Home Mahanubhav ‘रेस कोर्स से दौड़ा-घोड़ा, देवगौड़ा-देवगौड़ा’ | India’s 11th PM – H.D. Deve Gowda

‘रेस कोर्स से दौड़ा-घोड़ा, देवगौड़ा-देवगौड़ा’ | India’s 11th PM – H.D. Deve Gowda

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India's 11th PM - H.D. Deve Gowda

भाईसाब, क्या आपको पता है देश में एक ऐसे प्रधानमंत्री भी हुए हैं जिनके पास महज 46 लोकसभा सीटें थीं, इसके बावजूद उन्हें कांग्रेस समेत 24 दलों का समर्थन प्राप्त था. ये भारतीय राजनीति के इतिहास में सबसे अभूतपूर्व घटना थी. जी हां हम बात कर रहे हैं कर्नाटक के हरदनहल्ली डोडेगौडा देवगौडा की जो भारत के 11वें प्रधानमंत्री हुए हैं. भाईसाब.. एचडी देवेगौड़ा की गिनती उन राजनेताओं में की जाती है जिनकी निचले तबके के लोगों तक अच्छी पहुंच थी। अपने राजनीतिक अनुभव के बदौलत उन्होंने कर्नाटक राज्य की अनेक समस्याओंको निपटाया। आपको बता दें कि जब एचडी देवेगौड़ा ने हुबली के ईदगाह मैदान का मुद्दा उठाया, तब उनकी राजनीतिक विलक्षणता की झलक सभी ने फिर से उनमें देखी थी। यह अल्पसंख्यक समुदाय का मैदान हमेशा से ही राजनीतिक विवाद का मुद्दा रहा था। देवेगौड़ा ने सफलतापूर्वक इस मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकाला था। देवगौड़ा एक मध्यम वर्गीय कृषि परिवार से ताल्लुक रखते हैं और यही वजह है कि उन्होंने किसानों, वंचित और शोषित वर्ग के लोगों को उनका अधिकार दिलाने के लिए आवाज़ उठाई।

भाईसाब, मात्र 20 वर्ष की उम्र में ही सक्रिय राजनीति में हिस्सा लेने वाले एचडी देवेगौड़ा का जन्म 18 मई 1933 को कर्नाटक के हरदन हल्ली ग्राम हासन के ताकुमा में हुआ था. आपको बता दें कि उनके परिवार में पत्नी चेनम्मा और 4 पुत्र एवं 2 पुत्रियां हैं। सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्राप्त करने के बाद उन्होंने राजनीति में भाग लेना आरंभ कर दिया था। उनके पिता का नाम डोड्डे गौड़ा व माता का नाम देवम्मा था। भाईसाब आपकी जानकारी के लिए ये बताना जरूरी है कि 1953 में वह कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए और 1962 तक इसी पार्टी के सदस्य बने रहे। 1962 में वह कर्नाटक विधानसभा के सदस्य बन गए। मार्च 1972 से मार्च 1976 तक और नवंबर 1976 से दिसंबर 1977 तक विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने ख्याति अर्जित की। हासन लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से 1991 में वह सांसद के रूप में चुने गए। 1994 में राज्य में जनता दल की जीत के सूत्रधार ये ही थे। जनता दल के नेता चुने जाने के बाद वे 11 दिसंबर 1994 को कर्नाटक के 14वें मुख्यमंत्री बने। भाईसाब, इसे देवेगौड़ा की किस्मत ही कहा जाना चाहिए कि वे मुख्यमंत्री पद से सीधे प्रधानमंत्री पद पर पहुंच गए थे। बात यह थी कि 31 मई 1996 को अटलजी की सरकार के अल्पमत में होने के कारण उन्होंने प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था। उसी के अगले दिन 1 जून 1996 को तत्काल में 24 दलों वाले संयुक्त मोर्चे का गठन कांग्रेस के समर्थन से किया गया और देवेगौड़ा को संयुक्त मोर्चे का नेता घोषित कर दिया गया और वे प्रधानमंत्री नियुक्त हो गए। लेकिन कांग्रेस की नीतियों के मनोनुकूल नहीं चल पाने के कारण देवगौड़ा को अप्रैल 1997 में अपने प्रधानमंत्री पद से हटना पड़ा था। उस समय प्रधानमंत्री पद के दावेदार तो कई थे लेकिन देवगौड़ा के नाम पर सहमति बनई. ये भी काफी दिलचस्प है कि 1996 के चुनाव में सिर्फ 46 सीटें लाने वाली पार्टी जनता दल के नेता देवगौड़ा को पीएम पद मिला. उस वक्त नारा दिया गया, ‘रेस कोर्स से दौड़ा-घोड़ा, देवगौड़ा-देवगौड़ा।’ भाईसाब, हैरान कर देने वाली बात ये थी कि पीएम पद को लेकर तमिलनाडु भवन में बैठक हुई. वहां पर किसी ने देवगौड़ा का नाम लिया और वो नाम चल पड़ा. देवगौड़ा का विरोध करने वालों में उन्हीं के साथी रामकृष्ण हेगड़े थे, लेकिन मुलायम सिंह और लालू प्रसाद यादव सहित बाकी सभी लोगों ने उनके नाम पर सहमति जताई. वामपंथी दल, चंद्रबाबू नायडु और मूपनार ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई। इस तरह एचडी देवगौड़ा को यूनाइटेड फ्रंट ने अपना नेता मान लिया और कांग्रेस ने भी समर्थन कर दिया. इस तरह देवगौड़ा प्रधानमंत्री बने। उनके प्रधानमंत्री बनने के करीब 11 महीनों बाद ही कांग्रेस ने अपना समर्थन वापस ले लिया और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. भाईसाब, एचडी देवगौड़ा कर्नाटक के दिग्गज नेताओं में से एक हैं. जिस समय उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए चुना गया उस वक्त वो कर्नाटक के मुख्यमंत्री थे। वो ना मुख्यमंत्री के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा कर पाए और ना ही प्रधानमंत्री के तौर पर… कुछ समय पहले उन्होंने कहा था कि उन्हें इस बात का अफसोस है. भाईसाब, आपको बता दें कि 1975-76 में आपातकाल के दौरान उन्हें जेल में बंद रहना पड़ा था। जब वे 1991 में हासन लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद के रूप में चुने गए तब उन्होंने राज्य की समस्याओं विशेष रूप से किसानों की समस्याओं के निवारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देवेगौड़ा ने किसानों की दुर्दशा के बारे में संसद में स्पष्ट रूप से अपने विचार व्यक्त किए जिसके लिए सभी ने उनकी खूब प्रशंसा की। संसद और इसके संस्थानों की प्रतिष्ठा और गरिमा बनाए रखने के लिए भी सभी ने उनकी खूब तारीफ की थी। उनके राजनीतिक अनुभव और निचले तबके के लोगों तक उनकी गहरी पैठ ने राज्य की समस्याओं से निपटने में उनकी मदद की।

