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दीन दयाल उपाध्याय यूनिवर्सिटी, गोरखपुर

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अखिल चंद्र बैनर्जी, परिचय दास, समरेश मित्रा, मीनाक्षी नारायण, संजय राजा राम और कितने नाम लूँ? ये ऐसे नाम है जिन्होंने भारत का सर गौरव से पुरे विश्व में अपने-अपने क्षेत्र में ऊँचा किया है और आप जानकर हैरान हो जायेंगे की इनकी शिक्षा-दीक्षा गोरखपुर के दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय से हुई है, जिसे डी. डी. यु. के नाम से भी जाना जाता है।

दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, १९५७ में आज़ादी के बाद उत्तर प्रदेश में स्थापित होने वाला पहला विश्वविद्यालय है जिसका मोटो यानि आदर्श वाक्य है,”आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वत्व्” यह आदर्श वाक्य रिग वेद से लिया गया है जिसका मतलब है – “सभी दिशाओं से मेरे पास अच्छे विचार आए”।

गोरखपुर में आवासीय विश्वविद्यालय का विचार सबसे पहले आगरा विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले, सेंट एंड्रयूज कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य, सी.जे. राव ने रखा था और एस.एन.एम.त्रिपाठी के अथक प्रयासों से इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से यूपी के पहले मुख्यमंत्री, गोबिंद बल्लभ पंत ने स्वीकार कर लिया, और सं 1956 में यूपी द्वारा पारित एक अधिनियम द्वारा विश्वविद्यालय अस्तित्व में आया।

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वास्तव में १ सितंबर १९५७ से कार्य करना शुरू हुआ, जब कला, वाणिज्य, कानून और शिक्षा संकाय शुरू किए गए। अगले वर्ष, 1958 में, विज्ञान संकाय अस्तित्व में आया। बाद के वर्षों में इंजीनियरिंग, चिकित्सा और कृषि संकाय भी अस्तित्व में आए।

महान राजनीतिक विचारक, पंडित दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर रखा गया यह विश्वविद्यालय १९० एकड़ भूमि में फैला हुआ है, जिसमे तीस विभागों से युक्त सात संकाय हैं। इस विश्वविद्यालय की स्थापना ने पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बिहार और नेपाल के लोगों को समग्र शिक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आपको जानकर ख़ुशी होगा कि इस विश्वविद्यालय ने NAAC ग्रेड A++ रैंक हासिल करके देश के शीर्ष पांच राज्य विश्वविद्यालयों की लीग में प्रवेश किया है। ३.७८ स्कोर पाने वाली यह प्रदेश की पहली यूनिवर्सिटी बन गई है।

गोरखपुर विश्वविद्यालय कुल 101 पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रदान करता है – जिनमें से 25 यूजी प्रोग्राम , 42 पीजी प्रोग्राम , 5 डिप्लोमा प्रोग्राम और 29 डॉक्टरेट पाठ्यक्रम हैं। प्रवेश लेने के इच्छुक छात्रों को पात्रता मानदंडों को पूरा करना होता है। ग्रेजुएशन में प्रवेश, विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित संयुक्त प्रवेश परीक्षा के आधार पर किया जाता है। पोस्ट ग्रेजुएशन में प्रवेश के लिए, छात्रों को एक ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा में शामिल होना होता है। इसके अलावा, छात्रों को सीट आवंटन, डॉक्यूमेंट सबमिशन और फीस भुगतान के लिए उपस्थित होना होता है।

आपको बतादें की राज्य सरकार के विष्वविद्यालयों के चांसलर राज्य का राज्यपाल होता है। और वाईस चांसलर यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन द्वारा एक कमिटी के माधयम से चयन किया जाता है, जो की संविधान द्वारा निर्धारित कर्तव्यों को वहन करता है।
डी. डी. यु. के वर्तमान चांसलर श्रीमती आनंदी बेन पटेल हैं, और वाईस चांसलर प्रोफेसर राजेश सिंह जी है।

डी. डी. यू. गोरखपुर विश्वविद्यालय अनुसंधान, शैक्षणिक प्रतिष्ठा, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल प्रकाशन, और प्रति संकाय उद्धरण के मामले में उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालयों में शीर्ष स्थान पर है, और हमे पूरी उम्मीद है कि यहाँ के छात्र देश-विदेश में भारत का परचम लहराते रहेंगे।

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