Home Haal-khayal चिकनगुनिया को मात देने आ गई वैक्सीन | Chikungunya Vaccine |

चिकनगुनिया को मात देने आ गई वैक्सीन | Chikungunya Vaccine |

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भाईसाब, क्या आपको पता है, अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारियों ने चिकनगुनिया के लिए दुनिया की पहली वैक्सीन को मंजूरी दे दी है। यूरोप के वलनेवा द्वारा तैयार की गई वैक्सीन को ‘इक्स्चिक’(Ixchiq) के नाम से बाजार में उतारा जाएगा। 18 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों को यह वैक्सीन लगाई जाएगी। चिकनगुनिया की पहचान पहली बार 1952 में तंजानिया में हुई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 110 से अधिक देशों में चिकनगुनिया का प्रचार-प्रसार दर्ज किया गया है।
आज हम अपने इस लेख में चिकनगुनिया को मात देने के लिए बनाई गयी पहली वैक्सीन के बारे में जानकारी देंगे।इस लेख को अंत तक जरूर पढ़े और आखिरी में अपना कमेंट अवश्य दें।

भाईसाब, आपकी जानकारी के लिए ये जानना जरूरी है कि आमतौर पर चिकनगुनिया का कहर अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और अमेरिका के कुछ हिस्सों में देखा जाता है। हालांकि अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी FDA के मुताबिक चिकनगुनिया वायरस अब नए भौगोलिक क्षेत्रों में फैल गया है, जिससे बीमारी का वैश्विक प्रसार बढ़ गया है। पिछले 15 वर्षों में इसके 50 लाख से अधिक मामले सामने आए हैं। आपको बात दें कि वैक्सीन से किसी भी व्यक्ति को अत्यधिक कमजोर करने वाली बीमारी की रोकथाम में मदद मिलेगी। इसके लक्षण कभी-कभी महीनों या वर्षों तक रह सकते हैं, लेकिन इसका वायरस शायद ही कभी घातक होता है। वर्तमान में इसके लिए कोई विशिष्ट दवा नहीं है। दर्द और बुखार से राहत के लिए सामान्य दवाएं ही उपलब्ध हैं। अब वैक्सीन को एक खुराक इंजेक्ट की जाएगी, जो चिकनगुनिया वायरस का एक जीवित, कमजोर संस्करण खून में पहुंचाएगी। इससे चिकनगुनिया ठीक होगा और उसका प्रसार भी नहीं होगा।
भाईसाब, आपको बता दें कि वैक्सीन में चिकनगुनिया वायरस का जीवित कमजोर रूप होता है और टीका लेने के बाद व्यक्ति में चिकनगुनिया के रोगी के समान लक्षण पैदा हो सकते हैं। कंपनी ने उत्तरी अमेरिका के 3500 लोगों पर वैक्सीन का परीक्षण किया है। वैक्सीन देने के बाद लोगों में सिरदर्द, थकान, जोड़ों व मांसपेशियों में दर्द, बुखार और मतली जैसे लक्षण देखे गए। वहीं वैक्सीन ने क्लिनिकल परीक्षण के तीसरे चरण में ‘अत्यधिक सुरक्षात्मक’ परिणाम प्रदर्शित किए हैं। इसमें कहा गया है कि वैक्सीन का एक डोज देने के 28 दिनों बाद तक ये 98।9 प्रतिशत प्रभावशाली रही है। जिन 266 लोगों को वैक्सीन लगाई गई थी, उनमें से 263 लोगों में इम्यूनिटी को लेकर प्रतिक्रिया उत्पन्न हुई है। चिकनगुनिया वायरस के संक्रमण से घातक बीमारियों और लंबे समय तक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती है। चिकनगुनिया वायरस नवजात शिशुओं के लिए भी घातक है। FDA की मंजूरी से वैक्सीन के वैश्विक रोलआउट में तेजी आने की उम्मीद है। वैक्सीन को एक ही शॉट में दिया जाएगा। इस साल सितंबर तक चिकनगुनिया के लगभग 440,000 मामले सामने आए हैं, जिनमें 350 मौतें शामिल हैं। भाईसाब, बता दें कि चिकनगुनिया के इलाज के लिए कोई दवा नहीं है और इस साल सबसे अधिक मामले दक्षिण अमेरिका और दक्षिण एशिया में सामने आए हैं।
भाईसाब, आप यह भी जान ले कि कारगर उपचार के अभाव में अब तक संक्रमण से बचाव का एकमात्र तरीका मच्छर के काटने से बचना था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन से मच्छरों को बढ़ावा मिल रहा है। मच्छरों के नए भौगोलिक क्षेत्रों में जाने से संभावित भविष्य में चिकनगुनिया महामारी का खतरा हो सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के वैज्ञानिकों ने अध्ययन के जरिये पहली बार पता लगाया है कि चिकनगुनिया बुखार विभिन्न राज्यों में भारतीयों को कैसे प्रभावित करता है। साइंटिफिक मैपिंग के निष्कर्षों से पता चला कि महाराष्ट्र या कर्नाटक की तुलना में चंडीगढ़ के रोगियों में चिकनगुनिया वायरस के चकत्ते अधिक होने की संभावना है। महाराष्ट्र सहित 10 राज्यों के 13 अस्पतालों के डॉक्टरों ने 196 रोगियों से नमूने एकत्र किए थे। अध्ययन में पाया गया कि चिकनगुनिया रोग से पीड़ित कम से कम आधे मरीज शुरुआती दिनों में जोड़ों के दर्द से पीड़ित थे, लेकिन दर्द से पीड़ित 75% लोगों के लिए यह अवधि महीनों या वर्षों तक बढ़ सकती है। चिकनगुनिया वायरस के बुखार, जोड़ों का दर्द और सुबह की जकड़न जैसे सामान्य लक्षणों के अलावा शोधकर्ताओं ने रेट्रो-ऑर्बिटल (आंख) दर्द, मतली, पेट दर्द, चकत्ते, फोटोफोबिया और कंजक्टीवाइटस जैसे असामान्य लक्षणों की पहचान भी की है।
आपको यह जानकारी देना जरूरी है कि 2008 से अब तक चिकनगुनिया के कम से कम दुनिया में 50 लाख मामले सामने आए हैं। यूरोपीय रोग निवारण और नियंत्रण केंद्र के आंकड़ों से पता चलता है कि ब्राजील में इस साल अब तक सबसे अधिक 2,18,613 मामले सामने आए हैं। भारत में भी 93,000 से अधिक मामले सामने आए हैं, जहां 2016 में देश की राजधानी दिल्ली में बड़ा प्रकोप देखा गया था। चिकनगुनिया और डेंगू के लक्षण मिलते-जुलते हैं। आमतौर पर इसके लक्षण कई दिनों तक दिखाई नहीं देते हैं, इस वजह से इसकी गंभीरता भी ज्यादा होती है।
तो भाईसाब, ये थी जानकारी चिकनगुनिया के वैक्सीन की, आशा करते हैं कि यह जानकारी आपको जरूर पसंद आयी होगी, ऐसी ही अन्य रोचक जानकारी के लिए जुड़े रहें भाईसाब के साथ, धन्यवाद!

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