Home महानुभाव भारतीय परमाणु कार्यक्रम के जनक : डॉ. होमी जहांगीर भाभा |Father of the Indian Nuclear Programme : Homi J Bhabha|

भारतीय परमाणु कार्यक्रम के जनक : डॉ. होमी जहांगीर भाभा |Father of the Indian Nuclear Programme : Homi J Bhabha|

by aman.pandey@globalinfocloud.com
0 comment
भारतीय परमाणु कार्यक्रम के जनक : डॉ. होमी जहांगीर भाभा |Father of the Indian Nuclear Programme : Homi J Bhabha|

24 जनवरी 1966 का दिन था बॉम्बे से लंदन जाने वाला एयर इंडिया का फ्लाइट नं. 101 पूरी रफ़्तार के साथ अपनी उड़ान पर था तभी कॉकपिट में एक आवाज सुनाई देता है ,’आप अपने फ्लाइट के अलटीटूड को मेन्टेन रखें आपके सामने “माउंट ब्लैंक पहाड़ है ” , यह आवाज था फ्रांस के एयर ट्रैफिक कंट्रोल के एक अधिकारी का जो फ्लाइट नं १०१ के पायलट को निर्देशित कर रहा था । पायलट यह आवाज सुनते ही अचंभित हो गया और सोचा की ‘मैंने तो माउंट ब्लैंक को कब का क्रॉस कर लिया है , शायद ATC का अधिकारी गलत निर्देशन दे रहा है। अभी पायलट इतना सब सोचता और जहाज के अलटीटूड को मेन्टेन करता उतने देर में एयर इंडिया का यह फ्लाइट नं. 101 फ्रांस के माउंट ब्लैंक पहाड़ में जा कर टकरा जाता है ,जिसमे सवार सभी 106 यात्री और 11 पायलट दलों की मृत्यु हो जाती है , यह फ्लाइट 101 के दुर्घटना के बाद जारी रिपोर्ट में बताया गया था।

भारत ने इस दुर्घटना में क्या खोया :

जानते है ‘Father of Indian Nuclear Programme’ से सम्बोधित किये जाने वाले और भारत के परमाणु ऊर्जा के विकास में उल्लेखनीय कार्य करनेवाले डॉ. होमी जहांगीर भाभा जी के बारे में ,
डॉ. होमी जहांगीर भाभा का जन्म 30 अक्टूबर, 1909 को बॉम्बे में हुआ , जो की न केवल एक प्रतिभाशाली वैज्ञानिक थे, बल्कि हमारे देश के Nuclear Energy Program के प्रमुख Architect भी थे। परमाणु भौतिकी में योगदान और भारत के परमाणु कार्यक्रम की स्थापना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका ने देश के वैज्ञानिक समुदाय पर कभी न मिटने वाला छाप छोड़ दिया उनके Theoretical Physics के क्षेत्र में बेहतरीन काम ने भारत के परमाणु कार्यक्रम को आकार देने में अहम भूमिका निभायी। बंबई में अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद, वह कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग की आगे की पढ़ाई करने के लिए इंग्लैंड गए । इसके बाद, उन्होंने कैवेंडिश प्रयोगशाला, Theoretical Physics में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की जिसके बाद डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में, होमी भाभा ने नंबेल पुरस्कार विजेता नील्स बोहर के साथ एक छात्र के रूप में काम किया और Quantum Theory के निर्माण में एक महत्वपूर्ण योगदान दिया।होमी भाभा ने अपना पहला वैज्ञानिक पेपर, “The Absorption Of Cosmic Radiation” प्रकाशित करने के बाद, वह 1933 में Issac Newton Studentship से सम्मानित होने वाले पहले भारतीयों में से थे।1939 में यूरोप से जब वे वापस आये उसके बाद वो वापस यूरोप नहीं गए, यूरोप न जाने का 2 प्रमुख कारण थे, पहला की उस दौरान द्वितीय विश्व युद्ध की शुरआत हो चुकी थी और दूसरा वो भारत को एक Nuclear Capable स्टेट के रूप में देखना चाहते थे , जिसके बाद वो बेंगलुरु में Indian Institute of Science के प्रख्यात वैज्ञानिक और नंबेल पुरस्कार विजेता सी वी रमन के अधीन काम करना शुरू किया। और उन्होंने अंतरिक्ष से निकलने वाली High-Energy Radiation वाली, कॉस्मिक किरणों की खोज की। उनके शोध ने ऐसे डिटेक्टरों के विकास की नींव रखी जो इन Cosmic Particles को ट्रैक कर सकते थे, जिसने Particle Physics के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खोज साबित हुईं।
वही अगली उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी ‘भाभा स्कैटरिंग’ का निर्माण। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें इलेक्ट्रॉनों को High-Energy फोटॉन द्वारा बिखेर दिया जाता है, जो Atomic Nuclei के Structure के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देता है। इस खोज ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई और अपने समय के एक Leading Physicist के रूप में उन्हें जाना जाने लगा।

