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भूकंप से निपटने जापानी मैनेजमेंट और जापान की लाइफस्टाइल | Earthquake in Japan

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Earthquake in Japan

भाईसाब, दुनिया जब नए साल का जश्न मना रही थी उस दौरान जापान के लोग परेशानी से जूझ रहे थे। आप सुनकर खैफजदा हो जाएंगे कि 7।5 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से जापान की धरती बुरी तरह से कांप गई। इस घटना में करीब 48 लोगों की मौत हो गई और हजारों लो लापता हो गए। एक दिन में 155 भूकंप के झटके जापान में महसूस किए गए। यह भूकंप इशिकावा प्रान्त के नोटो प्रायद्वीप पर आया। भूकंप 10 किलोमीटर की गहराई में महसूस किया गया। जापान में धरती हिलते ही इमारतें ढह गईं, आग लग गई और पूर्वी रूस तक सुनामी की चेतावनी जारी कर दी गई, जबकि जापान के तटीय इलाकों में रह रहे लोगों का वहां से चले जाने का आदेश दिया गया।

भाईसाब, जापान में तुरंत आने वाले भूकंप के झटके वहां की ज़िंदगी का हिस्सा बन गये हैं। वहां लोग अब इसके आदी हो गये हैं। हालांकि, वहां के लोगों के दिमाग़ में एक ख़याल हमेशा रहता है कि अगला बड़ा भूकंप कब आएगा या क्या ये इमारत इसके लिए सुरक्षित है?
भाईसाब, आपकी जानकारी के लिए बात दें कि भूकंप के लिहाज से जापान बेहद संवेदनशील देश है। इसका कारण है यहां मिलने वाली धरती की सबसे अशांत टेक्टोनिक प्लेट्स। ये प्लेटें एक अभिकेंद्रित सीमा बनाती हैं, जिसके कारण ये क्षेत्र दुनिया के सर्वाधिक भूकंपों का केन्द्र बन जाता है। जापान में भूकंप से बचाव के लिए मकानों की नींव गहरी रखी जाती है ताकि भूकंप के गहरे झटकों को सह सके, और आपको बता दें कि जापान में भूकंप से बचाव संबंधित चिकित्सा सामग्री हर घर, दफ्तर में हमेशा रहती है। भाईसाब यहां कुछ सालों से लगातार भूकंप आ रहे हैं। भूकंप के मामले में इस देश का रिकॉर्ड काफी लंबा रहा है। तो सवाल उठता है कि जापान में क्यों आते हैं इतने भूकंप? जवाब ये है कि यहां भूकंप आने का सबसे बड़ा कारण यह है कि, यहीं टेक्टोनिक प्लेट आकर जुड़ती हैं जो भूकंप का कारण बनती है। जापान में पेसिफिक प्लेट, फिलिपींस और अमेरिका प्लेट के नीचे जा रही है यही कारण है कि, जापान में हर दूसरे दिन छोटे-बड़े भूकंप आते रहते हैं। यही कारण है कि, यहां के लोग पक्के घर नहीं बनाते हैं बल्कि कच्चे यानी मिट्टी और लकड़ी के घरों में रहते हैं।