भाईसाब, 5 दशक के राजनीतिक करियर में देवगौड़ा अब तक 15 से अधिक चुनाव लड़ चुके हैं. देवगौड़ा के नेतृत्व में 7 चुनाव अब तक लड़ा जा चुका है। देवगौड़ा हर बार चुनावी रिजल्ट से राजनीतिक विश्लेषकों को चौंकाते रहे हैं। देवगौड़ा पर परिवारवाद का आरोप भी लगता रहा है. आपको पता होना चाहिए कि जनता दल सेक्युलर पिछले 19 साल में 3 बार पाला बदल चुकी है। कांग्रेस और बीजेपी के साथ गठबंधन में रह चुकी है। गठबंधन तोड़ने और जोड़ने की रणनीति की वजह से देवगौड़ा की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ा है. इसके अलावा देवगौड़ा पार्टी में पूरे परिवार को शामिल कर लिए हैं। पार्टी के बड़े पद पर उनके परिवार के लोगों का ही कब्जा है. देवगौड़ा के बेटे कुमारस्वामी विधायक दल के नेता हैं। दूसरे बेटे एचडी रेवन्ना कर्नाटक सरकार में मंत्री रह चुके हैं. रेवन्ना के बेटे प्रज्वल लोकसभा के सांसद हैं। कुमारस्वामी के बेटे निखिल जेडीएस युवा मोर्चा के अध्यक्ष हैं। भाईसाब, आपको बता दें कि हाल ही में संसद के विशेष सत्र में एचडी देवेगौड़ा ने कावेरी जल बंटवारे मुद्दे पर अपनी बात रखी। देवेगौड़ा ने राज्यसभा में कहा कि हम सबको मिल-बैठकर कावेरी जल बंटवारा विवाद का समाधान निकालने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानूनी लड़ाई से इस समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने था कि कहा कि यह मेरा दुर्भाग्य है कि इस सदन में 40 साल तक रहने के बावजूद, सभी मीडिया ने कर्नाटक इस बात को हाइलाइट किया कि देवगौड़ा की रुचि कावेरी विवाद में राज्य के हितों को सुरक्षित करने की नहीं थी। उन्होंने कहा कि मैं इसके गुण-दोष में नहीं जाना चाहता। तमिलनाडु के लोग पिछले 60 साल से लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने सदन में कहा कि यह झगड़ा कानून से हल नहीं हो सकता है। यदि मेरे साथियों में बेहतर समझ बन जाए कि हम सब एक साथ बैठें और इस समस्या का समाधान करें। अन्यथा चीजें ऐसे हीं चलती रहेंगी। दोनों तरफ से संघर्ष चलता रहेगा। इससे समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने हाथ जोड़ कर तमिलनाडु के अपने सभी साथी नेताओं से इस बात का आग्रह किया।
चलते-चलते भाईसाब आपको जानना जरूरी है कि आज 90 साल की उम्र में भी देवगौड़ा अब भी राजनीति में सक्रीय हैं और जनता दल सेक्युलर के अध्यक्ष हैं। वो कर्नाटक के हासन सीट से सांसद भी हैं। 2019 के लोकसभा चुनावों में उनकी पार्टी जेडीएस ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया है और वो कर्नाटक के ही तुमकुर लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में थे।

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