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श्रीराम की प्रतिमा में बच्चे जैसी मासूमियत! | Idol of Shri Ram

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Idol of Shri Ram

भाईसाब, क्या आपको पता है, अयोध्या के राम मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम 22 जनवरी को होने वाला है। उससे पहले कौन सी प्रतिमा श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में लगेगी, इसका फैसला होना है। इस दौरान तीन प्रतिमाओं में से एक प्रतिमा का चयन किया जाएगा। चयन का सबसे बड़ा पैमाना यह है कि प्रतिमा पांच साल के बच्चे जितनी मासूम होनी चाहिए।

‘जय श्रीराम’ भाईसाब, आपको पता होना चाहिए कि, अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को होने वाली है, यहां पर भगवान श्रीराम की जो प्रतिमा लगेगी, वह अपने आप में बेहद खास होगी, यह प्रतिमा 51 इंच ऊंची, 1.5 टन वजनी और बच्चे जैसी मासूमियत लिए होगी। भाईसाब, आपको इस प्रतिमा की विशेष खूबी को जानकर आश्चर्य होगा कि, हर साल रामनवमी के दिन दोपहर 12 बजे सूरज की किरणें इस प्रतिमा के माथे को स्पर्श करेंगी, इस मूर्ति का पूजन 16 जनवरी से शुरू होगा और गर्भगृह में इसे 18 जनवरी को स्थापित कर दिया जाएगा। आपको बता दें कि इस मूर्ति पर पानी, दूध या आचमन का कोई विपरीत प्रभाव नहीं होगा, प्रभु श्रीराम की मूर्ति और जिस जगह इसे स्थापित किए जाएगा, उसे स्पेस साइंटिस्ट्स से राय के मुताबिक तैयार किया गया है, इसे इस तरह से बनाया गया है कि हर साल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नौवीं तारीख को राम नवमी के अवसर पर दोपहर 12 बजे सूर्य देवता खुद श्रीराम का अभिषेक करेंगे। एक ही आकार की तीन प्रतिमाएं बनाई गई थीं, जिनमें एक का चयन हुआ है, गहरे रंग के पत्थर से बनी मूर्ति में भगवान विष्णु की दिव्यता और एक शाही बेटे का तेज है, इसमें पांच साल के बच्चे की मासूमियत भी है। भाईसाब, आपको बता दें कि मूर्ति का चयन चेहरे की कोमलता, आंखों में देखने, मुस्कान, शरीर आदि को ध्यान में रखकर किया गया है. 51 इंच ऊंची प्रतिमा पर सिर, मुकुट और आभा को भी बारीकी से तैयार किया गया है, 5 साल की आयु वाले भगवान राम की प्रतिमा मंदिर के भूतल पर रखी जाएगी और 22 जनवरी को इसका अनावरण होगा, 8 महीने बाद जब मंदिर तैयार हो जाएगा तो प्रभु श्रीराम के भाइयों, माता सीता और हनुमान की मूर्तियां पहली मंजिल पर रखा जाएगा। राम मंदिर परिसर में महर्षि वाल्मिकी, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, निषाद राज, माता शबरी और देवी अहिल्या के मंदिर भी बनाये जाएंगे. इसके अलावा यहां जटायु की मूर्ति पहले ही स्थापित की जा चुकी है।

चलते-चलते भाईसाब, ये भी जान लें कि ‘राम लला’ की मूर्ति की नक्काशी कर्नाटक के प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज ने की है, मंदिर की वास्तुकला दक्षिण भारत के मंदिरों से प्रेरित है, निर्माण इंजीनियरों के अनुसार पिछले 300 वर्षों में उत्तर भारत में ऐसा कोई मंदिर नहीं बनाया गया है. यद्यपि पत्थर की आयु 1,000 साल है, लेकिन सूरज की रोशनी, हवा और पानी इस पर प्रभाव नहीं डाल पाएंगे क्योंकि नमी के अवशोषण को रोकने के लिए नीचे ग्रेनाइट स्थापित किया गया है।

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