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साइबरबुलिंग का शिकार हो रहे बच्चे | Children Cyberbullying rate increased

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Children Cyberbullying rate increased

भाईसाब, क्या आपको पता है भारत समेत दुनियाभर में बच्चे Cyber bullying का शिकार हो रहे हैं, और इसके मामले बढ़ते ही जा रहे हैं, एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है जिसके मुताबिक दुनिया के 44 देशों में हर छठवां बच्चा साइबरबुलिंग का सामना कर रहा है, इनमें 15% लड़के और 16% लड़कियों ने महीने में एक बार साइबरबुलिंग का सामना किया है, अगर उम्र की बात करें तो 11 से 15 साल के 16% बच्चे 2022 में साइबरबुलिंग के शिकार हुए हैं जो 2018 की तुलना में 3% ज्यादा हैं.

पिछले 5 सालों में बच्चों की ऑनलाइन सक्रियता जमकर बढ़ी है जिसके कारण दुनिया भर में बच्चों की साइबरबुलिंग के मामले भी बढ़ रहे हैं, आपको बताना जरूरी है कि साइबरबुलिंग एक प्रकार साइबर उत्पीड़न, यानी इंटरनेट के जरिये किसी को धमकाना, प्रताड़ित करना, ब्लेकमेलिंग करना, पीछा करना, अश्लील सामग्री जैसे टैक्स्ट मैसेज, फोटो, ऑडियो वीडियो आदि भेजना साइबर बुलिंग की श्रेणी में आता है। भाईसाब, आपको पता होना चाहिए कि कोविड महामारी ने बच्चों के एक दूसरे के प्रति आचरण में बदलाव ला दिया है, इस दौरान बच्चों में दोस्तों की वर्चुअल हिंसा का तेजी से चलन बढ़ा है, एक रिपोर्ट के अनुसार, चार साल की अवधि में स्कूल में भी बुलिंग बढ़ी है, करीब 11 फीसदी बच्चों ने स्कूल में पिछले एक माह में दो से तीन बार बुलिंग की शिकायत की है, जबकि चार साल पहले ऐसी शिकायत करने वाले बच्चों की संख्या 10 फीसदी थी। भाईसाब आपको हैरानी होगी कि बच्चे रोजाना 6 घंटे से ज्यादा ऑनलाइन समय बिता रहे हैं, ऐसे में साइबर बुलिंग और हिंसा में छोटा सी भी बढ़ोतरी बच्चों पर बढ़ा असर डाल सकती है, रिपोर्ट में 44 देशों के 2 लाख 79 हजार बच्चों पर किए अध्ययन में सबसे अधिक साइबरबुलिंग बुल्गारिया में दर्ज की गई। भाईसाब आप ये भी जानकर चौंक जाएंगे कि बच्चों और वयस्कों में बैठने के घंटे बढ़कर 6 से 9 घंटे हो चुके हैं और बच्चे अब शारीरिक गतिविधियों में सीमित रूप से सक्रिय रहते हैं, इसके कारण उनकी की धमनियों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है और वे कठोर होती जा रही हैं, इसके कारण उनमें वसा जनित मोटापा, खून में कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर, सूजन, उच्च रक्तचाप और बढ़े हुए दिल का खतरा बढ़ रहा है, इन कारणों से उनकी अकाल मौत का खतरा 47 फीसदी बढ़ जाता है। भाईसाब, साइबर बुलिंग की सबसे खतरनाक बात यह है कि यह प्रायः माता-पिता और शिक्षकों को भी नजर नहीं आता, इसके अलावा चिंता की बात है कि साइबुलिंग के शिकार बच्चों-किशोरों में आत्महत्या का विचार करने की प्रवृत्ति चार गुना बढ़ जाती है। भाईसाब, अगर कानून की बात की जाए तो भारत में इस अपराध के लिए IT Act के तहत 3 साल तक की जेल और एक लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है, इसके अलावा इंटरनेट से यौन उत्पीड़न और पोर्नोग्राफी भी साइबर बुलिंग का ही एक तरीका है, इस तरह के मामलों में अपराध साबित होने पर दोषी व्यक्ति को 5 साल तक की सजा तथा 10 लाख रुपए तक का जुर्माना किया जा सकता है।

चलते-चलते भाईसाब, आपको जानकारी देना जरूरी है कि कैनेडियन शिक्षक बिल बेल्सी ने सबसे पहले साइबर बुलिंग शब्द का प्रयोग किया था, इसका मुख्य उद्देश्य किसी व्यक्ति को मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाना है, साइबर बुलिंग से जुड़े अपराधों को मोबाइल फोन, कंप्यूटर, लैपटॉप आदि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से अंजाम दिया जाता है, डिजिटल वर्ल्ड के विस्तार और इंटरनेट के बढ़ते उपयोग के कारण पिछले कुछ सालों से इस तरह की घटनाएं भी ज्यादा सामने आ रही हैं, ऐसे में हर किसी को सावधान रहने की जरूरत है।

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