Home Dharohar UNESCO के विश्व धरोहर सूचि में भारत का शांतिनिकेतन शामिल | Shanti Niketan |

UNESCO के विश्व धरोहर सूचि में भारत का शांतिनिकेतन शामिल | Shanti Niketan |

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यूनेस्को ने अपनी विश्व विरासत सूची में शांतिनिकेतन को शामिल कर लिया है , इसकी सूचना प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्विटर अकाउंट से साझा की अगर हम शांति निकेतन के इतिहास को देखें तो पता चलता है की शांतिनिकेतन की स्थापना रविंद्रनाथ टैगोर के पिता महर्षि देवेंद्र नाथ टैगोर ने की थी जो की एक दार्शनिक थे । 1863 में महर्षि देवेंद्र नाथ टैगोर ने भुबंडांगा में जमीन का एक बड़ा टुकड़ा खरीदा जिसका नाम उन्होंने शांतिनिकेतन रखा जिसका अर्थ है शांति का निवास उन्होंने भूमि पर इस आध्यात्मिक आश्रम की स्थापना की और अपने छात्रों को ब्रह्म समाज के सिद्धांतों के साथ-साथ प्रकृति और सादगी के महत्व के बारे में पढ़ना शुरू कर दिया वैसे भुबंडांगा डकैतों के एक समूह के लिए जाना जाता था जो लोगों की हत्या के लिए कुख्यात थे हालांकि समूह के नेता ने अंतत: देवेंद्र नाथ के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और क्षेत्र को विकसित करने में उनकी मदद की देवेंद्र नाथ ने लंदन में थे ‘ क्रिस्टल पैलेस ‘ से प्रेरित होकर इस स्थान पर ब्रह्म प्रार्थनाओं के लिए 60 फुट और 30 फुट की कांच की संरचना बनावाई । शांतिनिकेतन की स्थापना के बाद रविंद्रनाथ टैगोर पहली बार 1878 में यहां आए थे जब वह 17 वर्ष के थे । वर्ष 1901 में रविंद्र नाथ ने ब्रह्मचर्य आश्रम शुरू किया जो 1925 में पाठ भवन के नाम से जाना गया 1913 में रविंद्र नाथ टैगोर ने साहित्य में नोबेल पुरस्कार जीता 1921 में रविंद्र नाथ टैगोर ने विश्व भारती की स्थापना की जिसे 1951 में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित कर दिया गया । रविंद्रनाथ टैगोर जिनका जन्म 1861 में कोलकाता में हुआ था अपने पिता की शिक्षाओं से बहुत अधिक प्रभावित थे और उन्होंने अपना अधिकांश बचपन शांतिनिकेतन के आश्रम में ही बिताया बाद में उन्होंने लंदन विश्वविद्यालय में अध्ययन किया और एक प्रसिद्ध कवि लेखक और दार्शनिक बन गए ।

1901 में रविंद्र नाथ टैगोर शांतिनिकेतन लौट आए और विश्व भारती विश्वविद्यालय की स्थापना की जो शुरू में भारतीय संस्कृति और परंपराओं के अध्ययन के लिए एक छोटा सा स्कूल हुआ करता था । रविंद्र नाथ टैगोर के आने के बाद शांतिनिकेतन सांस्कृतिक और बौद्धिक गतिविधियों का केंद्र बन गया जिसने दुनिया भर के विद्वानों और कलाकारों को अपनी ओर आकर्षित किया । वह अपने हरे-भरे जंगलों , खेतों और अपने शांतिपूर्ण वातावरण के साथ-साथ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता था । यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान प्रतिरोध का केंद्र भी था इसके कई छात्रों और शिक्षकों ने स्वतंत्रता आंदोलन में अपना योगदान भी दिया था आज शांतिनिकेतन अपने कई सांस्कृतिक संस्थाओं सुंदर प्राकृतिक परिवेश और समृद्धि इतिहास के साथ-साथ एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है ।असल में टैगोर परिवार ने शांति निकेतन की स्थापना एक ऐसे शैक्षिक संस्थान के निर्माण की दृष्टि से की थी जो प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करके छात्रों को उनके द्वारा सीखे जा रहे विषयों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करे, वह इस स्थान की शांति से प्रेरित थे उनका उद्देश्य इसे एक ऐसा शिक्षण स्थल बनाना था जो धार्मिक और क्षेत्रीय बाधाओं से परे हो । शांतिनिकेतन की स्थापना प्राचीन भारतीय गुरुकुल प्रणाली के सिद्धांतों पर की गई थी जहां शिक्षा प्राकृतिक वातावरण में प्रदान की जाती थी जिससे छात्रों और पर्यावरण के बीच एक मजबूत संबंध को बढ़ावा मिल सके । शांतिनिकेतन एक छोटे शहर जैसा है जोकि सद्भाव शिक्षा और रचनात्मकता के आदर्शों का प्रतीक है जोकि इसकी कलात्मक और शैक्षणिक गतिविधियों में परिलक्षित होता है । शांतिनिकेतन के विकास की शुरुआती चरण में सबसे पहले आश्रम, शांतिनिकेतन ग्रह, उपासना मंदिर और प्रार्थना कक्षा जैसी महत्वपूर्ण संरचनाओं का निर्माण हुआ जो महान ऐतिहासिक मूल्य रखते हैं और हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा इसे जनता के लिए खोला गया है। शांतिनिकेतन की स्थापना के पीछे रविंद्र नाथ टैगोर जी का एक उद्देश्य यह भी था कि वह दुनिया भर की विभिन्न संस्कृतियों के लोगों के बीच एकता को बढ़ावा देना चाहते थे जिससे कि संसार में वसुदेव कुटुंबकम चरितार्थ हो सके । टैगोर का मानना था कि खुद को कक्षा में बंद करके शिक्षा हासिल नहीं की जा सकती। एक कलाकार के रूप में उनका यह भी मानना था कि सीखने की प्रक्रिया के लिए किसी के दिमाग को मुक्त करना महत्वपूर्ण है । नतीजतन खुली हवा वाली कक्षाओं की अवधारणा उभरी जो आज भी उसी भावना के साथ जारी है । टैगोर विचार की दो अलग श्रृंखलायेँ जिसमे वे पूर्व की पारंपरिक मान्यताओं और पश्चिम की प्रगतिशील विचारधाराओं के अभिसरण में विश्वास करते थे । गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर की मृत्यु के बाद उनके पुत्र रथीन्द्र नाथ ने शांतिनिकेतन में अपने पिता का कार्यभार संभाला । रविंद्र नाथ टैगोर ने शांतिनिकेतन के विकास के लिए चार प्रकार की योजनाओं की परिकल्पना की थी जिनमें पहले था शांतिनिकेतन स्कूल इसकी स्थापना , दूसरा शिक्षा वेदों के साथ ललित कला व संगीत का एकीकरण, तीसरा ग्रामीण पुनर्निर्माण प्रयोग और चौथा एवं अंतिम हिंदवी संस्कृतियों का अन्य पूर्वी एवं पश्चिमी संस्कृतियों के साथ सांस्कृतिक संबंध । एक महत्वपूर्ण बात यह है के, यदि कोई इमारत या कोई स्थल यूनेस्को की सूची में शामिल हो जाता है तो उसको युद्ध के दौरान स्वतः ही संरक्षण प्राप्त हो जाता है इस प्रकार युद्ध काल में कोई भी देश किसी अन्य देश की ऐतिहासिक धरोहर को नष्ट नहीं कर सकता ‌।
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