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देश का बदहाल हेल्थकेयर सिस्टम | Healthcare System |

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भाईसाब, दीये तले अंधेरा, ये मुहावरा हमारे देश के हेल्थकेयर सिस्टम पर बिल्कुल फिट बैठता है, आपको बताते हैं कैसे, वो ऐसे कि, जहां दुनियाभर में है भारतीय डॉक्टरों की डिमांड, वहीं देश में हेल्थकेयर सिस्टम इतना बदहाल है कि यहां डॉक्टरों की ही नहीं बिस्तरों की भी भारी किल्लत है। आपको जानकार आश्चर्य और दुख भी होगा कि देश के सरकारी अस्पताल ही नहीं बल्कि महानगरों के बड़े प्राइवेट अस्पतालों में भी बेड्स की किल्लत है और वेटिंग चल रही है। भाईसाब, आज का हमारा ये जानकारी देश के बदहाल हेल्थकेयर सिस्टम की पोल खालेगा।

भाईसाब, आपकी जानकारी के बताना जरूरी है कि देश के अस्पतालों में डॉक्टरों के साथ अस्पतालों में बिस्तरों यानी बेड की भी भारी किल्लत है। जी हां, महानगरों के बड़े कॉरपोरेट अस्पतालों में जहां मरीज का एक दिन का बिल एक लाख तक आता है, वहां भी मेडिकल सुविधाओं की कमी चिंता का विषय है। चाहे ICU बेड हो या वॉर्ड में सिंगल नॉर्मल बेड – आपको प्राइवेट अस्पताल में उसके लिए भी पैरवी लगानी पड़ सकती है। और जिसकी पैरवी यानी सिफारिश ना हो, उसे वेटिंग लिस्ट में इंतज़ार करना पड़ सकता है। भाईसाब, दुनियाभर में जहां प्रति 1,000 व्यक्ति पर औसतन 3 बेड हैं, वहीं भारतीय अस्पतालों में सिर्फ 1.3 बेड उपलब्ध हैं। यानी हर एक हजार व्यक्ति पर 1.7 बेड कम हैं। भाईसाब वैश्विक औसत की बराबरी करने के लिए भारतीय अस्पतालों में 24 लाख और बेड की जरूरत है। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में अस्पताल और हेल्थकेयर सेंटर विकसित करने के लिए 200 करोड़ वर्ग फुट जमीन की जरूरत है तभी देश के 142 करोड़ लोगों को उचित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। देश में करीब 70,000 अस्पताल हैं। इनमें 63 फीसदी प्राइवेट और 37 फीसदी सरकारी हैं। भाईसाब, आपको ये जानकार भी हैरानी होगी कि देश में प्रति 1000 मरीज पर एक से भी कम 0.9 डॉक्टर हैं। चीन में यह संख्या 2 और ब्रिटेन में 6 है। अमेरिकी नागरिकों को अपनी जेब से इलाज के कुल खर्च का सिर्फ 11.3 फीसदी खर्च करना होता है, जबकि पर्याप्त सरकारी अस्पतालों के अभाव में औसत भारतीयों को अपनी जेब से करीब 55 फीसदी खर्च करना होता है।
भाईसाब, बता दें बड़े कॉरपोरेट अस्पतालों में बेड्स की उपलब्धता कम ही रहती है. ऐसा होने की दो बड़ी वजहें हैं – पहली कोरोना के बाद लोग जागरुक हुए हैं और ज्यादा बीमार भी पड़ रहे हैं – दूसरी बड़ी वजह है भारतीय डॉक्टरों की बढ़ती डिमांड. आपको आश्चर्य कि भारत में प्राइवेट प्रैक्टिस में काम करने वाले ज्यादातर बड़े डॉक्टर भारतीय मरीजों के साथ साथ दूसरे देशों से आने वाले मरीजों की जरुरतों को भी पूरा कर रहे हैं। कई डॉक्टर मिडिल ईस्ट और खाड़ी देशों में प्रोसीजर, सर्जरी और मरीज को देखने के लिए नियमित तौर पर जा रहे हैं। पहली वजह है भारतीय मेडिकल डिग्री की इज़्जत – ज्यादातर एशियाई और मध्य पूर्व के देशों में भारतीय डिग्री मान्य है और भारत के डॉक्टर वहां रजिस्ट्रेशन करवा कर सीधे काम कर सकते हैं। भारतीय डॉक्टरों पर विश्वास. UK और USA जैसे विकसित देशों में भी भारतीय डॉक्टरों की डिमांड इतनी ज्यादा है कि कई भारतीय डॉक्टर पश्चिमी देशों में परीक्षा पास करके वहां प्रैक्टिस कर रहे हैं। लेकिन भारत से विदेश जाकर बसने वाले डॉक्टरों की संख्या पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है।
भाईसाब, हेल्थकेयर सिस्टम में सुधार करना है तो देश के सामने कई चुनौतियां हैं। सबसे पहली चुनौती लगातार बढ़ती जनसंख्या के मुकाबले कम नए डॉक्टर हैं, इनकी कमी को पूरा करना जरूरी है. वहीं दूसरी बड़ी चुनौती है अच्छे कॉलेजों से पासआउट मेडिकल विद्यार्थियों को विदेश जाने से रोकना है। इसके अलावा तीसरी बड़ी चुनौती है – हेल्थ केयर पर अब भी देश की जीडीपी का सिर्फ 2.1 फीसदी खर्च हो है जिसे बढ़ाने की जरूरत है। विकसित देशों में यह 5 से 6 फीसदी तक होता है। भाईसाब देश में ज्यादा अस्पतालों की भी जरूरत क्योंकि देश में 65 साल से अधिक उम्र वाले लोगों की संख्या अगले 10 से 20 साल में तेजी से बढ़ेगी और अस्पतालों पर भारी दबाव बढ़ेगा। वहीं भारत में हृदय संबंधी और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं, इसे देखते हुए विशेष स्वास्थ्य देखभाल की मांग बढ़ेगी। इसके अलावा प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि होना भी जरूरी है। बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता और स्वास्थ्य बीमा की पहुंच भारत में स्वास्थ्य सेवा उद्योग की मांग बढ़ाएगी।
भाईसाब, आपको बता दे कि पिछले 10 साल में देश का हेल्थ केयर बाजार सालाना 18 फीसदी की दर से बढ़ा है। मेडिकल टूरिज्म भी सालाना 30 फीसदी की दर से बढ़ रहा है, क्योंकि विकसित और अन्य देशों के मुकाबले भारत में गुणवत्तापूर्ण इलाज बेहद सस्ता है। रिपोर्ट के मुताबिक देश के हेल्थकेयर सेक्टर और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं।
तो भाईसाब, ये थी जानकारी देश के बदहाल हेल्थकेयर सिस्टम के बारे में, आशा करते हैं कि यह जानकारी आपको जरूर पसंद आई होगी, ऐसी ही अन्य रोचक जानकारी के लिए जुड़े रहें भाईसाब के साथ, धन्यवाद!

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