Home Teej Tyohhar गुरु पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है? | Guru Purnima Significance |

गुरु पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है? | Guru Purnima Significance |

by bs_adm_019
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गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः, गुरुर्देवो महेश्वरा
गुरुर्साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नमः

वाह! क्या सुकून मिलता है जब दिन की शुरुआत ही गुरु के नाम से होती है!
प्रणाम!
क्या है गुरु पूर्णिमा?
गुरु पूर्णिमा का पर्व पूरी तरह से गुरु को समर्पित होता है। इस पावन दिवस के अवसर पर सभी शिष्य अपने गुरुओं को आदर, सम्मान और कृतज्ञता पूर्ण रूप से उनकी पूजा अर्चना करते हैं।

गुरु कौन होता है?
गुरु वह होता है जो आपको अज्ञान के अन्धकार से प्रज्ञाता की रौशनी की ओर ले जाता है| और पूर्णिमा इस प्रकाश का प्रतिनिधित्व करती है।
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, गुरु पूर्णिमा आमतौर पर आषाढ़ महीने में आती है, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर में जून या जुलाई से मेल खाती है।
यह दिन बृहस्पति और चंद्रमा के संरेखण से भी जुड़ा है, जो ज्ञान और भावनात्मक संतुष्टि का प्रतिनिधित्व करता है।

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क्यों मनाया जाता है?
लेकिन क्या आप जानते है की गुरु पूर्णिमा का जन्म कैसे हुआ?
गुरु पूर्णिमा का उत्सव महाभारत और अन्य महत्वपूर्ण ग्रंथों के रचयिता महान लेखक वेद व्यास के जन्म से जुड़ा हुआ है। उनका पूरा नाम कृष्णा द्वैपायन है| वेद व्यास का जन्म द्वापर युग में हुआ था, जो लगभग 5,000 साल पहले समाप्त हुआ माना जाता है।व्यासा हिंदू पौराणिक कथाओं और साहित्य में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति थे, जो महाभारत और अन्य महत्वपूर्ण ग्रंथों जैसे भगवत पुराण, ब्रह्म सूत्र, और 18 प्रमुख पुराणों के लेखन के लिए प्रसिद्ध हैं।कहा जाता है कि लगभग 15000 साल पहले, शिव भगवन, दुनिया के सबसे पहले योगी, ने फैसला लीया के वे इस संसार के प्रथम गुरु बनेंगे, आदिगुरु।उन्होंने मनुष्यों को एक अवधारणा से परिचित कराया जहा वे कहते है, “यदि आप प्रयास करने के इच्छुक हैं, तो मैं आपको एक विज्ञान दूंगा जिसके माध्यम से आप सभी मानवीय सीमाओं से परे जाने में सक्षम होंगे।”इस अवधारणा ने मानव जीवन को असीमित संभावनाओं का सागर बना दिया, न कि ग्रह पर एक और प्रकार का प्राणी होने का जाल।

इस दिन क्या किया जाए?
इस रात में चंद्रमा के नीचे समय बिताने और विचार करने से कि आप वास्तव में क्या चाहते है, अतः इस रात की ऊर्जाओं को सोख सकते है।
इस शुभ अवसर पर अपने परम गुरु, अपने माता पिता का आशीर्वाद ज़रूर ले।
आशा है की यह लेख आपको पसंद आया होगा
जुड़े रहिये भाई साहब, धन्यवाद!

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