Home Dharohar आकर्षण का केंद्र बना ‘कारसेवकपुरम’ | ‘Karsevakpuram’ becomes the Center of Attraction!

आकर्षण का केंद्र बना ‘कारसेवकपुरम’ | ‘Karsevakpuram’ becomes the Center of Attraction!

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'Karsevakpuram' becomes the Center of Attraction!

भाईसाब, अयोध्या अब राममय हो गई, हर ओर राम नाम का उल्लास है, आपको बताना जरूरी है कि राम मंदिर के बनकर तैयार होने से पहले के संघर्षों को अगर याद किया जाए, तो उसमें एक अध्याय जुड़ता है, कारसेवा का, भाईसाब नई पीढ़ी को जानना जरूरी है कि कारसेवकों ने किस तरह से राम मंदिर बनाए जाने का संकल्प लेकर कारसेवा की थी, जब कारसेवा का दौर अयोध्या में चल रहा था उस समय सरयू नदी के तट पर वर्तमान में बसे कारसेवकपुरम में लोगों ने आश्रय लिया था, एक समय था जब यह क्षेत्र सरयू का तट हुआ करता था, अमरूद के बाग और जंगल हुआ करता थे, यहीं पर रहकर कारसेवक अपना संघर्ष कर रहे थे, आप जान लें कि 1990 में राम मंदिर आंदोलन के समय अमरूद के बाग और जंगलों के बीच में हजारों की संख्या में कारसेवकों ने यहां आश्रय लिया था, रेत में, थोड़ा बहुत पानी में कष्ट सहते हुए कई-कई दिनों तक वे लोग रुके रहे।

अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद का गढ़ और श्री राम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन का संचालन केंद्र अगर कोई है तो वह कारसेवकपुरम है, मगर क्या आपको पता है कि पंचकोसी परिक्रमा के किनारे स्थित इस भूखंड का नाम कारसेवकपुरम कैसे और क्यों रखा गया ? इसकी भी एक दिलचस्प कहानी है, भाईसाब हम आपको बताते हैं जहां पर आज बिल्डिंग और मैदान हैं कभी वहां दलदल और बड़े-बड़े जंगली पेड़ हुआ करते थे, यही कारण था कि कोई भी वहां छुप जाए तो उसे ढूंढना आसान नहीं होता था,1990 में जब राम मंदिर आंदोलन के तहत विश्व हिंदू परिषद के आवाहन पर कार सेवा के लिए कारसेवक आये तो उस समय उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार नहीं थी, इसीलिए जब पुलिस ने कारसेवकों पर सख्ती की और उनकी धरपकड़ होने लगी तब इन्हीं पेड़ों और झुरमुटो में कारसेवक छुप गए थे, इसके आसपास की मिट्टी दलदली हुआ करती थी, इसलिए भीतर तक जाकर किसी को खोजना मुश्किल कार्य था, यही कारण था कि बड़ी संख्या में यंहा कारसेवक छुपकर पुलिस की पकड़ से दूर रह पाए थे, इसी के बाद इस भूखंड को विश्व हिंदू परिषद ने खरीद लिया और विहिप के तत्कालीन संरक्षक और मार्गदर्शक मंडल के सदस्य मोरोपिण्डली ने कारसेवकों की याद में इस भूखंड का नाम ‘कारसेवकपुरम’ रखा। भाईसाब 1990 के मंदिर आंदोलन में कई कारसेवक घायल हुए थे तो कुछ शहीद भी हो गए थे,जिसके चलते राममंदिर के लिए कारसेवा करने वाले कारसेवकों के लिए हिन्दू सेंटीमेंट उफान पर था, इसीलिए कारसेवकपुरम में शहीद हुए कारसेवकों के चित्र भी लगाए गए हैं और उन चित्रों के नीचे उनका परिचय भी लिखा हुआ है। भाईसाब, आपको मालूम होना चाहिए कि विश्व हिंदू परिषद द्वारा यह भूखंड खरीदे जाने के बाद पहले भजन कीर्तन शुरू हुआ और उसके बाद राम मंदिर आंदोलन का केंद्र बिंदु यही स्थान बन गया जहां से मंदिर आंदोलन की रणनीति तय हुई और कारसेवकों के लिए सुरक्षित पनाहगाह भी रही, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के प्रशिक्षण शिविर भी चलने लगे, मंदिर आंदोलन के दौरान कई बार यंहा लाठीचार्ज भी हुआ और धरपकड़ भी हुई, आज कारसेवकपुरम अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद की पहचान बना हुआ है और प्रशिक्षण सत्र का आयोजन होता रहता है, यही वजह है कि आज सैकड़ों लोग रोज यहां मुफ्त भोजन पाते हैं। भाईसाब, एक और खास बात आपको बताना जरूरी है, वह है, कारसेवकपुरम में निरंतर चल रहे एक भंडारे के बारे में, बता दें कि इस भंडारे का आयोजन राम मंदिर के निर्माण में लगे श्रमिकों, मजदूरों आदि के लिए किया जा रहा है, हैरानी की बात है कि साल 2020 से इस भंडारे का संचालन हो रहा है, हर दिन यहां पर हजारों लोगों का भोजन बनता है, अलग-अलग राज्यों और जिलों से जत्था यहां खाना बनाने आता है, लगभग 1500 लोग रोज कारसेवकपुरम में खाना खाते हैं, इस काम में लगभग 75 लोग लगे हुए हैं, जबकि रसोइया अलग से कार्य कर रहे हैं।

चलते-चलते आपको पता होना चाहिए कि एक लंबा वनवास झेलते के बाद अब रामलला अपने गर्भगृह में स्थापित हो चुके हैं। अयोध्या सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व का उत्कृष्ट शहर बनने जा रहा है, जैसे-जैसे अयोध्या का वैभव बढ़ रहा है, वैसे-वैसे भारत का भी वैभव बढ़ रहा है। वहीं ‘कारसेवकपुरम’ भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, 90 के दशक में राम मंदिर आन्दोलन का केन्द्र रहा कारसेवकपुरम अब रामनगरी के दर्शनीय स्थलों में शुमार हो गया है।

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