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भारतीय समुद्री इलाकों के लिए खतरा : | Chinese Spy Ship |

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भाईसाब…आज हम चर्चा करेंगे चीन के नापाक मंसूबों जिसके जरिये वह भारत की जमीं पर कब्जा करना चाहता है…। नियत में खोट रखने वाला चीन अक्सर दूसरों की कंधों पर बंधूक रख कर भारत पर गोली चलाने का प्रयास करता है, लेकिन हर बार उसकी चाल नाकामयाब हो जाती है…। भाईसाब ताजा मामला सामने आया है अब वह कंगाल श्रीलंका के जरिये भारत की जासूसी करवा रहा है। चीन पिछले एक साल से तेजी से भारत से सटे समुद्री इलाकों को स्कैन कर रहा है। इसके लिए चीनी जासूसी जहाज लगातार हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर का चक्कर लगा रहे हैं। ये जहाज ऐसे डेटा जुटा रहे हैं, जिनका इस्तेमाल भविष्य में नौसैनिक ऑपरेशन के लिए किया जा सकता है।
आज हम इस लेख के माध्यम से आपको चीन के जासूसी जहाजों के बारे में बताएँगे जो समुद्री रास्तों के जरिये भारत की जासूसी कर रहे हैं…। कमजोर देशों को मोहरा बनाकर चीन भारत के खिलाफ षडयंत्र रच रहा है…।
भाईसाब…ये जानना आपके लिए जरूरी है कि उपग्रहों के जरिए समुद्री जहाजों की तुरंत स्थिति बतानी वाली वेबसाइट वेसेल फाइंडर ने कई हफ़्तों पहले ही बता दिया था कि चीन का कथित शोधी जहाज ‘शी यान 6’ अपनी 12 समुद्री मील की सामान्य रफ्तार से चलता हुआ श्रीलंका के कोलम्बो स्थित हंबनटोटा बंदरगाह में अक्टूबर माह पहुंच गया। 60 लोगों के क्रू वाला यह पोत जब 10 सितंबर 2023 को अपने घरेलू बंदर गुआंगजौ से निकला, 14 सितंबर 2023 को सिंगापुर में दिखा और 27 सितंबर 2023 को मलक्का के जलडमरू मध्य को पार कर रहा था, तब अखबारों में इसके श्रीलंका पहुंचकर जासूसी करने के बारे में काफी कुछ लिखा गया। सरकार ने एक मिसाइल परीक्षण के समय को आगे बढ़ाया, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने श्रीलंका दौरा किया। भाईसाब…आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि ‘शी यान 6’ एक तथाकथित चीनी रिसर्च जहाज है। ये जहाज राष्ट्रीय जलीय संसाधन अनुसंधान और विकास एजेंसी के साथ शोध करता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये चीन का एक जासूसी जहाज है। ‘शि यान 6’ जहाज विज्ञान और शिक्षा के बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए चीन की 13वीं पंचवर्षीय योजना की एक प्रमुख परियोजना है। अपने उद्घाटन के दो साल बाद, जहाज ने 2022 में पूर्वी हिंद महासागर में अपनी पहली यात्रा सफलतापूर्वक की थी। दरअसल चीन का ये जासूसी जहाज ऐसे समय में हिंद महासागर में उतरा है जब भारत बैलिस्टिक मिसाइल का यूजर-ट्रायल करने वाला था। ऐसे में अगर भारत परीक्षण करता है तो इस जासूस जहाज को भारतीय मिसाइल की खुफिया जानकारी पता चल सकती है। चीन को इस मिसाइल की स्पीड, रेंज और एक्यूरेसी का पता चल सकता है। पिछले साल भी कुछ ऐसा ही हुआ था। जब भारत के परीक्षण से कुछ दिन पहले चीन ने अपने जासूसी जहाज हिंद महासागर में छोड़ दिए थे। चीन की इस हरकत से ये तो साफ है कि यह देश बार बार ऐसा करके भारत को उकसाने की कोशिश कर रहा है।
