोकों द्वारा की गयी है।
– पौराणिक कथाओं के अनुसार, काशी नगर की स्थापना हिन्दू भगवान शिव ने लगभग 5000 वर्ष पूर्व की थी जिसके कारण यह महानगर भगवान शिव के द्वादस ज्योतिर्लिंगों में भी शामिल है. पवित्रता की प्रतिक मां गंगा यहां मानो भगवान शिव के जटाओं से निकल रही हो और लाखों श्रद्धालुओं के पापों को धुलते हुए इस शहर को हज़ारों सालों से मनोरम बना रही है.
– काशी विश्वनाथ मंदिर हजारों वर्ष पुराना है। यहां कई बार आक्रमण भी हुए. उसके बावजूद आज भी यहां भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना होती है। मंदिर के नए स्वरूप का निर्माण महारानी अहिल्या बाई होल्कर ने 1780 में करवाया था। बाद में महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर में 1000 किलोग्राम सोना सोना दान दिया था. काशी में स्थित शिवलिंग को भगवान विश्वेश्वर भी कहा जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ ब्रह्मांड के भगवान.
– वाराणसी में माँ गंगा की पवित्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश ही दुनियाभर के लोग यहां अपने पित्रों की मुक्ति के लिए आते हैं. इसलिए माँ गंगा को मोक्षदायनी कहा जाता है जो सारे पापो का हरण कर के मोक्ष दिलाती है और मृत आत्मा को शांति मिलती है.
– ‘मां गंगा’ की इठलाती धारा मानो जगजीवन को आमंत्रण दे रही हो कि ‘आओ…मेरे ममता की आंचल में ‘आध्यात्म’ का चरम सुख पाओ…’ स्‍कंदपुराण के अनुसार काशी नाम ‘काश्‍य’ शब्‍द से बना है, जिसका अर्थ प्रकाश से है, जो मोक्ष की राह को प्रकाशित करता है। ‘शिव’ की शक्ति से ओतप्रोत ‘काशी’ की खास विशेषता है कि यह नगरी श्रद्धालुओं को एक पल में मोक्ष प्रदान कर देती है। यह नगरी आध्यात्मिक जागृति चाहने वालों का राह दिखाती है।
– दुनियाभर से आस्थावान दशाश्वमेध घाट पर शाम की आरती देखने आते हैं और अपने पापों को धोने के लिए गंगा के पवित्र जल में डुबकी लगाते हैं। वहीं काशी विश्वनाथ धाम का भव्य स्वरूप निखरकर सामने आ गया है।
– लेकिन भाईसाब, अब काशी की कायपलट हो गई है. पहले बनारस अपनी पतली गलियों के लिए भी जाना जाता था। यहां मंदिर तक जाने के लिए पतली और संकरी गालियां थीं, लेकिन अब यहां भव्य कॉरिडोर का निर्माण करा दिया गया है, जिसका एक गेट सीधे मां गांगा के तट से जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 9 वर्षेां में 51 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की 500 से अधिक विकास योजनाओं की सौगात काशीवासियों को दी है। इससे काशी विकास की नई ऊंचाइयों को छूने लगी हैं। विकास का नया मॉडल बनकर उभरी है।
– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इस संसदीय क्षेत्र को विश्व फलक पर चमकाने जो बीड़ा उठाया था अब वह साकार रूप ने रहा है। दुनियाभर के पर्यटकों के लिए ‘काशी’ अब पहली पसंद बनती जा रही है।
– पब्लिक ट्रांसपोर्ट के रूप में रोपवे चलाने वाला देश के पहले शहर के रूप में काशी न केवल पर्यटकों को रिझा रही है बल्कि यहां रहने वालों की सुविधाओं में भी चार चांद लगा रही है। विकास के पंख लगने के कारण अब इस धर्मनगरी में आधुनिकता और पुरातनता का अनूठा संगम देखने को मिला है।
– यहां की सिग्नेचर बिल्डिंग और उस पर स्काई वॉक काशी के विकास की कहानी गढ़ रहे हैं। गंगा में एकसाथ 4 क्रूज दुनियाभर के सैलानियों को गंगा की लहरों में आध्यात्म के साथ पर्यटन का लुत्फ दिला रहे हैं।
– मंडु़वाडीह फ्लाईओवर, कनवेंशन सेंटर सहित कई सौगात यहां के लोगों को मिल चुकी हैं। ऊर्जा गंगा पीएनजी परियोजना, रिंग रोड फेज-1, बाबतपुर-वाराणसी फोर लेन, आईपीडीएस, कबीरचौरा के पास हेरिटेज वॉक सहित कई काम पूरे हो चुके हैं। कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं भी नई विकास की गाथा गढ़ रही हैं।
– काशी विश्वनाथ कॉरिडोर वाराणसी के लिए सबसे बड़ी सौगात रही है। कॉरिडोर काशी विश्वनाथ मंदिर, मणिकर्णिका घाट और ललिता घाट के बीच 25,000 स्‍क्‍वायर वर्ग मीटर में बन कर खड़ा है। इसके तहत फूड स्ट्रीट, रिवर फ्रंट समेत बनारस की तंग गलियों का चौड़ीकरण का काम लगभग पूरा होने जा रहा है। अब मुख्य मार्ग से बाबा विश्वनाथ के शिखर के दर्शन-पूजन में आने वाली बाधाओं को दूर कर दिया गया है।
– मंदिर से गंगा घाट तक 10 से 15 मीटर चैड़ा पाथ-वे का निर्माण कराया जा रहा है। घाटों का सौंदर्यीकरण और स्मार्ट सिटी के तहत कई परियोजनाएं ‘काशी’ के विकास को चार चांद लगा रही हैं। यह शहर अब पूर्वांचल का बिजनेस हब भी बना गया है।
– रोड से लेकर ट्रीटमेंट प्लांट, नेक्स्ट जेनरेशन इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर ट्रांसपोर्ट सुविधाएं और बाबा विश्वनाथ मंदिर के आस-पास गलियारे का निर्माण और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए भवनों का कायाकल्प बनारस की जरूरत और शोहरत दोनों को पूरा करता है।
– स्मार्टसिटी प्रोजेक्ट के तहत 5 पार्कों को थीम के आधार पर विकसित किया जा रहा है। सेल्फी थीम पर शास्त्री नगर पार्क, गुलाबबाड़ी की तर्ज पर गुलाब बाग पार्क, सौर ऊर्जा पर आधारित मच्छोदरी पार्क और शेड एंड लाइट शो की थीम पर रवींद्रपुरी पार्क का विकास कराया जाएगा।
– वहीं रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में स्टील के 108 रुद्राक्ष के दाने लगाए गए हैं। सनातन परंपराओं के मुताबिक रुद्राक्ष की माला में 108 दाने होते हैं।
– भाईसाब आशा करते हैं कि काशी नगरी की जानकारी आपको पसंद आयी होगी… ऐसे ही उम्दा और ज्ञानवर्धक जानकारी के लिए भाईसाब के साथ जुड़े रहे…धन्यवाद!

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