Home Mahanubhav स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री : पंडित जवाहर लाल नेहरु | Pandit Jawaharlal Nehru |

स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री : पंडित जवाहर लाल नेहरु | Pandit Jawaharlal Nehru |

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स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री : पंडित जवाहर लाल नेहरु | Pandit Jawaharlal Nehru |

आज जानते है भारत के सबसे पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जी के बारे में ,
पंडित नेहरू जी एक विदेश में शिक्षित बैरिस्टर थे जो गांधीजी के सबसे विश्वासपात्र शख्स थे। वर्ष 1950 में सरदार वल्लभभाई पटेल की मृत्यु के बाद, वह कांग्रेस में अपने सहयोगियों के बीच एक अलग मुकाम बनाया और शैक्षणिक संस्थानों, steel plants और बांधों द्वारा संचालित भारत के उनके दृष्टिकोण को व्यापक रूप से साझा किया । पंडित नेहरू जी का जन्म 14 नवंबर 1889 को अलाहबाद में हुआ और उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा घर पर निजी शिक्षकों के द्वारा प्राप्त की। वह पंद्रह वर्ष की आयु में, इंग्लैंड गए और उन्होंने हैरो नामक बड़े नगर में दो साल बिताये।

उसके बाद वह कैंब्रिज विश्वविद्यालय में शामिल हुए जहाँ उन्होंने प्राकृतिक विज्ञान में शिक्षा ग्रहण कि। एक महत्वपूर्ण बात यह है के भारत के स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेने से पहले नेहरू जी , अपने पिता मोतीलाल नेहरू जी की तरह वकालत का प्रशिक्षण ले रहे थे और इसी के साथ 1910 में कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज से स्नातक होने के बाद उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दाखिला भी लिया हुआ था। 1912 में नेहरू जी भारत लौटे, और सीधा राजनीति में उतर गए । बताते चले नेहरू जी को विदेशी प्रभुत्व के तहत पीड़ित सभी देशों के संघर्ष में रुचि थी। इसलिए उन्होंने आयरलैंड में सिन्न फैन आंदोलन में गहरी रुचि ली। और बाद में, वह अनिवार्य रूप से भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में शामिल हो गये। भारत को आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनाना यह नेहरू जी की पहली प्रतिबद्धता थी । इसी के परिणामस्वरूप, उन्होंने आधुनिक शिक्षा के मंदिर और विशाल सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों की स्थापना की, जो एक बढ़ते राष्ट्र और उसके लोगों की जरूरतों को पूरा करने में मदत करते थे ।
नेहरू जी ने एक बार कहा था, ” के आज के बच्चे कल का भारत बनाएंगे। हम उनका पालन-पोषण कैसे करते है उसी से देश का भविष्य तय होगा।” नेहरू जी का दृढ़ विश्वास था कि बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिया जाना चाहिए। इसलिए उनकी इन्ही वक़ालतो के कारण , उनके जन्मदिवस को ‘Children’s day’ या ‘बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। बताते चले , बच्चे उन्हें प्रेम से चाचा नेहरू जी भी बुलाया करते थे।
वर्ष 1912 में, उन्होंने एक प्रतिनिधि के रूप में बांकीपुर कांग्रेस में भाग लिया, और 1919 में इलाहाबाद के Home Rule लीग के सचिव बने। वर्ष 1916 में उनकी महात्मा गांधी से पहली मुलाकात हुई और वे उनसे बेहद प्रेरित हुए। बाद में 1920 में उन्होंने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में पहला किसान मार्च आयोजित किया और 1920-22 के असहयोग आंदोलन के सिलसिले में उन्हें दो बार जेल भेजा गया।