भाईसाब…चीन का यह जासूसी जहाज श्रीलंका में है और श्रीलंका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता कपिला फोंसेका के मुताबिक इसे कुछ दिनों के लिए काम करने की अनुमति दी गयी है। वास्तव में यह चीनी इच्छा के अनुरूप मौजूद है तथा पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की स्ट्रैटजिक सपोर्ट फोर्स की मर्जी के मुताबिक तब तक टिका रहेगा जब तक वह अपने मंसूबे पूरे नहीं कर लेता। लेकिन रनिल विक्रमसिंघे और शी जिपिंग की मुलाकात के बाद चाइना डेली ने संयुक्त बयान का मूल पाठ छापा, इसमें चीन का शोधी जहाज कहीं नहीं था। भाईसाब…श्रीलंकाई अखबार द आईलैंड ने 9 अक्टूबर 2023 को ही दावा कर चुका था कि सरकार ने चीनी जहाज को नवंबर में श्रीलंकाई बंदरगाह पर ठहरने की स्वीकृति दे दी है। यह जहाज श्रीलंका के विशेष आर्थिक क्षेत्र में श्रीलंकाई नेशनल एक्वेटिक रिसोर्सेज एजेंसी के साथ मिलकर संयुक्त सैन्य समुद्री अनुसंधान करेगा। मतलब श्रीलंका सरकार सही बात छुपा रही थी। श्रीलंका चीन और भारत दोनों का कर्जदार है, पर वह चीन को तरजीह दे भारत को धोखा दे रहा है।
भाईसाब…आपको ये बाताना जरूरी है कि श्रीलंका चीन, अमेरिका और भारत के बीच पिसने से बचने के लिए ये खेल कर रहा है। अच्छी बात है कि नौसेना इजराइल और हमास युद्ध के बाद चीनी हरकतों के प्रति पूरी तरह सचेत और सतर्क हैं क्योंकि इस समय जब चीन द्वारा सीमा पर आक्रामक तैयारियों के मद्देनजर हिंद महासागर में चीनी नौसेना की बढ़ती संख्या, गतिविधियां, जासूसी की आशंका बड़ी चिंता बन चुकी हैं। यह चीनी जहाज चेन्नई, कोच्चि, विशाखापट्टनम, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र श्रीहरिकोटा के अलावा कलपक्कम, कुडनकुलम तक दूसरे सैन्य संस्थापनों के 1500 किलोमीटर से नजदीक आयेगा और संवेदनशील जानकारियां जुटाएगा।
भाभसाब…इधर, भारत ने श्रीलंका को अपनी सुरक्षा और रणनीतिक चिंताओं को दूर करने के लिए स्पष्ट रूप से आगाह कर दिया है। उधर, चीन ने बढ़ते कर्ज और खुफिया पहुंच के मकसद से कोलंबो को अपने कब्जे में कर लिया है। निगरानी क्षमताओं वाला चीनी नौसेना का एक अलग युद्धपोत HAI YANG 24 HAO भी भारत के सुरक्षा खतरों के बीच कुछ हफ्ते पहले ही कोलंबो बंदरगाह पर खड़ा किया गया है। अगस्त 2022 में भी एक अन्य चीनी सर्वे जहाज ‘युआन वांग 5’ को भारत की आपत्तियों के बावजूद ‘महासागर अनुसंधान’ के लिए हंबनटोटा बंदरगाह पर खड़ा किया गया था। भारतीय क्षेत्र के इतने करीब चीनी जहाजों की लगातार तैनाती ने राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं बढ़ा दिया है। माना जा रहा है कि इन जहाजों में फिट रडार प्रणाली का उपयोग तटीय क्षेत्रों में तैनात महत्वपूर्ण भारतीय रक्षा स्थलों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जा सकता है।
भाईसाब…चीन की हिंद महासागर में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखने की चाहत हमेशा से रही है। अब रिसर्च के नाम पर वह हमारे नजदीकी समुद्री इलाकों को स्कैन करके समुद्र तल की स्थिति और उसके पर्यावरण के जो आंकड़े जुटाएगा, हाइड्रोलॉजिकल डेटा रिकॉर्ड करेगा, मानचित्र बनायेगा। यह अध्ययन चीनी पनडुब्बियों के संचालन और उनका पता लगाने के लिए लिए बहुत काम का होगा, चीनी पनडुब्बियों को हिंद महासागर में अपनी गतिविधि बढ़ाने में खासी मदद मिलेगी। युद्ध की स्थिति में भारत की परेशानी बढ़ जाएगी। जब बांग्लादेश में चटगांव, श्रीलंका में हंबनटोटा और पाकिस्तान में ग्वादर चीन संचालित हों और उन्हें भारत को घेरने वाला मौत का त्रिकोण कहा जाता हो तो इस स्थिति को भारतीय सरकार व सेना को बहुत गंभीरता से लेना होगा।
– भाईसाब…ये थी जानकारी भारत के खिलाफ चीन के नापाक इरादे की…। आशा करते हैं यह जानकारी आपको जरूर पसंद आई होगी, ऐसी ही अन्य विषय की जानकारी के लिए जुड़े रहें भाईसाब के साथ, धन्यवाद!

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