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देश में जल्द लागू होगा CAA? | Citizenship Amendment Act

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Citizenship Amendment Act

भाईसाब, आपको सबसे चौंकाने वाली खबर बताएंगे, कि जल्द ही देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी CAA लागू कर दिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में भारत सरकार CAA के लिए नियम जारी करने जा रही है। एक बार नियम जारी होने के बाद कानून लागू किया जा सकता है और जो पात्र हैं, उन्हें भारतीय नागरिकता प्रदान की जा सकती है। आपके बता दें कि CAA का उद्देश्य अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदायों के प्रवासियों को नागरिकता देना है। यह 12 दिसंबर, 2019 को अधिसूचित किया गया और 10 जनवरी, 2020 को लागू हुआ था। तो, दोस्तों आज के इस वीडियो में हम नागरिकता संशोधन अधिनियम के बारे में खुलासा करेंगे, आखिर क्यों इसे लेकर देश भर में बवाल मचा हुआ है।

लोकसभा चुनावों की घोषणा से पहले CAA को लागू किए जाने की संभावना है। स्वाभाविक है कि सीएए लागू हुआ तो यह लोकसभा चुनाव का भी बड़ा मुद्दा बनेगा। बीजेपी इसे अपने पक्ष में भुनाने का भरपूर प्रयास करेगी जबकि विपक्षी दल इसे मुस्लिम विरोधी कदम बताकर अल्पसंख्यक वोटों का ध्रुवीकरण करने की जुगत लगाएंगे। भाईसाब, आपको बता दें कि पहले कानून पारित होने के तुरंत बाद देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। मुसलमानों, सिविल सोसाइटी के तबके और कुछ संगठनों ने CAA का यह कहकर विरोध किया कि इसमें मुसलमानों को बाहर रखा गया है। लंबे समय तक चले विरोध-प्रदर्शन के मद्देनजर कानून लागू करने के लिए सरकार ने नियम ही नहीं बनाए और इसके लिए बार-बार समय बढ़ाने का अनुरोध करती रही। अब नियम तैयार हैं और ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार है। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और आवेदक अपने मोबाइल फोन से भी आवेदन कर सकते हैं। भाईसाब, आपको ये जानकर हैरानी होगी कि सरकार अब तक CAA के तहत नियम बनाने की तारीख को 8 बार बढ़ा चुकी है। एक अधिकारी ने बताया, ‘पिछले दो वर्षों में 9 राज्यों के 30 से अधिक DM और होम सेक्रेटरीज को 1955 के नागरिकता अधिनियम के तहत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी ईसाइयों को भारतीय नागरिकता देने का अधिकार दिया गया है। भाईसाब, CAA को लागू करने में इतनी देरी के कई कारण बताए जा रहे हैं जिनमें एक प्रमुख कारण असम और त्रिपुरा सहित कई राज्यों में सीएए का मुखर विरोध है। असम में इस डर से विरोध हुआ था कि यह कानून राज्य की डेमोग्राफी को बदल देगा। विरोध सिर्फ पूर्वोत्तर तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी फैल गए। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग सहित कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती दे रही हैं। भाईसाब, कई याचिकाकर्ताओं ने सीएए को कोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि यह कानून पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से सिर्फ हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों को भारतीय नागरिकता देता है और इसमें म्यांमार के सताए गए रोहिंग्या, चीन के तिब्बती बौद्ध और श्रीलंका के तमिलों को शामिल नहीं किया गया है, जो कि अन्यायपूर्ण है। भाईसाब, आपको जानकारी दे दें कि CAA को दिसंबर 2019 में ही संसद ने मंजूरी दी थी। इसे लोकसभा ने 9 दिसंबर 2019 को और राज्यसभा ने दो दिन बाद पारित किया था जबकि इस पर 12 दिसंबर को राष्ट्रपति का दस्तखत हो गया था। वहीं, भाईसाब, सरकार ने भी याचिकाओं के जवाब में दाखिल किए गए शुरुआती हलफनामे में कहा था कि 2019 के इस कानून में ‘उचित वर्गीकरण’ का आधार धर्म नहीं है, बल्कि पड़ोसी देशों में ‘धार्मिक भेदभाव’ है। सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि ‘पड़ोसी देशों में वर्गीकृत समुदायों के साथ व्यवहार पिछली सरकारों का भी ध्यान आकर्षित करता रहा है, लेकिन किसी भी सरकार ने कोई विधायी कदम नहीं उठाया, बल्कि केवल समस्या को स्वीकार किया और इन वर्गीकृत समुदायों के प्रवेश, ठहरने और नागरिकता के मुद्दों पर कार्यकारी निर्देशों के माध्यम से कुछ प्रशासनिक कार्रवाई की।

चलते-चलते, आपको बता दें कि CAA से लाभ क्या होगा, तो जान लें कि अब CAA के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आए प्रताड़ित गैर-मुस्लिम प्रवासियों अर्थात हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई को भारतीय राष्ट्रीयता प्रदान की जाएगी। अब नियम तैयार हैं और ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार है तथा पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, आवेदकों को उस वर्ष की घोषणा करनी होगी, जब उन्होंने यात्रा दस्तावेजों के बिना भारत में प्रवेश किया था, आवेदकों से कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा।

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