नेहरू जी जी की विचारधाराएं 1917 की Bolshevik क्रांति और 1927 में उनकी USSR की यात्रा से काफी प्रेरित थीं क्योकि वह एक समाजवादी नेता थे । जब वह आजादी के बाद भारत के पहले प्रधान मंत्री बने, तो उन्होंने देश को ‘मिश्रित अर्थव्यवस्था’ के रूप में तैयार किया।उसके बाद उन्होंने चीन और भारत के बीच पंचशील समझौते पर हस्ताक्षर किए, क्योकि उन्हें विश्वास था के यह समझौता भारत और चीन के संबंधों के बीच पांच मार्गदर्शक सिद्धांतों के रूप में काम करेगा । परन्तु जब चीनियों ने भारत पर हमला किया तो पंडित जी ने खुद को ठगा हुआ महसूस किया, जबकि उन्होंने ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ की बात कही थी। भारतीय सेना पूरी तरह से तैयार ना होने के बावजूद भी चीनी सैनिकों का मुकाबला किया ।
17 वर्षों तक प्रधानमंत्री रहने के दौरान, नेहरू जी एक महान व्यक्ति की तरह भारतीय राजनीतिक मंच पर आगे बढ़े। उन्होंने मुख्यमंत्रियों का चयन नहीं किया, लेकिन राज्य स्तर पर पार्टी संगठन को अपने नेताओं को चुनने की अनुमति दी। जब अदालतों ने उनके भूमि सुधार कार्यक्रमों को चुनौती दी, तो न्यायाधीशों की आलोचना करने के बजाय, उन्होंने संवैधानिक संशोधन करने का विकल्प चुना। दिल से उदार और सच्चे लोकतंत्रवादी, नेहरू जी एक स्वस्थ राजनीतिक बहस चाहते थे।
एक महान इतिहासकार सर्वपल्ली गोपाल , कहते है की लोकतंत्र को तैयार करना कठिन काम था ,नेहरू जी को अपने प्रधानमंत्रित्व काल के दौरान, हर दिन लगभग 2,000 पत्र प्राप्त होते थे और वह हर रात चार से पांच घंटे जवाब लिखने में बिताते थे। और कभी कभी ऐसा भी समय आता था , जब प्रधान मंत्री निजी भोजन के रूप में नाश्ता करके , बीस-बीस घंटे काम में समय व्यतीत करते थे।
बताते चलें की , वर्ष 1947, 1955, 1956, और 1961 में नेहरू जी पर लगभग चार बार हत्या के प्रयास हुए परन्तु वह उन सबसे बच निकले और आखिरकार 27 मई, 1964 को दिल का दौरा पड़ने से नेहरू जी जी का निधन हो गया। ऐसा कहा जाता है कि 1962 के भारत-चीन युद्ध की वजह से उन्हें बहोत बड़ा झटका लगा , और उसके बाद से उनका स्वास्थ्य बिगड़ता गया।
कई भारतीयों का मानना है कि भारत को एक जीवंत लोकतंत्र, एक औद्योगिक महाशक्ति, एक ज्ञान भागीदार, एक विश्व स्तर पर सम्मानित सैन्य शक्ति , एक प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष प्रर्वतक होने का श्रेय नेहरू जी को जाना चाहिए क्योकि उन्होंने इन बातों की मजबूत नींव रखी थी जिस पर संस्थानों ने मजबूत और केंद्रित लक्ष्यों के साथ खुद को खड़ा किया। उनके निधन के बाद, अगले ही दिन, नेहरू जी के शोक में लगभग 15 लाख लोग दिल्ली की सड़कों पर एकत्र हुए।
वही अगर विवादों की बात करूँ तो उनका विदेशी महिलाओं के साथ सम्बन्धो को कई बार उछाला जाता है, दूसरा कश्मीर मुद्दे को भी नेहरू जी को जिम्मेदार माना जाता है, तीसरा UN के सिक्योरिटी कौंसिल में भारत की परमानेंट सदस्यता का ना होने का कारण भी नेहरू को माना जाता है, भारत के लद्दाख की टेर्रोटोरी जिसको अक्साई चीन बोला जाता उसे भी नेहरू जी का ब्लंडर बोला जाता है और भाषा के आधार पर क्षेत्रों के विभाजन को भी विशेषज्ञों द्वारा गलत ठराया जाता है।
चाहे कुछ भी हो भारत आज जिस मुकाम पर है उस मुकाम पर पहुंचाने के लिए भारत की मजबूत नीव रखने वाले पंडित नेहरू जी ही थे जिनका सम्मान हम सभी को करना चाहिए ।

ऐसेही महत्वपूर्ण जानकारी के लिए जुड़े रहिये भाईसाब के साथ ।

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