Home Teej Tyohhar जानिये सावन- सोमवार का महत्व। | Importance of Sawan Somvar |

जानिये सावन- सोमवार का महत्व। | Importance of Sawan Somvar |

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शिव जिनमें सम्पूर्ण ब्रम्हांड विलीन है,जो अनादि है और अनंत भी, जो सत्य भी है और सुन्दर भी और भगवान् शिव को ही खुश करने के लिए पुरे सावन में इनकी आराधना की जाती है और ज्यादा महत्व सावन के सोमवार को दिया जाता हैl

आज हम जानेंगे महादेव को समर्पित श्रावण सोमवार के बारे में।

श्रावण सोमवार भगवान शिव को समर्पित दिन है और हिंदू महीने श्रावण के दौरान हर सोमवार को शिव भक्ति में लय किया जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं।

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श्रावण महीने को हिंदी में सावन के नाम से भी जाना जाता है और यह आमतौर पर ग्रेगोरियन कैलेंडर में जुलाई और अगस्त के बीच आता है, यह हिंदुओं के लिए बहुत ही शुभ समय माना जाता है। कई लोग इस महीने के दौरान सख्त शाकाहारी भोजन का पालन करते हैं और मांसाहारी भोजन का सेवन करने से बचते हैं। उपवास और प्रार्थना के अलावा, कई लोग इस दौरान भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न अनुष्ठान और उत्सव भी मनाते हैं।

श्रावण के महीने के दौरान, कुछ लोग कांवर यात्रा में भी भाग लेते हैं, जिसमें गंगा नदी से स्थानीय मंदिर या भगवन शिव के प्रिसद्ध ज्योतिर्लिंग तक जल ले के जाते और शिव भगवान् को श्रद्धा से स्नान करवाते है और यह कँवर यात्रा भक्तों के जीवन में सौभाग्य और आशीर्वाद ले कर आता है।
इसके अतिरिक्त, कई लोग रुद्र अभिषेक भी करते हैं, जो भगवान शिव को समर्पित एक विशेष पूजा समारोह होता है।

इस त्यौहार को मानाने के पीछे की विशेष कहानियों को, आइये जानते है-
पारंपरिक कहानी के अनुसार, दक्ष की बेटी सती ने अपना जीवन त्याग दिया था और हिमालय राजा के घर में पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया था। पार्वती भगवान शिव से विवाह करना चाहती थीं और उन्होंने श्रावण मास में तपस्या की जिस से भगवान शिव पार्वती जी की भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्होंने उनकी इच्छा पूरी की। भगवान शिव को श्रावण मास के दौरान उन्हें अपनी पत्नी से पुनर्मिलन हुआ था इस वजह से भी यह महीना बहुत ख़ास है।

श्रावण सोमवार पूजा की पौराणिक कथा ‘समुद्र मंथन’ से भी संबंधित है जो श्रावण महीने के दौरान किया गया था। मंथन के दौरान समुद्र से निकले चौदह तत्वों में से ‘हलाहल’ जहर को भगवान शिव ने श्रावण मॉस के सोमवार के दिन ही दुनिया को बचाने के लिए पी लिया था।
जिसकी वजह से उनका कंठ नीला पड़ गया और उन्हें निल कंठ के नाम से भी जाना जाता है।
श्रावण मास के दौरान लोग भगवा वस्त्र धारण करते और माथे पर भस्म लगाते, महिलाएं उपवास के साथ साथ हर सुबह शिव मंदिर जा के बेलपत्र, धतूरे का फूल और गाय का दूध शिव भगवान् को चढाती हैं और अविवाहित लड़के और लड़किया भी अपने सुनहरे भविष्य के लिए हर सावन सोमवार का व्रत रखते हैं।

कुल मिलाकर, श्रावण का महीना हिंदुओं के लिए भक्ति श्रद्धा और अध्यात्म से जुड़ा एक महतवपूर्ण महीना है।आशा करते हैं भोलेनाथ की कृपा आप पर बनी रहे और यह सावन आपके जीवन में झूम कर हर्षोलास और सौहार्द ले आए l
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