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चारधाम परियोजना पर उठते सवाल! | Chardham Project |

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भाईसाब, हाल ही हुए सुरंग हादसे से केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी चारधाम परियोजना पर उठते सवाल उठने लगे हैं। उत्तरकाशी में सुरंग बनाते समय जिस तरह का हादसा हुआ और 41 मजदूर फंस गए थे उसे देखते हुए आगे के लिए सबक लेना आवश्यक है। यदि चारधाम महामार्ग परियोजना जारी रही तो ऐसे और भी हादसे हो सकते हैं। इस बार तो भगीरथ प्रयासों से 17 दिनों से फंसे सभी मजदूर बचा लिए गए लेकिन आगे के लिए सतर्कता बरतनी होगी। विकास कीजिए लेकिन खतरों के प्रति सावधान बने रहिए।
आज के इस लेख में हम केंद्र सरकार की चारधाम परियोजना को कठघरे में खड़ा करेंगे और केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी चारधाम परियोजना के बारे में जानेंगे।

भाईसाब, लगता है कि चारधाम महामार्ग परियोजना बनाते समय पर्यावरण संबंधी आपत्तियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। पहले भी तो जोशी मठ के मकानों में बड़ी-बड़ी दरारें आईं और जमीन धंसी थी। आपको हम बता दें कि यह इलाका भूस्खलन या लैंडस्लाइड का है। सड़क चौड़ी करने के लिए पहाड़ और वृक्षों को काटना पड़ता है और सुरंग बनानी पड़ती है। इससे पहाड़ कमजोर होते हैं। मिट्टी और चट्टानें लुढ़कती हैं। भाईसाब, सवाल ये उठता है कि क्या हिमाचल की टोपोग्राफी यह बर्दाश्त कर सकती है। सड़कों और सुरंगों के बन जाने से वाहनों का यातायात बहुत बढ़ जाएगा। यह क्षेत्र इतना बोझ सहन कर पाने योग्य नहीं है। इस बात को क्यों ध्यान में नहीं रखा जा रहा कि चारधाम महामार्ग परियोजना के तहत जो हर मौसम वाली सड़क यानी आलवेदर रोड का निर्माण हो रहा है, वह भूकंप प्रवण और कच्ची चट्टानों का क्षेत्र है। वहां पहाड़ टूटने का खतरा हमेशा मौजूद रहता है। बार्डर रोड आर्गनाइजेशन तथा आईटीबीपी की निगरानी रहने से वहां की देखभाल हो रही है और जहां मलबा व पत्थर लुढ़कते हैं, वहां यातायात रोक दिया जाता है। भाईसाब, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जो लोग गंगोत्री, जमुनोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ की यात्रा कर आए हैं, वे जानते हैं कि वहां स्थिति कितनी खतरनाक है। प्रकृति से छेड़छाड़ का नतीजा आत्मघाती हो सकता है। ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण को क्षति से ही ग्लेशियर पिघलते हैं। 10 वर्ष पूर्व हुई केदारनाथ त्रासदी से भी सीख नहीं ली गई। पर्यावरण संबंधी आशंकाओं और खतरों को क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है? विरोध तो टिहरीबांध बनाने का भी हुआ था कि इतनी अधिक जलराशि का बोझ वहां के पहाड़ी क्षेत्र उठा नहीं पाएंगे। पानी रिसता रहेगा और बांध टूट भी सकता है लेकिन पर्यावरणविदों की भारी आपत्तियों को भी नजरअंदाज कर दिया गया। यह क्यों नहीं सोचा जा रहा कि कुशल तकनीक के बावजूद कुदरत के रौद्र रूप के सामने इंसान असहाय साबित होता है।
भाईसाब, बस, अब बहुत हो गया। समय आ गया है, जब जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। परियोजनाओं की गहरी जांच होनी चाहिए और जियोलॉजिकल व जियो टेक्नीकल जांचों की रिपोर्ट पर गंभीरता भी दिखानी होगी। उत्तराखंड में टनल बनाने के दौरान विस्फोटकों का इस्तेमाल खुलकर किया जा रहा है। सिलक्यारा टनल में भूस्खलन किसी बड़े विस्फोट का नतीजा हो सकता है। जहां भूस्खलन हुआ, टनल उसके काफी आगे तक खोदी जा चुकी है। जिस जगह काम पूरा हो चुका है, वहां भूस्खलन होना सवाल खड़े करता है। इस परियोजना का जियोलॉजिकल सर्वेक्षण बहुत सतही है। भाईसाब, विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में इस तरह की बड़ी योजनाएं बनाने के लिए जितने तरह के भूगर्भीय सर्वे होने चाहिए, वे हो नहीं रहे हैं। दरअसल ऐसे सर्वे और इस तरह की जांचों में ज्यादा पैसा और ज्यादा समय लगता है। सरकारें चाहती हैं कि कम पैसे और कम से कम समय में परियोजनाएं पूरी हो जाएं। सिलक्यारा जैसी घटना इसी का नतीजा हैं।
भाईसाब, वास्तव में सुरंग हादसों के मामलों में दुनिया का यह सबसे जटिल अभियान किसी एक व्यक्ति, किसी एक तकनीक और किसी एक टीम की बदौलत कामयाब नहीं हुआ उसकी कामयाबी में सब लोगों की भागीदारी रही। यहां तक कि विज्ञान पर भरोसे के साथ साथ भगवान से भी मदद की याचिका की गई। ऑस्ट्रेलियाई टनल एक्सपर्ट डिस्क ने हर दिन बचाव अभियान के दरवाजे पर बने अस्थाई मंदिर में हर दिन कई बार प्रार्थना की, भले इनका सीधे सीधे इस कामयाबी में कोई हिस्सेदारी न हो, लेकिन इससे कुदरत के सामने इंसानी विनम्रता तो दर्ज हुई ही।
भाईसाब, अगर इस पूरे अभियान में सबसे ज्यादा किसी को श्रेय देना हो तो निश्चित रूप से उन रैट माइनर्स को दिया जा सकता है, जिन्होंने सिर्फ अपनी कुशलता ही इस अभियान में नहीं झोंकी बल्कि अपनी जिंदगी को भी दांव में लगाकर 41 मजदूरों की जान बचायी। इन रैट माइनर्स की हिम्मत और जज्बे ने ही इस चमत्कार से लगने वाले अभियान को अंतिम दौर पर सफल बनाया, जिसकी कहानियां अब बरसों तक सुनी सुनायी जाएंगी।
तो भाईसाब, ये थी जानकारी केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी चारधाम परियोजना के बारे में, आशा करते हैं कि यह जानकारी आपको जरूर पसंद आई होगी,ऐसी ही अन्य जानकारी के लिए जुड़े रहें भाईसाब के साथ, धन्यवाद!

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