Home Dharohar गोरखनाथ मंदिर,गोरखपुर | Gorakhnath Mandir, Gorakhpur |

गोरखनाथ मंदिर,गोरखपुर | Gorakhnath Mandir, Gorakhpur |

by bs_adm_019
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अपनी प्राचीन महिमा और मध्यकाल से लोकप्रिय, गोरखपुर उत्तर प्रदेश की राप्ती नदी के किनारे बसा हुआ है। और इस महानगर का अमूल्य धरोहर है यहाँ का जाना-माना, गोरखनाथ मंदिर

नमस्कार। आइये बात करते है इस विशेष मंदिर के इतिहास, भव्यता अवं लोकप्रियता के बारे में।

गोरखनाथ मंदिर भगवान गोरखनाथ को समर्पित है, जिन्हें गोरख बाबा के नाम से भी जाना जाता है। गोरखनाथ मंदिर हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है और यहां के मान्यताओं और ऐतिहासिक महत्व के कारण लोगों के बीच प्रसिद्ध है।
इस मंदिर और गुरु गोरखनाथ से जुड़ी एक लोकप्रिय रिवायत है कि 12 बार गोरखनाथ चालीसा का जाप करने वाले भक्तों को दिव्य ज्योति का आशीर्वाद मिलता है।
फ़तेहपुर, शेखावती और अस्थल बोहर जैसे अन्य नाथ मठों के बीच गोरखनाथ मंदिर को मुख्य नाथ कहा जाता है। मंदिर का मैदान गोरखपुर के मध्य में 52 एकड़ भूमि तक फैला हुआ है।

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इतिहास:
गोरखनाथ मंदिर का निर्माण काशी नाथ के शिष्यों द्वारा किया गया था। मान्यता है कि गोरखनाथ मंदिर का निर्माण वर्ष 12वीं शताब्दी में हुआ था।

मंदिर के अभिलेखों से पता चलता है कि समय के साथ-साथ गोरखपुर गोरखनाथ मंदिर की संरचना और आकार में बदलाव आया है। दरअसल मुगल सल्तनत के शासन के दौरान इस मंदिर को नष्ट करने की कई कोशिशें की गईं। सबसे पहले यह अलाउद्दीन खिलजी था, जिसने 14वीं शताब्दी में, गोरखनाथ मंदिर को नष्ट कर दिया था और बाद में इसे 18वीं शताब्दी में मुग़ल सुल्तान, औरंगजेब ने नष्ट कर दिया था।
इन घटनाओ के बावजूद, यह स्थान अभी भी अपनी पवित्रता,महत्व और अपनी शोभा रखता है।

ऐसा माना जाता है कि, ज्वालादेवी के स्थान से सफर करते हुए ‘गोरक्षनाथ जी’ ने आकर राप्ती के तट पर तपस्या की थी, और उनकी समाधी उसी स्तन पर सजाई गई थी, जिस स्थान पर वर्त्तमान में श्री गोरक्षनाथ मंदिर स्थित है| अतः योगेश्वर गोरखनाथ की गरिमा के कारण इस स्थान का नाम ‘गोरखपुर’ पड़ा।

वास्तुकला एवं भव्यता:
यह मंदिर गोरखपुर का धरोहर है, और इसकी सुंदर वास्तुकला देखने योग्य है। आज यह मंदिर जिस स्वरूप और आकार में दिखाई देता है, उसके बारे में कहा जाता है कि इसकी परिकल्पना 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्वर्गीय महंत दिग्विजयनाथ और उनके के बाद स्वर्गीय महंत अवेद्यनाथजी ने की थी।
ऐसे त्योहारों के दौरान कभी-कभी नेपाल के राजा भी मंदिर में आते हैं।
मान्यता है कि मंदिर में गोरखनाथ जी द्वारा जलायी अखण्ड ज्योति त्रेतायुग से आज तक अखण्ड रूप से जलती आ रही है। यह ज्योति आध्यात्मिक ज्ञान, अखण्डता और एकात्मता का प्रतीक है।

खिचड़ी मेला:
वैसे तो गोरखनाथ मंदिर में दैनिक पूजा-अर्चना और आरती की व्यवस्था रहती है लेकिन खिचड़ी मेला मकर संक्रांति के दिन, यहां धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है जो कि पुरे माघ मास तक चलता रहता है। गोरखनाथ जयंती, महाशिवरात्रि और नवरात्रि जैसे त्योहार भी यहां धूमधाम से मनाए जाते हैं।

लोकप्रियता:
गोरखनाथ मंदिर गोरखपुर का प्रमुख पर्यटन स्थल है और इसे देश-विदेश से आने वाले लोगों द्वारा दर्शन करने का खास इच्छुक स्थान माना जाता है। इसके आसपास कई धार्मिक स्थल और आश्रम भी स्थित हैं जो इसे एक पूर्ण धार्मिक पर्यटन स्थल बनाते हैं।
शाम को म्यूजिकल लाइट एंड साउंड शो इन दिनों का मुख्य आकर्षण है।

इस प्रकार, गोरखनाथ मंदिर की प्राचीनता, सुंदर वास्तुकला और धार्मिक महत्व के कारण यहां दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होती जा रही है। अतः आपसे भी हमारा अनुरोध होगा कि गोरखनाथ बाबा के दर्शन के लिए एक बार अवश्य गोरखपुर कि पावन धरती पर पधारें!

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