भाईसाब, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जापान में भूकंप की मॉनिटरिंग करने का सिस्टम काफी मजबूत और अपडेट है। जापान की मेट्रोलॉजिकल एजेंसी जापान को छह स्तरों लगातार और हर पल मॉनिटर करती रहती है। सुनामी वार्निंग प्रणाली भी इसी एजेंसी के तहत काम करती है। सुनामी और भूकंप मॉनिटरिंग प्रणाली के तहत सिसमिक स्टेशन यानी प्लेटों में बदलाव पर नजर रखने वाले केंद्र के साथ साथ छह रीजनल क्षेत्रों पर नजर रखती है। इसकी बदौलत मेट्रोलॉजिकल एजेंसी केवल 3 मिनट के भीतर ही भूकंप और सुनामी की चेतावनी पूरे देश में जारी कर देती है। जैसे ही भूकंप आता है, कुछ ही सैकेंड में भूकंप का केंद्र, रिक्टर स्केल और मेग्नीट्यूड संबंधी सारी जानकारी तुरंत ही देश के सभी टीवी चैनलों पर जारी कर दी जाती है। इसी के साथ अगर सुनामी का खतरा है तो सुनामी की चेतावनी भी जारी होती है और कहां कहां खतरा है, सभी लोकेशन नेशनल टीवी पर बताए जाते हैं। कुल मिलाकर टीवी पर ये जानकारी साठ सैकेंड के भीतर जारी की जाती है ताकि जनता भूकंप के खतरे को समझकर बचाव पर ध्यान दे। कई क्षेत्रों में लाउडस्पीकर लगाए गए हैं ताकि आपदा की जानकारी दी जा सके। भाईसाब, आपको हैरानी होगी यह जानकर कि द‌ुनिया में जापान एकमात्र देश है जहां प्राइमरी कक्षा में ही बच्चों को भूकंप और सुनामी से बचने की ट्रेनिंग दी जाती है। ये ट्रेनिंग प्राइमरी स्तर पर अनिवार्य है और इसके अलावा भी देशभर में सरकारी एजेंसिया समय समय पर लोगों को आपदा प्रबंधन के नए नए तरीके सिखाती रहती हैं। स्कूलों में बच्चों को भूकंप के समय किस तरह, कहां छिपना है और खुद को बचाना है, सिखाया जाता है। बच्चों को बतायाजाता है कि अगर वो स्कूल में हैं तो भूकंप आने पर डेस्क के नीचे छिप जाएं। अगर वो घर या किसी ऊंची इमारत में हैं तो भूकंप आने पर सीढ़ियों से उतरते ह‌ुए पार्क या मैदान में आ जाए। छोटे छोटे बच्चों को मॉक ड्रिेल के दौरान स्कूल और इमारतों से निकलने के तरीके बताए जाते हैं। घरों के फर्नीचर के बीच किस तरह बचते हुए बाहर आएं और किस तरह दूसरे घायलों की सहायता करें, ये सभी उपाय बच्चों को सिखाए जाते हैं। भाईसाब, आपको बता दें कि हर साल एक सितंबर जापान में आपदा रोकथाम दिवस के तौर मनाया जाता है। एक से पांच सितंबर तक आपदा प्रबंधन सप्ताह मनाया जाता है जिसमें देश के पीएम तक मॉक ड्रिल में हिस्सा लेते हैं।

भाईसाब, जापान जानता है कि भूकंप आने पर सबसे ज्यादा प्रभाव इमारत की नींव पर पड़ती है। नींव के हिलते ही इमारत के बाकी और ऊपरी हिस्से डगमगाकर गिर पड़ते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए जापान में भूकंप से बचने के‌ लिए स्प्रिंग बेस प्रणाली के तहत इमारतें तैयारी की जाती है जिससे भूकंप के बड़े झटके आने पर भी इमारत न गिरे। इसके अलावा गद्देदार‌ सिलेंडरों के बेस वाली नींव भी जापान में खूब प्रचलित है। इसके तहत रबर के सिलेंडरों और स्टील के स्प्रिंग वाले बेस पर इमारत खड़ी की जाती है। भूकंप आने पर ये रबर सिलेंडर वाली नींव खुद ही हिल डुल कर स्थिर हो जाती है और ऊपरी इमारत ज्यों की त्यों रहती है। भाईसाब, हैरान कर देने वाली बात है कि ऊर्जा को सोख लेने वाली प्लास्टिक नींव भी जापान में इमारत बनाने के लिए काम आती है। प्लास्टिक मालफोरमेशन से बनी ये नींव धरती से ऊर्जा निकलते ही उसे अपने में समाहित कर लेती है और ऊपरी इमारत कंपन से बची रहती है। भूकंप से बचाने वाली इमारत बनाने के लिए ईंटों और सीमेंट की नींव यहां नहीं बनाई जाती। वहीं जापान के पास सूनामी की चेतावनी देने वाली दुनिया की सबसे अत्याधुनिक प्रणाली है इस प्रणाली के तहत कुछ ही सैकेंड में मेट्रोलॉजिकल एजेंसी सुनामी की गति, स्थिति, ऊंचाई आदि जानकारी सुनामी प्रभावित इलाकों में जारी कर देता है। आपदा प्रबंधन के साथ साथ राहत और बचाव के मामले में भी जापान कई देशों से आगे है। जापान के कई तटों पर सूनामी रोधी शैल्टर बनाए गए हैं ताकि समद्र किनारे बसे लोग आपात स्थिति में इन शैल्टरों की शरण में जा सकें। में शरण ले सकें।
भाईसाब, आखिरी और सबसे खास बात ये है कि आपदा के वक्त सभी विभागों का नेतृत्व खुद प्रधानमंत्री के हाथों में होता है। दरअसल जापान में आपदा प्रबंधन विभाग के म‌ुखिया खुद प्रधानमंत्री हैं और आपदा के समय पीएम खुद अपने हाथ में सारे निर्णय लेते हैं।

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