banner

होमी भाभा ने 1947 में देश की आजादी के बाद भारत की उन्नति के लिए Nuclear Energy के जरुरत और महत्व को समझा क्योकि अमेरिका उस टाइम Nuclear Power बन चूका था और जापान के नागासाकी और हिरोशिमा पर इसकी ताकत आज़मा चूका था । लेकिन भारत के साथ प्रॉब्लम यह थी की नुक्लेअर पावर होने के लिए रेडियोएक्टिव मटेरियल चाहिए और उसमे भी सबसे खास मटेरियल था Urenium जो की भारत में बहुत काम मात्रा में पाया जाता है वहीँ दुनिया में कजाखस्तान सबसे ज्यादा Urenium का निर्माण करता है , भारत में यूरेनियम के अल्प भंडार पर निर्भर रहने के बजाय होम भाभा ने यूरेनियम के Alternate स्त्रोत थोरियम के उपयोग की शुरुआत की जो की भारत के कोस्टल एरिया में अत्यधिक मात्रा में पाया जाता है।
अब भारत के Nuclear Programme को आगे बढ़ता देख अमेरिका को यह बात खटकने लगी की अगर भारत नुक्लेअर Weapon बना लेता है , तो पुरे साउथ एशिया और मिडल ईस्ट एशिया में भारत का दबदबा बढ़ जायेगा , जिसको हम आगे चल के टैकल नहीं कर पाएंगे, इस बात को देखते हुए अमेरिका ने भारत को सबसे बड़े टारगेट पर लिया और ऐसा माना जाता है की ख़ुफ़िया एजेंसी CIA की मदद से फ्लाइट नं.101 को जान बूझकर क्रैश करवाया गया था ।

ब्लैक बॉक्स :
हर फ्लाइट में एक ब्लैक बॉक्स होता है जिसका काम होता है फ्लाइट के कॉकपिट में बैठे पायलट की आवाज को रिकॉर्ड करना। यह ब्लैक बॉक्स फ्लाइट के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद भी सेफ रहता है, फ्लाइट नं. 101 के ब्लैक बॉक्स को किसी के साथ साझा नहीं किया गया जिस से पता चल सके की पायलट और ATC में क्या बात सच में हुई भी थी या नहीं? होमी भाभा की मृत्यु से ठीक 14 दिन पहले भारत के पूर्व प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री की भी ताशकंद में रहस्यमय मौत हो गई थी जिसका शोक उस वक्त पूरा भारत मना रहा था ।

होमी भाभा सामाजिक उन्नति के लिए परमाणु ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दिया और Peaceful Nuclear And Research Development का समर्थन किया। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र ( BARC ) और , Atomic Energy Establishment Trombay (AEET) की स्थापना उनकी दूरदर्शिता और दृढ़ता के परिणामस्वरूप हुई थी, और यह उनकी स्थायी विरासत के प्रमाण भी है। उनके इन योगदानों की वजह से उन्हें कई पुरस्कार और मान्यताएँ दी गईं, जिनमें 1954 में एक पद्म भूषण,और 1942 में एडम्स पुरस्कार शामिल हैं। इसके इलावा 1951 और 1953-1956 में Physics के नंबेल पुरस्कार के लिए नॉमिनेट भी हुए थे।
उन्होंने जिन संगठनों की स्थापना की और वैज्ञानिकों की जिन पीढ़ियों को उन्होंने प्रेरित किया, वे उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।होमी जे.भाभा का जीवन वैज्ञानिक जांच और दूरदर्शी नेतृत्व की क्षमता का प्रमाण है। Nuclear Physics में उनके योगदान और विज्ञान में भारत के भविष्य को निर्धारित करने में उनकी भूमिका ने वैज्ञानिक समुदाय को काफी इन्फ्लुएंस किया है।

ऐसेही महत्वपुइन जानकारी के लिए जुड़े रहिये भाईसाब के साथ ।

You may also like

bhaisaab logo original

हमारे बारे में

भाई साब ! दिल जरा थाम के बैठिये हम आपको सराबोर करेंगे देशी संस्कृति, विदेशी कल्चर, जलेबी जैसी ख़बरें, खान पान के ठेके, घुमक्कड़ी के अड्डे, महानुभावों और माननीयों के पोल खोल, देशी–विदेशी और राजनीतिक खेल , स्पोर्ट्स और अन्य देशी खुरापातों से। तो जुड़े रहिए इस देशी उत्पात में, हमसे उम्दा जानकारी लेने और जिंदगी को तरोताजा बनाए रखने के लिए।

संपर्क करें

Bhaisaab – All Right Reserved. Designed and Developed by Global Infocloud Pvt. Ltd.