Home Dharohar गीता वाटिका , गोरखपुर | Geeta Vatika ,Gorakhpur |

गीता वाटिका , गोरखपुर | Geeta Vatika ,Gorakhpur |

by bs_adm_019
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धड़कन धड़कन राधिका, नस नस उड़ती प्रीतहर दिल में गूंजता, मुरली का संगीत|

जिस तरह राधा के मन में बसते है कृष्णा, उसी तरह गोरखपुर के मन में बस्ता है गीता वाटिका ||

 

इतिहास-

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वैसे तो गोरखपुर का इतिहास धार्मिक पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है लेकिन कुछ धार्मिक स्थल ऐसे है जिनको देख कर आप मंत्रमुग्ध हो जायेंगे। ऐसा ही एक जगह है यहाँ का गीता वाटिका।

गीता वाटिका एक ऐसा शब्द है जो एक पवित्र हिन्दू ग्रंथ, भगवद गीता के अध्ययन और चिंतन के

लिए समर्पित एक बगीचे को संदर्भित करता है।– “गीता” का अर्थ है “कविता,” और “वाटिका” का अर्थ “उपवन“।

गीता वाटिका शहर के निवासियों और पर्यटकों के लिए एक अध्यात्म का स्थल रहा है। शहर के रेलवे स्टेशन से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह धार्मिक स्मारक भारत के गौरवशाली अतीत को एक श्रद्धांजलि भी है।

पर्यटकों के लिए गीता वाटिका का मुख्य आकर्षण धार्मिक रूप और वातावरण का है। यहाँ लोग ध्यान योग और आधात्म से जुड़ने के लिए प्रतिदिन आते रहते हैं  5.2 एकड़ भूमि में फैला गीता वाटिका श्री राधा कृष्ण के मंदिर के लिए सबसे प्रसिद्ध है। 

गीता वाटिका की स्थापना स्वामी हनुमान प्रसाद पोद्दार ने की थी जिनको भाई जी के नाम से भी जाना जाता है, देश हिट में कार्यो के लिए उन्होंने जो कल्याण पत्रिका सम्पादित किया था। 30 मई सं 1933 में गीता वाटिका के लिए जमीन ख़रीदा गया और 1934 से 1935 में वहाँ भाईजी के रहने के लिए घर बना।

वह इस स्थान के परिसर में 45 वर्षों तक रहे और मृत्योपरांत उनकी समाधी यहां बनायीं गयी।

ऐसा बताया जाता है कि सं 1937 में भाई जी के स्वप्न में नारद मुनि और महर्षि अंगिरा ने उनको दर्शन दिए जिसका एक छोटा मंदिर मुख्य मंदिर के पीछे है इस घटना के बाद भाई जी पूरी तरह नारायण भक्ति में लीन हो गए और जीवन पर्यन्त इस जगह को धार्मिक अलौकिकता से परिपूर्ण किया।

बात अगर मंदिर कि भव्यता और लोकप्रियता की की जाये तो गीता वाटिका मंदिर उत्तर भारत की नागर शैली में बनाया गया है और 1968 से, दिन रात लगातार हरे राम और हरे कृष्ण का जाप किया जाता है। हाल के दिनों में, गीता वाटिका को जीवित रखने वाली प्रार्थनाओं और मंत्रों की सुविधा के लिए विशेष रूप से एक राजसी छत्र या मंडप स्थापित किया गया है।

गीता वाटिका में बहुत हलचल होती है। खासकर राधा अष्टमी उत्सव के दौरान जहां बड़ी संख्या में भक्त मंदिर आते हैं। दिवाली के बाद का दिन भी महत्वपूर्ण है, जब भक्त यहां अन्नकूट का प्रसाद चढ़ाते हैं और गिरिराज की पूजा करते हैं।

मंदिर के प्रधान शिखर की ऊंचाई 85 फीट है जिसमे राधा कृष्ण कि मन को सम्मोहित करने वाली मूर्ति स्थापित है। यहां हिंदू समाज में प्रचलित सभी प्रमुख भगवानों की स्थापना की गई है जिनमें श्रीराधा–कृष्ण, श्री पार्वती– शंकर, श्री रामचतुष्ट, श्री लक्ष्मी–नारायण, गणेशजी, दुर्गाजी, श्री महात्रिपुर सुंदरी, श्री सूर्य नारायण, सरस्वती जी, कार्तिकेय जी, हनुमानजी आदि का समावेश है।

गीता वाटिका शहर के उत्तरी भाग में जेल रोड पर स्थित है, जो शाहपुर में असुरन चौक के काफी करीब है। आप यहां बस से या साइकिल–रिक्शा या ऑटो–रिक्शा किराए पर लेकर आसानी से पहुंच सकते हैं। यह पूरे साल, सभी दिन खुला रहता है।

 

अंततः, गोरखपुर का गीता वाटिका उन भक्तो के लिए है जो इस अस्त–व्यस्त दनिुया में एक शांतिपर्वूक और धार्मिक वातावरण खोज रहे है|

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