Home Latest राज्य सरकार – राज्यपाल के बीच टकराव | Conflict between State Government & Governor |

राज्य सरकार – राज्यपाल के बीच टकराव | Conflict between State Government & Governor |

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भाईसाब, क्या आपको पता है, देश के विपक्ष शासित राज्यों में राज्यपालों और वहां की निर्वाचित सरकार के बीच ठनी हुई है जिससे अवांछित रूप से संवैधानिक गतिरोध उत्पन्न हो रहा है। यह लोकतंत्र की भावना के लिए बेहद नुकसानदेह है। राज्यपालों के असहयोगी और नकारात्मक रवैये से यही लगता है कि क्या वे केंद्र सरकार के इशारे पर ऐसी टेढ़ी चाल चल रहे हैं और जानबूझकर राज्य सरकार के काम में अड़ंगा डाल रहे हैं?
तो भाईसाब आज के इस लेख में हम देश के विपक्ष शासित राज्य सरकरों और वहां के राज्यपालों के बीच हो रहे टकराव के बारे में खुलासा करेंगे।
भाईसाब, पिछले कुछ समय में अलग-अलग मसलों पर विभिन्न राज्य सरकारों और राज्यपाल के बीच जिस तरह की खींचतान देखी गई है, उससे फिर यह सवाल उठा है कि ऐसे टकराव का हासिल क्या है और इससे आखिरी तौर पर किसका हित प्रभावित होता है। हाल ही में तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और राज्यपाल आरएन रवि के बीच तू डाल-डाल मैं पात-पात जैसा खेल चल रहा है। तमिलनाडु विधानसभा ने हाल ही में राज्यपाल द्वारा लौटाए गए सभी 10 विधेयक फिर से पारित कर दिए। अब संवैधानिक प्रावधान के मुताबिक राज्यपाल को विधेयकों को मंजूरी देनी ही होगी। इसके बावजूद यदि अब भी राज्यपाल बिलों पर हस्ताक्षर नहीं करते तो बड़ा संवैधानिक गतिरोध पैदा हो जाएगा। कानून, कृषि, उच्च शिक्षा से संबंधित इन विधेयकों को राज्यपाल ने गत 13 नवंबर को लौटा दिया था। इस पर विधानसभा की विशेष बैठक बुलाकर यह विधेयक पुन: पारित किए गए। मुख्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक और बीजेपी ने सदन से बायकाट किया था। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल द्वारा विधेयकों को रोक रखने पर चिंता जताई थी। स्टालिन ने कहा था कि राज्यपाल ने बहुत लंबे समय तक अपने पास रोक रखने के बाद बिना कोई कारण बताए मनमर्जी से विधेयक लौटा दिए। उन्हें मंजूरी न देना अलोकतांत्रिक व जनविरोधी है। केंद्र सरकार राज्यपालों के माध्यम से गैरभाजपा शासित सरकारों को निशाना बना रही है। स्टालिन ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर राज्यपाल को उपयुक्त निर्देश देने को कहा है। तमिलनाडु के सांसदों ने भी यह मामला राष्ट्रपति के सामने उठाया है और प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। स्टालिन ने आरोप लगाया कि राज्यपाल इसी ताक में रहते हैं कि राज्य सरकार की योजनाएं कैसे रोकी जाएं। वे जिस पद पर आसीन हैं वहां से सरकार की नीतियों की सार्वजनिक रूप से आलोचना करना अशोभनीय है। भाईसाब, स्टालिन ने ये भी आरोप लगाया कि राज्यपाल सार्वजनिक मंचों पर तमिल संस्कृति, साहित्य व सामाजिक प्रणाली के खिलाफ टिप्पणी करते रहते हैं। उन्हें समानता, सामाजिक न्याय तथा तमिलनाडु का आत्मगौरव स्वीकार नहीं है।
भाईसाब, सियासी इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं। त्रिपुरा की मार्क्सवादी सरकार ने तो राजभवन की बिजली और पानी की सप्लाई ही रोक दी थी। नतीजतन तत्काल राज्यपाल रोमेश भंडारी को भागकर दिल्ली आना पड़ा। फिर उनका तबादला पणजी (गोवा) राजभवन कर दिया गया था। तमिलनाडु के राज्यपाल रहे डॉक्टर मर्री चन्ना रेड्डी पड़ोसी पुडुचेरी का भी कार्यभार संभाल रहे थे। अन्नाद्रमुक की मुख्यमंत्री जयललिता से उनके रिश्ते बिगड़ चुके थे। वे चेन्नै से पुडुचेरी सड़क मार्ग से जा रहे थे, तभी अन्नाद्रमुक पार्टी कार्यकर्ताओं ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। पुलिस देखती रही, कार के शीशे ध्वस्त हो गए। अगर उनके साथ मौजूद परिसहायक उनकी ढाल न बनते तो राज्यपाल को अस्पताल पहुंचाना पड़ता। भाईसाब, यों देश के कई राज्यों में राज्यपाल और वहां की सरकार के बीच अलग-अलग वजहों से टकराव के मामले सामने आते रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में तमिलनाडु, केरल, बंगाल आदि कुछ राज्यों में भी राज्यपालों के रुख की वजह से सरकारों के साथ तीखे टकराव की स्थिति पैदा हुई। लेकिन खासतौर पर दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद शासन के मामले में अधिकारों और सीमाओं को लेकर राज्यपालों के साथ एक विचित्र कड़वाहट का माहौल बना है।
भाईसाब, आपको बता दें कि राजभवन और राज्य सरकार के बीच तनावपूर्ण संबंध निरंतर चर्चा का विषय बना रहा है। हमें लगता है कि राज्यपाल और सरकार के आमने-सामने खड़े दो पक्ष बनने के बजाय होना यह चाहिए कि दोनों तरफ से अहं को किनारे कर सौहार्दपूर्ण माहौल में कानून और प्रक्रिया के मुताबिक तकनीकी सवालों का हल निकाला जाए, ताकि आम जनता के हितों का नुकसान न हो। इसके लिए किसी बहस को टकराव की हद तक ले जाने के बजाय बेहतर शायद यह है कि देश के संविधान में दर्ज राज्यपाल और सरकार के अधिकार और सीमाओं पर गौर किया जाए।
तो भाईसाब, ये थी जानकारी राज्यपालों और राज्य सरकारों के बीच टकराव की, आशा है यह जानकारी आपको जरूर पसंद आई होगी, ऐसे ही अन्य रोचक जानकारी के लिए जुड़े रहें भाईसाब के साथ, धन्यवाद!

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