Home Latest क्या विश्व- युद्ध 3 का हैं आगाज? | Israel Palestine War |

क्या विश्व- युद्ध 3 का हैं आगाज? | Israel Palestine War |

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7 अक्टूबर 2023 की सुबह जब इसराइल के लोग सुक्कोत नाम के एक त्यौहार की खुशिया मन रहि थी,उसी दौरान हमास जो की एक आतंकवादी संगठन है उसने इसराइल के खिलाफ एक ऑपरेशन लॉन्च किया जिसका नाम था ‘ अल-अक़्सा स्टॉर्म ‘ । जिसके तहत हमास इसराइल पे 20 मिनट में लगभग 5000 राकेट दाग दिए। इसराइल के शहरी इलाको में हमास द्वारा हथियार के साथ पैराट्रूपर्स उतारे गए , उधर रिम किबुत्तज में सुक्कोत त्यौहार के लिए एक म्यूजिक फेस्टिवल का भी आयोजन था जोकि ग़ज़ा इसराइल बॉर्डर के पास एक रेगिस्तान जैसा जगह है। वहां से हमास के आतंकी बॉर्डर की दिवार तोड़कर घुसे और इस म्यूजिक फेस्टिवल में आयी महिलाओ को बंधक बनाया और लगभग 250 लोगो को मौत के घाट उतार दिया। जो पैराट्रूपर्स शहर में घुसे हुए थे उन्होने छोटे बच्चो को बंधक बनाया और जो इनको रस्ते में मिला उनका या तो सर कलम कर दिया या गोली मार दी। जिसके जवाब में इसराइल ने अब ऑपरेशन ‘आयरन स्वॉर्ड’ लांच किया है और हमास को नेस्तनामुद करने की चेतवानी दे दी है।

जानते है इतिहास के बारे में ,
धर्म ग्रंथो से संदर्भ लिया जाये तो, ज़ीउस या यहूदी धर्म का जिक्र सबसे पहले बाइबल में आता है और इनके रहने की जगह जेरुसलम में है जो की फिलिस्तीन में है और वही क़ुरआन में तो कई दफा इस धर्म का जिक्र है जो उस वक़्त वर्तमान के फिलिस्तीन वाले जमीन पर रहा करते थे। फिलिस्तीन को इतिहास की किताबो में एक ‘कबीला’ बोला गया है जिसको ‘कनानी’ बोलते थे। और जब इस्लाम का प्रसार हुआ तो यहूदी लोगो को इस कनानी कबीले द्वारा प्रताड़ना झेलना पड़ा और इनको मजबूर किया गया की या तो इस्लाम कबूल करो या यह जमीन छोड़ कर यह से चले जाओ। आखिरकार यहूदी अपनी धरती छोड़कर चले गए और जा कर यूरोप के अलग अलग देशो जैसे की फ्रांस ,जर्मनी ,इंग्लैंड में जा कर बस गए। यहूदी लोगो की सबसे ख़ास बात यह होती की ये बहुत कर्मठी होते और जहा भी रहते है वहां इकनोमिक प्रोस्पेरिटी बना के रखते है इसी प्रकार ये जिस देश में रहे वहां इन्होने अपनी मेहनत से पैसे कमाए और नाम भी जिस से उस देश के चलाने वालों और छोटे व्यवसाइयों को असुरक्षा होने लगती थी । वही 18वी शताब्दी के मध्य में दौर आया औद्योगिक विकास का जिसमें मानव कार्यो को अब मशीने करना शुरू कर दी थी और इस विकास में अमीर होने के नाते यहूदियों ने अपने पैसे भी इन्वेस्ट किये थे । इस इन्वेस्टमेंट की वजह से इनकी आमदनी में भरपूर इज़ाफ़ा हुआ पर यूरोप में इनके साथ दिक्कत तब शुरू हुआ जा यूरोप में राष्ट्रवाद पनपा जैसे की भारत में वर्ष 2014 के बाद से राष्ट्रवाद का दौर चला और उस दौरान यहूदियों को महसूस हुआ की उनका भी एक होम लैंड होना चाहिए जिसके लिए उन्होंने 1896 में बासेल स्विट्जरलैंड में एक मूवमेंट का गठन Theodor Herzl के नेतृत्वा में किया गया इस मूवमेंट में यह तय हुआ की जो यहूदी पैसे वाले हैं वह फिलिस्तीन में जाकर जमीन खरीदेंगे और वहां रहना शुरू कर देंगे और जब हमारे पास पर्याप्त जमीन हो जाएगी तब यहां से हम जो गरीब या कम पैसे कमाने वाले यहूदी हैं उनको वहां भेजेंगे और वहां उनको रहने के लिए जगह या पनाह देंगे।
यहूदी लोगो में बहुत यूनिटी यानि एकता होती हैं और ये कभी गरीब पिछड़ा या जात पात की बात नहीं करते हैं जिस से हमको आपको जरूर सीखना चाहिए । थियोडोर हर्ज़्ल द्वारा गठित मोमेंट का नाम रखा गया था ‘ज़िओनिस्म’ यह शब्द मूल रूप से आता हैं ज़िओन शब्द से जिसका मतलब हैं यहूदियों का मंदिर और यह मंदिर हैं फिलिस्तीन में जिसकी बात बाइबल में भी की गयी हैं।
1896 में जब यह सिलसिला शुरू हुआ उस वक़्त फिलिस्तीन तुर्क साम्राज्य का पार्ट था और प्रथम विश्व युद्ध के बाद जब तुर्क साम्राज्य टुटा तब फिलिस्तीन ब्रिटेन के अधीन आ गया , उधर फिलिस्तीन में यहूदियों की संख्या बढ़ने लगी जिस से झड़प की स्थिति पनपने लगी और वर्ष था 1920 जब फिलिस्तीन के लोगो ने ब्रिटेन से गुहार लगाया की आप फिलिस्तीन में बढ़ते हुए यहूदियों की संख्या पर रोक लगाए पर ब्रिटेन यह करने में असमर्थ रहा क्योकि की उनको यहूदियों को भी बचाना था जिनसे उनकी औद्योगिक क्रांति चल रही थी।
वहीँ फिलिस्तीन और यहूदियों में अब नरसंहार इस कदर होने लगा की यहूदी अब यूरोप में भी अपने आप को सुरक्षित नहीं समझते थे। एक बार जर्मनी में पूरी यहूदी कम्युनिटी को मार दिया गया जिस से अब सारे यहूदी यूरोप छोड़ कर फिलिस्तीन को ही अपना घर मान कर यहाँ आ कर बसने लगे। यह मार काट और स्थानांतरगमन का सिलसिला 1939 तक चला और इसके बाद द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ जिसके तुरंत बाद यूनाइटेड नेशन का गठन हुआ जिसमे ब्रिटेन ने फिलिस्तीन के कंट्रोल को यूनाइटेड नेशन पर छोड़ दिया जहां फैसला किया गया की फिलिस्तीन को 2 भागो में बांटा जायेगा एक यहूदियों के लिए और एक फिलिस्तीन के लिए और फाइनली मई 1948 में अमेरिका की मदद से इसराइल बना और इसराइल बनते ही 7 अरब देशो ने मिलकर इसराइल पर हमला बोल दिया । फिर 1949 में यूनाइटेड नेशन ने हस्त्क्षेप कर के इस युद्ध पर विराम लगाया।
ऐसेही महत्वपूर्ण जानकारी के लिए जुड़े रहिये भाईसाब के साथ।

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