Home Mahanubhav इंद्र कुमार गुजराल : राजनीति के सज्जन पुरुष | 12th Prime Minister of India

इंद्र कुमार गुजराल : राजनीति के सज्जन पुरुष | 12th Prime Minister of India

0 comment
12th Prime Minister of India

भाईसाब, आज हम ऐसे शख्सियत की बात कर रहे हैं जिन्हें भारतीय राजनीति का भद्र पुरुष कहा जाता था। एक ऐसा व्यक्ति जिसने राजनीति की शुरुआत दिल्ली नगर निगम से की थी और प्रधानमंत्री पद तक पहुंचा था, एक ऐसा व्यक्ति जो सामाजिक कार्यों, लेखन और शेरो शायरी में भी खासी दिलचस्पी रखता था, जो दिल से साफ और बहुत ही सज्जन, जी हां हम बात कर रहे हैं भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल की जो राजनीति के कीचड़ में खिलते हुए कमल के समान रहे हैं।

भाईसाब, जिंदगी कभी-कभी हमें किसी ऐसे प्यारे और महान इंसान से मिलवा देती है जिसकी खुशबू उम्र भर के लिए हमारे जीवन में महकती है। यहां ये शब्द एक ऐसे ही इंसान पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के साथ संबंधित हैं, जिनके व्यक्तित्व की यह विशेषता थी कि उनकी पार्टी के पास संसद का एक सदस्य भी न होने के बावजूद सारा देश और सभी दल उन्हें देश की बागडोर संभालने के लिए एकमत थे। गुजराल साहब के प्रधानमंत्री बनने के पीछे सिर्फ एक चमत्कार काम कर रहा था और वह चमत्कार उनकी शख्सियत का था। वह बेदाग, निर्विवाद, संवेदनशील, धर्मनिरपेक्ष और मानवतावादी मार्ग को आगे बढ़ाने वाले थे। गुजराल साहब विश्व के अंदर सभी धर्मों, जातियों, रंगों, नस्लों, देश या अन्य बातों से ऊपर उठ कर समस्त मानवता को अपनी खुली बांहों में लेने वाला विराट हृदय रखते थे। भाईसाब, आपको जानना जरूरी है कि इन्द्र कुमार का जन्म 4 दिसंबर 1919 को झेलम में हुआ था, जो उस समय पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का अविभाजित हिस्सा था। इनके पिता का नाम अवतार नारायण गुजराल तथा माता का नाम पुष्पा था। इनका विवाह 26 मई 1946 को शीला देवी के साथ हुआ था। इनके पिता अवतार नारायण गुजराल ने भारत के स्वाधीनता संग्राम में हिस्सा लिया था और इन्द्र कुमार स्वयं 11 वर्ष की उम्र में ही स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने लगे थे। भाईसाब, आपको जानकर हैरानी होगी कि 1931 में 11 वर्ष की उम्र में इन्द्र कुमार गुजराल ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया जिसमें पुलिस ने उनको झेलम में युवा बच्चों के आन्दोलन का नेतृत्व करने के लिए गिरफ्तार कर लिया और बर्बरता से पीटा। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें फिर से गिरफ्तार किया गया।

भाईसाब, आपको ये भी बताना चाहेंगे कि राजनीति की शुरुआत उन्होंने दिल्ली नगर निगम से की थी। वो लंबे समय तक इंदिरा गांधी के सहयोगी और कांग्रेस में रहे। इमरजेंसी के दौरान वो सूचना प्रसारण मंत्री रहे। 1980 में वो कांग्रेस छोड़कर जनता दल में शामिल हुए थे। भारत के प्रधानमंत्री बनने से पहले इन्द्र कुमार गुजराल 1996 में विदेश मंत्री बने। 28 जून 1996 को उन्होंने जल संसाधन मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। 1989 में पहला लोकसभा चुनाव जालंधर से जीते थे। वह वर्ष 1989-90 में जल संसाधन मंत्री थे। 1976 से 1980 तक यूएसएसआर में भारत के राजदूत रहे और 1967 से 1976 तक उन्होंने कई प्रकार मंत्रीपद पद संभाला। भाईसाब, इन्द्र कुमार गुजराल 21 अप्रैल 1997 से 19 मार्च 1998 तक भारत के प्रधानमंत्री पद पर रहे। वह प्रधानमंत्री के रूप में अधिक सक्रिय रहे। इनके प्रधानमंत्री काल के दौरान इन्होंने पाकिस्तान से संबंध सुधारने के कूटनीतिक प्रयास किए। भारत का वित्तीय संकट दूर किया। आर्थिक विकास के लिए सकारात्मक योजनाएं बनाईं। भाईसाब, यूं तो इंद्र कुमार गुजराल सिर्फ 11 महीने के प्रधानमंत्री कहे जाते हैं लेकिन देश की राजनीति में लंबे अरसे तक उनका दखल रहा। कामयाबी की कई इबारतें उनके हिस्से में लिखी जाती हैं। उन्होंने उस दौर में प्रधानमंत्री की गद्दी संभाली जब सियासत में अस्थिरता का माहौल पैदा हो गया था और दो साल के भीतर देश ने तीन-तीन पीएम देखे। वह भारत के 12वें प्रधानमंत्री रहें। ये अधिक समय तक प्रधानमंत्री नहीं रहे, लेकिन इनके प्रयास ईमानदाराना थे। वे पत्रकार होने के साथ ही एक अच्छे वक्ता भी रहे हैं। वे राजनीति के भद्रपुरुष के नाम से ख्यात रहे हैं। वह राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों तथा थिएटर पर लेखन कार्य और समीक्षा करते थे। पत्रकार के रूप में भी उन्होंने काफी ख्याति अर्जित की थी।

banner

भाईसाब, आपको ये जानकर हैरानी होगी कि गुजराल अपनी डॉक्ट्रिन थ्योरी के लिए भी जाने जाते हैं। डॉक्ट्रिन का मूल मंत्र ये कि किसी देश को अंतराष्ट्रीय स्तर पर दबदबा कायम करना है तो सबसे पहले पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते सही करने होंगे। गुजराल ने विदेश मंत्री रहते हुए 1996 में भारत को सीटीबीटी पर दस्तखत नहीं करने दिया और आज भारत अपने को परमाणु ताकत घोषित करने में कामयाब हुआ।

चलते-चलते भाईसाब, आप जानकर भवुक हो जाएंगे कि इंद्र कुमार गुजराल की जिंदगी आजादी की लड़ाई से लेकर देश की सियासत तक, कई कहानियां समेटे हुए है। 30 नवंबर 2012 को लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया। इंद्र कुमार गुजराल, एक ऐसी खुशबू जिसने युग महका दिया और चला गया।

You may also like

bhaisaab logo original

About Us

भाई साब ! दिल जरा थाम के बैठिये हम आपको सराबोर करेंगे देशी संस्कृति, विदेशी कल्चर, जलेबी जैसी ख़बरें, खान पान के ठेके, घुमक्कड़ी के अड्डे, महानुभावों और माननीयों के पोल खोल, देशी–विदेशी और राजनीतिक खेल , स्पोर्ट्स और अन्य देशी खुरापातों से। तो जुड़े रहिए इस देशी उत्पात में, हमसे उम्दा जानकारी लेने और जिंदगी को तरोताजा बनाए रखने के लिए।

Contact Us

Bhaisaab – All Right Reserved. Designed and Developed by Global Infocloud Pvt. Ltd.